
पटना- शहर के गर्दनीबाग में दो दिन तक धरने पर बैठे वायरल बॉय छह वर्षीय आदित्य राज का आंदोलन सोमवार देर रात पूर्णिया के निर्दलीय सांसद पप्पू यादव के पहुंचने के बाद खत्म हो गया। सांसद ने बच्चे और उसके परिवार को न्याय दिलाने का वादा किया तथा कहा कि मामला पटना हाईकोर्ट और जरूरत पड़ने पर सुप्रीम कोर्ट तक ले जाएंगे। आदित्य ने कहा कि धरना खत्म करना उसकी हार नहीं है, लड़ाई अब अदालत में चलेगी।
आदित्य कुमार पहली कक्षा का छात्र है। परिवार मूल रूप से गया के अतरी प्रखंड के मोहम्मदपुर का है, फिलहाल पटना के पुनाईचक में किराए के कमरे में रहता है। पिता रंजीत कुमार दिहाड़ी मजदूर हैं। मां मुन्नी कुमारी घरों में घरेलू काम करती हैं। आदित्य परिवार का इकलौता बच्चा है। माता-पिता का कहना है कि छात्र आंदोलन में शामिल होना बच्चे का अपना फैसला था। वह खबरें देखता है और छात्रों के साथ हो रहे अन्याय की बात करता था।
25 अगस्त को पटना में बीपीएससी और टीआरई-4 अभ्यर्थियों ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के आवास का घेराव करने का प्रयास किया। मांगों में टीआरई-4 में सिंगल टियर परीक्षा, नेगेटिव मार्किंग हटाना और डोमिसाइल नीति शामिल थीं। छात्र गांधी मैदान से निकले, बैरिकेड तोड़कर डाकबंगला चौराहे पहुंचे। स्थिति बिगड़ी तो पुलिस ने लाठीचार्ज और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया।
आदित्य हाथ में तिरंगा और पोस्टर लेकर माता-पिता के साथ वहां पहुंचा था। परिवार का आरोप है कि पुलिस ने बच्चे को भीड़ से उठाया, उन्हें थाने ले गई और कई घंटे रोके रखा। पिता रंजीत कुमार का कहना है कि थाने के एक कमरे में उन दोनों के साथ मारपीट हुई। मां मुन्नी कुमारी का आरोप है कि बच्चे को करीब 7-8 घंटे माता-पिता से अलग रखा गया और उन्हें धमकी दी गई कि आगे प्रदर्शन में न ले जाएं। आदित्य का कहना है कि थाने में पहले माता-पिता का काम पूछा गया। जब मां ने सफाई का काम और पिता ने मजदूरी बताया, तब उनके साथ बदसलूकी हुई। उसने कहा कि गरीब होने की वजह से इज्जत नहीं मिली।
पुलिस ने गिरफ्तारी और मारपीट दोनों आरोप खारिज किए हैं। पुलिस का पक्ष है कि तनावपूर्ण भीड़ में बच्चे की सुरक्षा के लिए उसे थाने ले जाया गया और बाद में मां को सौंप दिया गया।
घटना के बाद आदित्य सोशल मीडिया पर चर्चा में आया। परिवार ने डीजीपी विनय कुमार से मुलाकात की, प्रधानमंत्री को पत्र लिखा और पटना हाईकोर्ट भी गया। कार्रवाई न होने का आरोप लगाते हुए 30 अगस्त रविवार से आदित्य गर्दनीबाग धरना स्थल पर बैठ गया। हाथ में संविधान की किताब लेकर वह मौन भी रहा।
उसकी मांग थी- माता-पिता के साथ कथित मारपीट करने वाले पुलिसकर्मियों और अधिकारियों का निलंबन, प्रधानमंत्री से मुलाकात और यह सुनिश्चित करना कि किसी और के माता-पिता के साथ ऐसा न हो। उसने कहा था, “दशरथ मांझी ने जैसे पहाड़ तोड़ा, उसी तरह मैं इस सरकार का घमंड तोड़ दूंगा। जब तक न्याय नहीं मिलेगा, यहां से नहीं हटूंगा।” धरना स्थल पर “पढ़ाई और लड़ाई साथ-साथ चलेंगे” लिखे पोस्टर लगे थे।
31 अगस्त देर रात पप्पू यादव धरना स्थल पहुंचे। उन्होंने परिवार से बात की और कानूनी लड़ाई लड़ने का भरोसा दिया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी भी बच्चे से मिलेंगे। आदित्य ने सांसद को “गरीबों का मसीहा” बताया और कहा कि मुश्किल समय में उन्होंने उसका स्कूल दाखिला करवाया था, इसलिए उनकी बात मानकर धरना खत्म कर रहा है। लड़ाई अदालत में जारी रहेगी।
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