काशी विश्वनाथ मंदिर में श्रद्धालु से मारपीट और जातिसूचक गालियां, SC-ST कोर्ट ने SDM को किया तलब

वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर में श्रद्धालु के साथ बदसलूकी और जातिसूचक टिप्पणी के मामले में एससी-एसटी कोर्ट ने एसडीएम को 3 नवंबर को तलब किया है।
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अदालत / कोर्ट (सांकेतिक तस्वीर)
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उत्तर प्रदेश: वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर में एक श्रद्धालु के साथ हुई कथित मारपीट और दुर्व्यवहार के मामले में अदालत ने सख्त रुख अपनाया है। एससी-एसटी एक्ट की विशेष अदालत ने इस मामले में संज्ञान लेते हुए एसडीएम शंभू शरण को आगामी 3 नवंबर को तलब किया है। आरोप है कि उन्होंने मंदिर परिसर में एक श्रद्धालु के साथ मारपीट की, जातिसूचक गालियां दीं और अभद्र व्यवहार किया।

इस मामले में अदालत ने अपना आदेश बीते 8 सितंबर को ही पारित कर दिया था, लेकिन इसकी जानकारी रविवार को सामने आई। शिकायतकर्ता बाबूलाल सोनकर ने अपनी याचिका में बताया कि घटना 16 फरवरी की रात करीब 12:30 बजे की है। उस वक्त वह अपने परिचित अनुज पांडेय के साथ मंदिर परिसर में मौजूद थे।

सोनकर का आरोप है कि घटना के समय एसडीएम अपने निजी बाउंसरों के साथ वहां मौजूद थे और श्रद्धालुओं को धक्का दे रहे थे। शिकायत के अनुसार, अधिकारी के इशारे पर बाउंसरों ने सोनकर को पकड़ लिया, उनके साथ गाली-गलौज की और उनका गला घोंटने की कोशिश की। इतना ही नहीं, उन पर जातिसूचक टिप्पणियां कर उन्हें सार्वजनिक रूप से अपमानित भी किया गया।

बीच-बचाव करने आए अनुज पांडेय के साथ भी कथित तौर पर बुरी तरह मारपीट की गई। घायल अवस्था में उन्हें इलाज के लिए कबीरचौरा मंडलीय अस्पताल ले जाया गया। सोनकर ने बताया कि इस गंभीर घटना के बाद उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन पुलिस की तरफ से कोई भी कार्रवाई नहीं की गई।

पुलिस से निराशा मिलने के बाद पीड़ित ने अदालत का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने अपनी शिकायत के साथ मेडिकल रिपोर्ट, अपना जाति प्रमाण पत्र और घटना से जुड़े सीसीटीवी फुटेज कोर्ट में पेश किए। अदालत ने शिकायतकर्ता के आरोपों, गवाहों के बयानों और सीसीटीवी फुटेज सहित सभी इलेक्ट्रॉनिक सबूतों की गहनता से जांच की।

अदालत ने इन सबूतों को प्रथम दृष्टया विश्वसनीय माना है और अर्जी को परिवाद के तौर पर दर्ज करने का आदेश दिया। इसी कानूनी प्रक्रिया के तहत अब एसडीएम शंभू शरण को 3 नवंबर को अदालत के सामने पेश होने के लिए समन जारी किया गया है।

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