
नई दिल्ली: 21 दिसंबर, 2025 को कर्नाटक के धारवाड़ जिले में एक दिल दहला देने वाली घटना घटी थी। सात महीने की गर्भवती 19 वर्षीय मान्या पाटिल की उसके ही पिता और रिश्तेदारों ने पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। उसका कसूर सिर्फ इतना था कि उसने परिवार की मर्जी के खिलाफ एक दलित लड़के से शादी की थी। इस खौफनाक वारदात ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया था।
इसी घटना के बाद राज्य सरकार ने ऑनर किलिंग यानी झूठी शान की खातिर होने वाली हत्याओं पर लगाम कसने का फैसला किया। इसके लिए एक ऐतिहासिक कानून 'द फ्रीडम ऑफ चॉइस इन मैरिज एंड प्रिवेंशन एंड प्रोहिबिशन ऑफ क्राइम्स इन द नेम ऑफ ऑनर एंड ट्रेडिशन बिल, 2026' लाया गया है। इसे 'इवा नम्मावा इवा नम्मावा बिल' के नाम से भी जाना जाता है। हाल ही में संपन्न हुए बजट सत्र के दौरान राज्य विधानमंडल में इस बिल को पारित कर दिया गया है। फिलहाल इसे लागू होने के लिए राज्यपाल की मंजूरी का इंतजार है।
'इवा नम्मावा इवा नम्मावा' का अर्थ 'वे हमारे अपने लोग हैं' होता है। इस कानून की सबसे बड़ी खासियत शादी में अपनी पसंद की आजादी देना है। बिल में स्पष्ट किया गया है कि अगर दो वयस्क शादी करने का फैसला करते हैं, तो उन्हें माता-पिता, परिवार, जाति या कबीले की सहमति की कोई आवश्यकता नहीं होगी। यह कानून प्रेमी जोड़ों के खिलाफ होने वाली हिंसा, धमकी या उत्पीड़न को अपराध की श्रेणी में रखता है और दोषियों के लिए सख्त सजा का प्रावधान करता है। साथ ही, यह कानून जोड़ों को उनके रिश्ते को आगे बढ़ाने के लिए पूरी कानूनी सहायता भी प्रदान करता है।
इस कानून में जिला स्तर पर 'इवा नम्मावा वेदिके' के गठन का भी निर्देश दिया गया है। यह अधिकारियों और विशेषज्ञों का एक निकाय होगा, जिसकी अध्यक्षता उपायुक्त (डिप्टी कमिश्नर) करेंगे। इसका मुख्य काम अंतर-जातीय विवाह संपन्न कराने में मदद करना और जोड़ों को जरूरी काउंसलिंग देना होगा।
ऐसे अपराधों से जुड़े मामलों की जल्द सुनवाई के लिए विशेष फास्ट-ट्रैक अदालतें भी स्थापित की जाएंगी। इसके अलावा, कानून को जमीनी स्तर पर सही ढंग से लागू करने के लिए एक जिला स्तरीय निगरानी समिति भी बनाई जाएगी।
सजा के मामले में यह नया कानून बेहद सख्त रुख अपनाता है। भारतीय न्याय संहिता के मौजूदा प्रावधानों के बावजूद, ऑनर किलिंग के दोषियों को कम से कम पांच साल की अतिरिक्त जेल की सजा काटनी होगी। जोड़े को डराने-धमकाने के आरोप में भी केस दर्ज किया जा सकेगा। इस कानून के तहत आने वाले सभी अपराध संज्ञेय और गैर-जमानती होंगे।
कर्नाटक के कई हिस्सों में आज भी जाति व्यवस्था गहरी जड़ें जमाए हुए है। खासकर पिछड़े इलाकों के कई गांव अब भी पूरी तरह से जाति के आधार पर बंटे हुए हैं। सरकारी आंकड़ों पर गौर करें तो पिछले पांच सालों में राज्य में ऑनर किलिंग के लगभग 15 मामले सामने आ चुके हैं।
वोक्कालिगा और लिंगायत जैसे प्रमुख समुदायों द्वारा अंतर-धार्मिक या अंतर-जातीय जोड़ों के खिलाफ हिंसा की छिटपुट घटनाएं अक्सर होती रही हैं। साल 2025 में ही ऐसे तीन बड़े मामले दर्ज किए गए थे। इन तीनों मामलों में शिकार हुई किशोरियां थीं, जिनकी हत्या महज इसलिए कर दी गई क्योंकि उन्होंने 'निचली जाति' के लड़कों से संबंध बनाए या शादी की थी।
ये तीनों मामले उत्तरी कर्नाटक के हुबली, रायचूर और कलबुर्गी जिलों से सामने आए थे। हालांकि, पुराना मैसूर क्षेत्र भी अंतर-जातीय संबंधों को लेकर होने वाली इस तरह की हिंसा से अछूता नहीं रहा है।
द मूकनायक की प्रीमियम और चुनिंदा खबरें अब द मूकनायक के न्यूज़ एप्प पर पढ़ें। Google Play Store से न्यूज़ एप्प इंस्टाल करने के लिए यहां क्लिक करें.