मध्य प्रदेश: मुंबई की ट्रांसजेंडर पर इंदौर में हमला, पुलिस ने नहीं दर्ज किया मामला!

पुलिस ने किन्नर का अरबिंदो अस्पताल में उपचार कराया और टैक्सी कराकर मुम्बई भेज दिया।
विजय नगर थाना, इंदौर, मध्य प्रदेश
विजय नगर थाना, इंदौर, मध्य प्रदेश

भोपाल। मध्य प्रदेश के इंदौर शहर के विजयनगर क्षेत्र में मुंबई से आए एक किन्नर पर बदमाशों ने शराब की बोतल से हमला कर दिया। जिससे वह घायल हो गई। आरोपी किन्नर को शराब पिलाकर संबंध बनाने के लिए दबाव बना रहा था। किन्नर के मना करने पर हमला कर फरार हो गया। सूचना मिलने पर पुलिस ने किन्नर का अरबिंदो अस्पताल में उपचार कराया और टैक्सी कराकर मुम्बई भेज दिया। इस घटना के बाद एक बार फिर ट्रांसजेंडर्स की सुरक्षा पर सवाल खड़ा हो गया है। इसके पहले भी किन्नरों के साथ मारपीट की घटनाएं सामने आईं हैं।

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, इंदौर के विजयनगर इलाके में मेघदूत गार्डन के पास एक निजी होटल में देर रात को जोया नाम की किन्नर पर हमला हुआ। जानकारी के मुताबिक वह मुंबई से उज्जैन महाकाल मंदिर दर्शन के लिए आई थी। उज्जैन से लौटने के बाद वह इंदौर आकर विजय नगर की एक होटल में ठहरी थी।

जानकारी मुताबिक ट्रांसजेंडर जोया उज्जैन से लौटी थी और इंदौर में एक दिन रुक कर उसे मुंबई जाना था। इसलिए शनिवार को दिन में ही मेघूदत गार्डन के पास घूमने गई थी। यहां उसका खजराना में रहने वाले एक बदमाश ने पीछा किया। फिर बदमाश ने दोस्ती के लिए हाथ बढ़ाया। बदमाश ने जोया का फोन नंबर लिया था। मेघदूत गार्डन से जाने के बाद युवक ने मोबाइल पर बातचीत शुरू कर दी।

बातचीत में होटल का पता पूछने के बाद आरोपी युवक जोया से मिलने होटल पहुंच गया। जोया से बातचीत करते.करते शराब ऑफर की। शराब पीते ही बदमाश ने संबंध बनाने के लिए दबाव बनाया। जोया के मना करने पर आरोपी युवक ने विवाद किया। इस दौरान आरोपी ने शराब की बोतल फोड़कर जोया के हाथ और चेहरे पर हमला कर दिया। घायल जोया मदद के लिये बाहर आई। इसके बाद उसे अस्पताल ले जाया गया। मौके पर पहुँची पुलिस ने मामला दर्ज न करते हुए एक टैक्सी करा कर जोया को मुंबई भेज दिया। द मूकनायक ने इस मामले में विजयनगर पुलिस थाने में फोन किए पर बात नहीं हो पाई।

द मूकनायक से बातचीत करते ट्रांसजेंडर एक्टिविस्ट संजना सिंह ने कहा कि अक्सर किन्नरों पर हमला होता है। कुछ लोग गलत नजर से हमारे समुदाय को देखते हैं। इंदौर में मुंबई की किन्नर के साथ यह घटना निंदनीय है। पुलिस को तुरंत एफआईआर दर्ज करनी चाहिए थी। प्रदेश में यदि उभय लिंगी बोर्ड का गठन हो जाता तो इस माध्यम से कार्रवाई की जा सकती थी।

उभयलिंगी बोर्ड का गठन भी अटका

अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन संस्थान ने नीति बनाकर साल 2021 में प्रदेश सरकार के सामाजिक न्याय विभाग को सौंप दी है। नीति के मुताबिक देश के अन्य राज्यों की तरह मध्य प्रदेश में ट्रांसजेंडर्स के उत्थान के लिए उभयलिंगी बोर्ड का गठन करने का सुझाव था। जिसको साल 2022 में कैबिनेट ने भी मंजूरी दी थी। इसके बावजूद भी बोर्ड का गठन नहीं हुआ। ट्रांसजेंडर्स के विकास, शिक्षा और उनके साथ घट रही आपराधिक घटनाओं पर बोर्ड शासन को अनुशंसा करता है।

ट्रांसपर्सन प्रोटेक्शन ऑफ राइट एक्ट 2019 के मुताबिक ट्रांसजेंडर व्यक्तियों से भेदभाव पर प्रतिबंध लगाता है। जिसमें निम्नलिखित के संबंध में सेवा प्रदान करने से इनकार करना या अनुचित व्यवहार करना शामिल है। इनमें  शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य सेवाएं, सार्वजनिक स्तर पर उपलब्ध उत्पादों, सुविधाओं और अवसरों तक पहुंच और उसका उपभोग, किसी प्रॉपर्टी में निवास करने, उसे किराये पर लेने, स्वामित्व हासिल करने या अन्यथा उसे कब्जे में लेने का अधिकार, सार्वजनिक या निजी पद को ग्रहण करने का अवसर और किसी सरकारी या निजी प्रतिष्ठान तक पहुंच जिसकी देखभाल या निगरानी किसी ट्रांसजेंडर व्यक्ति द्वारा की जाती है।

दो साल की सजा का प्रावधान

ट्रांसजेंडर व्यक्ति अधिकारों का संरक्षण एक्ट 2019 के मुताबिक ट्रांसजेंडर के साथ घटने वाली घटनाओं पर दो साल तक की सजा और आर्थिक दंड का प्रावधान है। एक्ट के मुताबिक ट्रांसजेंडर व्यक्तियों से भीख मंगवाना, बलपूर्वक या बंधुआ मजदूरी करवाना, इसमें सार्वजनिक उद्देश्य के लिए अनिवार्य सरकारी सेवा शामिल नहीं है। उन्हें सार्वजनिक स्थान का प्रयोग करने से रोकना, परिवार, गांव इत्यादि में निवास करने से रोकना, और उनका शारीरिक, यौन, मौखिक, भावनात्मक और आर्थिक उत्पीड़न करना। इन अपराधों के लिए सजा छह महीने और दो वर्ष के बीच की है और जुर्माना भी भरना पड़ सकता है।

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