मणिपुर: हिंसा की आग में सुलग रहे मणिपुर के कामजोंग जिले में हालात एक बार फिर बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं। शनिवार से अब तक चासाड गांव में कुकी-ज़ो समुदाय के 30 से ज्यादा घरों को आग के हवाले कर दिया गया है। लगातार हो रहे हमलों और दहशत के माहौल के बीच स्थानीय ग्रामीण अपने घर छोड़कर सुरक्षित ठिकानों की ओर पलायन करने को मजबूर हैं।
इस गंभीर स्थिति के बीच प्रशासन ने पुलिस विभाग में बड़ा फेरबदल किया है। भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के अधिकारी जय बारंगे को कामजोंग जिले का नया पुलिस अधीक्षक (एसपी) नियुक्त किया गया है। उन्होंने मणिपुर पुलिस सेवा के अधिकारी ठोलू रॉकी की जगह ली है, जो अब तक जिले के प्रभारी एसपी का पद संभाल रहे थे।
कामजोंग और विशेष रूप से चासाड गांव में हालात शनिवार को तब बेकाबू हो गए, जब एक जानलेवा हमले में गांव के निवासी सेखोहाओ हाओकिप की मौत हो गई और चार अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। जानकारी के मुताबिक, शनिवार दोपहर करीब 2 बजे चासाड पुलिस स्टेशन से महज 60 मीटर की दूरी पर कुकी-ज़ो समुदाय के कुछ लोग बिजली के तारों की मरम्मत कर रहे थे, तभी उन पर अचानक अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी गई।
कुकी-ज़ो काउंसिल (केजेडसी) के अनुसार, कामजोंग जिले में महज एक हफ्ते के भीतर समुदाय के चार नागरिकों की निर्मम हत्या की जा चुकी है। वहीं, कामजोंग जिले की कुकी सीएसओ वर्किंग कमेटी ने रविवार को एक बयान जारी कर बताया कि शनिवार शाम करीब 5:30 बजे हालात और ज्यादा भयावह हो गए। इलाके में भारी गोलीबारी की गई और बम से हमले किए जाने की भी खबरें हैं। समिति ने इस पूरी हिंसा के लिए नागा उग्रवादी गुटों से जुड़े हथियारबंद तत्वों को जिम्मेदार ठहराया है।
समिति का कहना है कि इन लगातार हो रहे हमलों ने गांव के बुजुर्गों, महिलाओं, बच्चों और अन्य कमजोर वर्गों को अपनी जान बचाने के लिए बार-बार विस्थापित होने पर मजबूर कर दिया है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि सेखोहाओ हाओकिप की मौत और इस जानलेवा फायरिंग के पीछे की सच्चाई सामने लाने के लिए एक स्वतंत्र और समयबद्ध जांच कराई जाए।
इस बीच, कुकी-ज़ो काउंसिल ने शनिवार की हिंसा में एनएससीएन-आईएम (NSCN-IM) की संलिप्तता के आरोपों की भी निष्पक्ष जांच की मांग की है। परिषद ने अपने बयान में कहा कि गोलीबारी की घटना के बाद लगातार नए हमले हुए, जिसमें 30 से अधिक घर जला दिए गए और लोगों को गांव छोड़ने पर विवश कर दिया गया।
काउंसिल ने इस बात पर भी कड़ा एतराज जताया है कि एनएससीएन-आईएम के कैडरों को कामजोंग, उखरुल और चंदेल जिलों में खुलेआम घूमने और वारदातों को अंजाम देने की छूट क्यों दी गई है, जबकि उनका संघर्ष विराम समझौता केवल नागालैंड की सीमाओं तक ही सीमित है।
इसके अलावा, परिषद ने यह गंभीर आरोप भी लगाया है कि कामजोंग में कुकी-ज़ो नागरिकों के खिलाफ एक अघोषित "आर्थिक नाकेबंदी" थोप दी गई है, जिससे वे रोजमर्रा की जरूरी चीजें तक नहीं खरीद पा रहे हैं। उन्होंने मांग की है कि आवश्यक वस्तुओं की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जाए और नागरिकों की सुरक्षा के लिए चासाड गांव से लेकर पुलिस स्टेशन तक तत्काल केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती की जाए।
कुकी-ज़ो काउंसिल ने गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि लगातार हो रही ये हत्याएं और घरों का जलाया जाना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि समुदाय को उनकी पैतृक जमीन से खदेड़ने की साजिश रची जा रही है। उन्होंने भारत सरकार और मणिपुर सरकार दोनों से यह सुनिश्चित करने की अपील की है कि नागरिकों को सुरक्षा दी जाए, दोषियों को सख्त सजा मिले, पीड़ित परिवारों को अनुग्रह राशि दी जाए और जिनके घर राख कर दिए गए हैं, उन्हें उचित मुआवजा दिया जाए।
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