
नई दिल्ली: चुनाव आयोग द्वारा गुरुवार को जारी किए गए नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, पश्चिम बंगाल के मुस्लिम बहुल मुर्शिदाबाद जिले के शमशेरगंज और लालगोला विधानसभा क्षेत्रों में मतदाता सूची से सबसे अधिक नाम हटाए गए हैं। पोस्ट-एसआईआर न्यायिक प्रक्रिया के बाद इन क्षेत्रों में यह भारी कटौती देखने को मिली है। इसके ठीक विपरीत, पुरुलिया-झाड़ग्राम के आदिवासी बहुल इलाकों में मतदाताओं के नाम सबसे कम काटे गए हैं।
मुर्शिदाबाद जिले के आंकड़े काफी चौंकाने वाले हैं। शमशेरगंज में न्यायिक समीक्षा के दायरे में आए कुल 1,08,400 नामों में से 74,775 मतदाताओं को सूची से बाहर कर दिया गया है। इसी तरह लालगोला क्षेत्र में 99,082 में से 55,420 नाम हटा दिए गए हैं। राज्य भर की पूरक मतदाता सूचियों से हटाए गए कुल 27 लाख नामों में से एक बड़ा हिस्सा केवल इन्हीं इलाकों से आता है।
इस व्यापक कटौती के बाद अब पश्चिम बंगाल में कुल मतदाताओं की संख्या 6.7 करोड़ रह गई है। विधानसभावार आंकड़ों पर गौर करें तो मुर्शिदाबाद के अलावा मालदा, उत्तर दिनाजपुर, दक्षिण 24-परगना और बीरभूम में भी बड़े पैमाने पर नाम काटे गए हैं। इसके साथ ही उत्तर 24-परगना और नदिया के मतुआ बहुल इलाकों में भी कई मतदाताओं ने अपना वोटिंग अधिकार खो दिया है।
आगामी 29 अप्रैल को दूसरे चरण में मतदान करने वाले 142 विधानसभा क्षेत्रों के लिए गुरुवार को मतदाता सूचियों को अंतिम रूप देकर फ्रीज कर दिया गया। इसका सीधा अर्थ यह है कि चुनाव संपन्न होने तक अब किसी भी नाम को जोड़ने, हटाने या सुधारने की कोई अनुमति नहीं होगी। इससे पहले 6 अप्रैल को पहले चरण में मतदान करने वाले 152 निर्वाचन क्षेत्रों की सूचियों को सील कर दिया गया था।
मतदाता सूची से बाहर किए गए इन 27 लाख लोगों के लिए अब उम्मीद की एक छोटी सी किरण बाकी है। सुप्रीम कोर्ट 13 अप्रैल को पश्चिम बंगाल सरकार की एक पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई करने वाला है, जिस पर सभी की निगाहें टिकी हैं।
शमशेरगंज में इतनी बड़ी संख्या में नाम काटे जाने को हाल ही में इलाके में हुई तनावपूर्ण घटनाओं से भी जोड़कर देखा जा रहा है। यहां वक्फ (संशोधन) अधिनियम से जुड़े विरोध प्रदर्शन और राम नवमी के जुलूस के दौरान भारी हिंसक झड़पें देखने को मिली थीं।
पड़ोसी जिले मालदा में मोथाबाड़ी एक नए तनाव के केंद्र के रूप में उभरा है। बीते 1 अप्रैल को यहां मतदाता सूची से थोक में नाम हटाए जाने के खिलाफ विरोध प्रदर्शन अचानक हिंसक हो गया था। आक्रोशित भीड़ ने सड़कें जाम कर दीं, सुरक्षा बलों के साथ उनकी तीखी झड़प हुई और कई घंटों तक न्यायिक अधिकारियों का घेराव किया गया।
मोथाबाड़ी में समीक्षा के अधीन रखे गए 79,683 नामों में से 37,000 से अधिक नामों को मतदाता सूची से साफ कर दिया गया है। नदिया जिले की बात करें तो कृष्णानगर उत्तर, कृष्णानगर दक्षिण, राणाघाट उत्तर पश्चिम, राणाघाट उत्तर पूर्व और राणाघाट दक्षिण में स्थिति और भी गंभीर है। इन पांचों जगहों पर समीक्षा के दायरे में रखे गए 90% से अधिक लोग सूची में अपनी जगह नहीं बचा सके।
बनगांव के सभी छह विधानसभा क्षेत्रों में भी नाम हटाए जाने का प्रतिशत 67% से लेकर 88% के बीच रहा है। इस हफ्ते की शुरुआत में ये आंकड़े सामने आने के बाद से ही बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी लगातार इस मुद्दे को मुखरता से उठा रही हैं। उन्होंने इस पूरी प्रक्रिया को "लक्षित बहिष्करण" (टारगेटेड एक्सक्लूजन) करार दिया है।
अखिल भारतीय मतुआ महासंघ के सचिव सुकेश चौधरी ने इस पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची से इस तरह सामूहिक रूप से नाम हटाए जाने के कारण समुदाय के भीतर भारी बेचैनी और घबराहट का माहौल है। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि मुख्यमंत्री द्वारा दी गई कानूनी सहायता की पेशकश काफी हद तक राहत देने वाली है।
दूसरी तरफ, भाजपा की बनगांव इकाई के बिकेश घोष ने प्रभावित मतदाताओं को आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों के नाम काटे गए हैं, उन्हें अपना नाम वापस जुड़वाने के लिए ट्रिब्यूनल का दरवाजा खटखटाने में पार्टी की तरफ से पूरी सहायता दी जाएगी।
राज्य के दो सबसे हाई-प्रोफाइल और चर्चित विधानसभा क्षेत्रों, कोलकाता के भवानीपुर और पूर्वी मिदनापुर के नंदीग्राम में नाम काटे जाने की दर राज्य के औसत से काफी नीचे रही। भवानीपुर में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का सीधा मुकाबला भाजपा के कद्दावर नेता शुभेंदु अधिकारी से है।
भवानीपुर क्षेत्र में केवल 27.5% नाम काटे गए, जहां समीक्षा के अधीन आए 14,154 नामों में से 3,893 को हटाया गया। वहीं नंदीग्राम में, जहां शुभेंदु अधिकारी अपनी पूर्व सहयोगी और अब टीएमसी उम्मीदवार पवित्र सरकार के खिलाफ चुनावी मैदान में हैं, वहां समीक्षा के अधीन 10,616 मतदाताओं में से 32.6% यानी 3,461 नाम सूची से बाहर किए गए।
पुरुलिया के मानबाजार में स्थिति इन सभी क्षेत्रों से बिल्कुल अलग और सामान्य है। यहां समीक्षा के अधीन 2,771 मतदाताओं में से मात्र 71 नाम ही काटे गए। पुरुलिया के ही एक अन्य क्षेत्र ओंदा में तो केवल 1% मतदाताओं के नाम हटाए जाने की सूचना दर्ज की गई है।
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