राजस्थान: डॉ. भीमराव अंबेडकर दलित आदिवासी उद्यम प्रोत्साहन योजना कार्यशाला का हुआ आयोजन

एसटी-एससी वर्ग के लोगों के लिए अपना उद्यम स्थापित करने का सुनहरा मौका. ऋण पर अधिकतम 9 प्रतिशत तक ब्याज अनुदान, योजनाओं का गांव-गांव करें प्रचार -कलक्टर
डॉ. भीमराव अंबेडकर दलित आदिवासी उद्यम प्रोत्साहन योजना की आमुखीकरण कार्यशाला को संबोधित करते जिला कलक्टर।
डॉ. भीमराव अंबेडकर दलित आदिवासी उद्यम प्रोत्साहन योजना की आमुखीकरण कार्यशाला को संबोधित करते जिला कलक्टर।

उदयपुर। जिला कलक्टर ताराचंद मीणा की पहल पर जिला परिषद सभागार में गुरुवार दोपहर राज्य सरकार की डॉ. भीमराव अंबेडकर दलित आदिवासी उद्यम प्रोत्साहन योजना की आमुखीकरण कार्यशाला का आयोजन हुआ। कार्यशाला में एसटी व एससी समुदाय के संगठनों, समाजसेवी, पदाधिकारियों एवं स्थानीयजन को योजना के प्रावधानों की जानकारी दी और इसका प्रचार-प्रसार कर अधिकाधिक लोगों को लाभ दिलवाने की कलक्टर ने अपील की।

ग्रामीण क्षेत्र में इन योजनाओं के व्यापक प्रचार की जरूरत - कलक्टर

कलक्टर मीणा ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति वर्ग के लोगों की आर्थिक स्थिति सुधारने और उन्हें उद्योग स्थापित करने का अवसर देने के लिए यह योजना शुरू की गई है लेकिन जागरूकता के अभाव में उदयपुर के निवासी इसका लाभ नहीं ले पा रहे हैं। कलक्टर ने यह भी बताया कि मुख्यमंत्री की पहल पर अब जिले के हर उपखण्ड में औद्योगिक क्षेत्र खोले जा रहे हैं जिनसे बड़ी संख्या में स्थानीय लोग लाभान्वित होंगे। कलक्टर ने कहा कि जिले में बड़ी संख्या में एसटी-एससी वर्ग के लोग निवास करते हैं जिन्हें आर्थिक संबल की जरूरत है। साधारणतः लोग नौकरियों की तलाश में रहते हैं जबकि वे सरकार की योजनाओं का लाभ उठाकर खुद रोजगार पाने के साथ-साथ अन्य लोगों को भी रोजगार दे सकते हैं। ऐसे में हमें इस योजना को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक ले जाने की जरूरत है।

प्रशासन हर संभव सहयोग के लिए तत्पर

कार्यशाला में जिला उद्योग केंद्र की उप निदेशक मंजू माली ने कहा कि योजना के तहत किसी पात्र व्यक्ति को कोई भी संशय या परेशानी हो तो वह जिला उद्योग केंद्र आकर संपर्क कर सकता है। ऐसे लोगों की हर संभव मदद की जाएगी। उन्होंने कहा कि हमें उदयपुर को इस योजना में नम्बर वन रैंक पर लाना है। एलडीएम राजेश जैन ने कहा कि बैंकों द्वारा इस योजना में पूरा सहयोग प्रदान किया जाएगा फिर भी कहीं कोई समस्या हो तो उनसे संपर्क कर सकते हैं।

अधिकतम 10 करोड़ का ले सकते हैं ऋण

कार्यशाला में उप निदेशक माली ने बताया कि योजना में प्रार्थी अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति वर्ग से सम्बन्धित होना चाहिए। आवेदक की उम्र 18 वर्ष से अधिक होनी चाहिए तथा वह राजस्थान का मूल निवासी होना चाहिए। योजना के तहत विनिर्माण क्षेत्र के उद्यम के लिए अधिकतम 10 करोड़ रुपए, सेवा उद्यम के लिए अधिकतम 5 करोड़ रुपए तथा व्यापार के लिए अधिकतम 1 करोड़ रुपए का ऋण लिया जा सकता है। आवेदक डिफॉल्टर नहीं होना चाहिए।

उन्होंने बताया कि योजना के तहत 25 लाख रुपए के ऋण पर 9 प्रतिशत ब्याज अनुदान, 25 लाख से 5 करोड़ के ऋण पर 7 प्रतिशत, 5 करोड़ से 10 करोड़ रुपए के ऋण पर 6 प्रतिशत ब्याज अनुदान देय है। योजना में ऋण राशि का 25 प्रतिशत या अधिकतम 25 लाख रुपए मार्जिन मनी अनुदान भी देय है। इस प्रकार इस योजना में दो प्रकार का अनुदान मार्जिन मनी अनुदान व ब्याज अनुदान का लाभ देय है। ऋण का स्वरुप कम्पोजिट ऋण (सावधि एवं कार्यशील पूंजी) अथवा सावधि ऋण होगा। विनिर्माण एवं सेवा उद्यमों की परियोजनाओं में कार्यशील पूंजी की सीमा कुल परियोजना लागत के अधिकतम 40 प्रतिशत तक होगी जबकि व्यापारी उद्यमों में यह सीमा 90 प्रतिशत तक होगी। कार्यशील पूंजी घटक में कार्यशील पूंजी सावधि ऋण एवं क्रेडिट लिमिट ही मान्य होगी। ऋण समयावधि 3 से 7 वर्ष तक होगी। ब्याज अनुदान 5 वर्ष तक ही देय होगा। वित्तीय संस्थानों द्वारा ऋण अदायगी में अधिकतम 6 माह की अवधि की शिथिलता प्रदान की जाएगी।

कार्यशाला के दौरान रीको एसआरएम संजय नैनावटी, जिला उद्योग अधिकारी भगवान दास, उद्योग प्रसार अधिकारी चोखाराम एवं आर्थिक अन्वेक्षक प्रिंस परमार आदि उपस्थित रहे।

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