ओडिशा: सरकारी भर्ती पोर्टल्स में 'ट्रांसजेंडर' के लिए होगा अलग विकल्प, सुरक्षा और सुविधाओं के लिए सरकार का कदम

ओडिशा सरकार का फैसला: सरकारी नौकरियों और परीक्षाओं में थर्ड जेंडर को मिलेगा समान अवसर, मुफ्त सर्जरी और शिक्षा में 1% आरक्षण का भी प्रस्ताव।
सांकेतिक तस्वीर
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भुवनेश्वर: राज्य सरकार ने शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए सभी विभागों को कड़े निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत यह सुनिश्चित किया जाएगा कि हर सरकारी भर्ती पोर्टल और परीक्षा प्रक्रिया में 'ट्रांसजेंडर या थर्ड जेंडर' को एक स्पष्ट और अलग विकल्प के रूप में शामिल किया जाए। इस पहल का मुख्य उद्देश्य सार्वजनिक रोजगार के क्षेत्र में सभी को समान अवसर प्रदान करना है।

यह अहम दिशा-निर्देश पुनर्गठित राज्य ट्रांसजेंडर कल्याण बोर्ड की पहली बैठक के दौरान जारी किया गया। इस महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता सामाजिक सुरक्षा एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण (SSEPD) मंत्री नित्यानंद गोंड ने की। बोर्ड ने यह भी आदेश दिया है कि जिला कलेक्टरों के नेतृत्व वाले 'जिला ट्रांसजेंडर संरक्षण प्रकोष्ठों' को पूरी तरह से सक्रिय किया जाए। इससे ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के खिलाफ होने वाले अपराधों की जांच, शिकायतों का तुरंत पंजीकरण और उन्हें उचित कानूनी सुरक्षा मिलना सुनिश्चित हो सकेगा।

समुदाय को ऑनलाइन उत्पीड़न और सोशल मीडिया पर होने वाली मानहानि से बचाने के लिए भी एक विशेष रूपरेखा तैयार की गई है। इसके तहत एक समर्पित 'ट्रांसजेंडर साइबर सुरक्षा सेल' की स्थापना का प्रस्ताव रखा गया है। इसके साथ ही, समुदाय की शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए एक टोल-फ्री हेल्पलाइन भी शुरू करने की योजना बनाई गई है।

बैठक में चल रही कल्याणकारी योजनाओं की समीक्षा के साथ-साथ ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए स्वास्थ्य, शिक्षा, आवास और सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने वाले कई नए प्रस्तावों पर गहन विचार-विमर्श हुआ। स्वास्थ्य सेवाओं के अंतर्गत सरकारी मेडिकल कॉलेजों में मुफ्त 'जेंडर-अफर्मेशन सर्जरी' और समर्पित स्वास्थ्य केंद्र स्थापित करने का प्रस्ताव रखा गया है। वहीं, आवास के मोर्चे पर उन्हें पीएम-आवास (PM-AWAS) और वसुंधरा योजनाओं के तहत लाभान्वित करने की तैयारी है।

शिक्षा के क्षेत्र में ट्रांसजेंडर समुदाय को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए भी बड़े कदम प्रस्तावित हैं। इनमें शिक्षण संस्थानों में एक प्रतिशत (1%) आरक्षण, ट्यूशन फीस माफी, अलग छात्रावास और समर्पित वॉशरूम बनाने जैसी सुविधाएं शामिल हैं।

इन सब के अलावा, बोर्ड ने पुरी में एक सामुदायिक भवन के निर्माण का भी प्रस्ताव दिया है। नीतियों को अधिक ठोस और साक्ष्य-आधारित बनाने के उद्देश्य से एलजीबीटी (LGBT) समुदाय की एक व्यापक जनगणना कराने का भी निर्णय लिया गया है, ताकि भविष्य में उनकी सटीक जरूरतों के हिसाब से योजनाएं बनाई जा सकें।

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