
उत्तर प्रदेश: देवरिया जिले से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। यहां के लावकानी गांव में गुरुवार को उस वक्त भारी तनाव फैल गया, जब सरकारी जमीन पर बिना अनुमति के लगाई गई डॉ. बीआर अंबेडकर की मूर्ति को हटाने गई पुलिस और राजस्व विभाग की टीम पर स्थानीय लोगों ने पथराव कर दिया। इस हिंसक घटना में कई पुलिसकर्मियों और प्रशासनिक अधिकारियों को गंभीर चोटें आई हैं।
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, उन्हें यह सूचना मिली थी कि गांव के सरकारी खलिहान की जमीन पर बिना किसी पूर्व अनुमति के डॉ. अंबेडकर की प्रतिमा स्थापित की जा रही है। शुरुआती बातचीत के दौरान, मूर्ति स्थापित करने वाले लोग आपसी सहमति से इसे हटाने के लिए राजी भी हो गए थे।
हालांकि, जैसे ही प्रशासन की टीम ने शांतिपूर्वक तरीके से मूर्ति हटाने की प्रक्रिया शुरू की, भीड़ में मौजूद एक गुट अचानक उग्र हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि इसी दौरान अधिकारियों पर ईंट और पत्थरों से जोरदार हमला बोल दिया गया, और इस हिंसक प्रदर्शन में कई महिलाएं भी बढ़-चढ़कर शामिल थीं।
हालात बेकाबू होते देख अपर पुलिस अधीक्षक (एएसपी) सुनील कुमार सिंह तुरंत आसपास के थानों की अतिरिक्त पुलिस फोर्स के साथ मौके पर पहुंच गए। स्थिति को और अधिक बिगड़ने से रोकने के लिए गांव में प्रांतीय सशस्त्र पीएसी (PAC) के जवानों की भी भारी तैनाती कर दी गई है।
इस गंभीर मामले में पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर लिया है और महिलाओं सहित कुछ उपद्रवियों को हिरासत में ले लिया है। इसके साथ ही, पत्थरबाजी में शामिल अन्य लोगों की पहचान करने के लिए घटनास्थल के वीडियो फुटेज को बारीकी से खंगाला जा रहा है।
तनाव को देखते हुए प्रशासन ने फिलहाल मूर्ति को सुरक्षित गौरीबाजार थाने भिजवा दिया है। इसके अलावा, जिस चबूतरे पर इस प्रतिमा को स्थापित किया गया था, उसे भी पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया गया है।
देवरिया के जिलाधिकारी मधुसूदन हुल्गी ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए स्पष्ट किया है कि हिंसा के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने इस पूरे प्रकरण में किसी भी तरह की प्रशासनिक लापरवाही का पता लगाने के लिए जांच के भी आदेश दे दिए हैं।
वहीं, देवरिया के पुलिस अधीक्षक (एसपी) अभिजीत आर शंकर ने आम जनता को आश्वस्त किया है कि फिलहाल गांव में शांति बहाल कर दी गई है और हालात पूरी तरह से पुलिस के नियंत्रण में हैं।
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