राजस्थान: सभी के लिए न्याय को सुनिश्चित करे वैधानिक संस्थान- रवि नायर

राजस्थान: सभी के लिए न्याय को सुनिश्चित करे वैधानिक संस्थान- रवि नायर

राजस्थान। मानवाधिकार कार्यकर्ता रवि नायर ने कहा कि देश में चल रही नफरत व वैमनस्य की हवाओं को रोकने के लिए कानूनी संस्थानों को सभी के लिए न्याय व देश के प्रत्येक नागरिक की सुरक्षा सुनिश्चित करना होगा। जिससे देश में इन वैधानिक संस्थानों को गिरते विश्वास को भी बल मिलेगा व देश में खुले आम होने वाले व्यक्तिगत व सामूहिक दोनों प्रकार के अपराधों को लगाम लग पाएगी।

नायर देश में मानवाधिकारों की लिए काम करते हैं तथा राजस्थान की राजधानी जयपुर शहर में एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स (एपीसीआर) राजस्थान की ओर से कानूनी प्रशिक्षण कार्यशाला में बोल रहे थे। नायर ने देश भर में मानव अधिकारों के हनन से जुड़े मामलों पर कहा कि हमें ऐसे मामलों से निपटने व न्याय के लिए कानूनी रूप से लड़ना होगा।

आपको को बता दें कि एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स (एपीसीआर) राजस्थान एक राष्ट्रीय मानव अधिकार संगठन है। यह संगठन देश भर में मुख्य रूप से वंचित, पिछड़े व प्रताडि़त लोगों को कानून से संबंधित सहायता व सलाह देने का काम करता है। पिछले एक दशक से एपीसीआर संगठन देश, प्रदेश व जिला स्तर पर शोषित, पीड़ित व वंचित लोगों को उनके अधिकार दिलाने व उन्हें जागरूक करने का काम कर रहा है।

इसी कड़ी में जयपुर शहर व आस-पास के इलाकों में संगठन के लिए काम करने वाले वॉलंटियर्स को प्रशिक्षित करने के लिए जयपुर शहर के एक निजी होटल में एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया है।

इस प्रशिक्षण कार्यशाला में संगठन का परिचय, सूचना का अधिकार अधिनियम का उपयोग करने, पुलिस में प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करने का तरीका। अवैधानिक गिरफ्तारी के खिलाफ कानूनी लड़ाई, लिखित प्रमाण, महत्व व उपयोगिता, भारत में मानव अधिकारों की लड़ाई व डिजिटल युग में नफरत को रोकने का तरीका आदि विषयों पर चर्चा कर वॉलियंटर्स को प्रशिक्षण दिया गया।

एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स (एपीसीआर) राजस्थान के कार्यकर्ता व देहली शाखा के ऑफिस को-ऑर्डिनेटर एम. हुजैफा ने कहा कि हमें कानून पर भरोसा करते हुए देश मे सोशल मीडिया व अन्य माध्यमों से बढ़ती साम्प्रदायिकता व नफरत के माहौल को बदलने की जरूरत है। वो नफरत फैलाने में हमें मोहब्बत के साथ संवैधानिक तरीके से बात रखने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि हक और अधिकारों की लड़ाई के लिए कानूनी प्रक्रिया को सही तरीके से अपनाने के लिए आमजन को प्रेरित करने की जरूरत है।

एपीसीआर के प्रदेश महासचिव मुजम्मिल रिजवी ने राजस्थान एपीसीआर का रिपोर्ट कार्ड पेश करते हुए संगठन के द्वारा किए गए जनहित व मानव अधिकार के कार्यों की प्रगति रिपोर्ट पेश की। रिजवी ने मंच पर संगठन के द्वारा शोषित, वंचित व पिछड़ों के हकों की कानूनी लड़ाई का जिक्र भी किया गया।

जोधपुर उच्च न्यायालय के अधिवक्ता रज्जाक खान हैदर ने सूचना अधिकार कानून के बारे में जानकारी प्राप्त करने के बारे में विस्तार से बताते हुए इससे होने वाले लाभ भी बताए। साथ ही देश में सरकारी संस्थानों के उत्तरदायित्व में इस कानून की महत्व को लोगों को समझाया।

संगठन के प्रदेश अध्यक्ष एडवोकेट सैय्यद सआदत अली ने कहा कि देश में न्याय को कायम करने के लिए सभी वर्गों व समुदायों से लोगों को आगे आना होगा। देश में भाईचारा, प्रेम व सौहार्द बढ़ाने के लिए नफरत के सौदागरों से मुकाबला करने की जरूरत है। हमें मिलकर कानूनी तौर पर इन देश में भाईचारा खत्म करने वाली ताकतों से मुकाबले के लिए हमेशा तत्पर रहने की जरूरत है। तब ही हमारा मुल्क अमन व भाईचारे के साथ तरक्की कर सकता है।

सह सचिव राजस्थान एडवोकेट मुनाजिर इस्लाम ने भी एफआईआर और अवैध गिरफ्तारी पर चिंता जताते हुए इससे बचने के उपायों के बारे में बताया। जयपुर शहर के सचिव मोहम्मद अंसार ने अतिथियों व प्रशिक्षणर्थियों का स्वागत किया। इस प्रशिक्षण कार्यशाला में 60 लोगों को प्रशिक्षण दिया गया।

यह भी पढ़ें-
राजस्थान: सभी के लिए न्याय को सुनिश्चित करे वैधानिक संस्थान- रवि नायर
मणिपुर हिंसा ग्राउंड रिपोर्ट: चुराचांदपुर में प्रवेश के लिए सिर्फ मुस्लिम ड्राइवर ही क्यों?
राजस्थान: सभी के लिए न्याय को सुनिश्चित करे वैधानिक संस्थान- रवि नायर
मणिपुर हिंसा ग्राउंड रिपोर्ट: रिलीफ कैंपों के कम स्पेस में करवटों में दिन गुजारती गर्भवती महिलाएं, नवजातों की जिंदगियां दांव पर
राजस्थान: सभी के लिए न्याय को सुनिश्चित करे वैधानिक संस्थान- रवि नायर
मणिपुर हिंसा ग्राउंड रिपोर्ट: "हम गिड़गिड़ाए, लेकिन भीड़ बोली कपड़े उतारो नहीं तो तुम्हें मार डालेंगे ...!"

द मूकनायक की प्रीमियम और चुनिंदा खबरें अब द मूकनायक के न्यूज़ एप्प पर पढ़ें। Google Play Store से न्यूज़ एप्प इंस्टाल करने के लिए यहां क्लिक करें.

Related Stories

No stories found.
The Mooknayak - आवाज़ आपकी
www.themooknayak.com