
उत्तर प्रदेश: साल 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों से पहले दलित वोट बैंक को मजबूत करने के लिए कांग्रेस ने एक नई रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। बहुजन समाज पार्टी के संस्थापक कांशीराम को याद करने के बाद, अब पार्टी का पूरा ध्यान अपने दिग्गज दलित नेता और पूर्व उप प्रधानमंत्री जगजीवन राम पर केंद्रित हो गया है।
इसी कड़ी में शनिवार को जगजीवन राम की 118वीं जयंती की पूर्व संध्या पर लखनऊ स्थित यूपी कांग्रेस मुख्यालय में एक विशेष सेमिनार और सम्मान समारोह का आयोजन किया जा रहा है। इस कार्यक्रम के जरिए पार्टी दलित समुदाय के बीच अपनी पैठ और मजबूत करना चाहती है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस आयोजन का मुख्य विषय सामाजिक न्याय, समानता और समावेशी विकास में जगजीवन राम के योगदान पर आधारित होगा। पूर्व लोकसभा अध्यक्ष और जगजीवन राम की बेटी मीरा कुमार शुक्रवार को ही लखनऊ पहुंच चुकी हैं। इस भव्य कार्यक्रम में वह मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होंगी। साथ ही, भारी संख्या में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं के भी पहुंचने की उम्मीद है।
कार्यक्रम के दौरान राष्ट्र निर्माण में बाबू जगजीवन राम के अमूल्य योगदान पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। इसके बाद एक विशेष 'सम्मान समारोह' भी आयोजित किया जाएगा। पार्टी से जुड़े लोगों का कहना है कि यह आयोजन दलित समुदाय के बीच कांग्रेस के अपने दिग्गज नेताओं की विरासत को फिर से स्थापित करने की एक बड़ी कोशिश का हिस्सा है।
यूपी कांग्रेस के अध्यक्ष अजय राय ने इस संबंध में बताया कि जगजीवन राम उनके एक ऐसे महान दलित नेता हैं, जिनका सम्मान समाज का हर वर्ग करता है। उन्होंने देश के लिए हर स्तर पर अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान दिया है। चाहे हरित क्रांति के दौरान कृषि मंत्री की भूमिका हो, या फिर रक्षा मंत्री और उप प्रधानमंत्री के रूप में देश की सेवा करना हो, उनका काम बेमिसाल रहा है। अजय राय ने आगे कहा कि वे इस जयंती को बेहद भव्य तरीके से मनाने जा रहे हैं और मीरा कुमार इसमें मुख्य अतिथि होंगी।
पार्टी द्वारा हाल ही में कांशीराम जयंती को प्रमुखता से मनाने के सवाल पर अजय राय ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस उन सभी महापुरुषों का सम्मान कर रही है जिन्होंने वंचितों को मुख्यधारा में लाने का काम किया है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि जिस विचारधारा को कांशीराम ने आगे बढ़ाया, उसकी नींव जगजीवन राम जी ने उनसे बहुत पहले ही रख दी थी। कांग्रेस ऐसे सभी नेताओं का जश्न मनाएगी।
पार्टी के एक अन्य वरिष्ठ नेता ने भी इसी भावना को दोहराते हुए कहा कि कांग्रेस के भीतर काफी समय से यह महसूस किया जा रहा था कि अन्य महापुरुषों के साथ-साथ हमें अपने खुद के दिग्गज नेताओं के योगदान को भी प्रमुखता से सामने लाना चाहिए।
अपने दलित आउटरीच अभियान के तहत कांग्रेस पूरे उत्तर प्रदेश में लगातार 'संविधान सम्मेलन' भी आयोजित कर रही है। लखनऊ में हुए ऐसे ही एक कार्यक्रम को रायबरेली के सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने संबोधित किया था। इसके अलावा सीतापुर और बाराबंकी में एआईसीसी महासचिव अविनाश पांडे के नेतृत्व में भी ऐसे सम्मेलन हो चुके हैं, जिनका मुख्य फोकस संवैधानिक मूल्यों और सामाजिक न्याय पर रहा है।
यह पूरी राजनीतिक कवायद इस लिहाज से भी बेहद अहम मानी जा रही है क्योंकि अगले साल उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं और राज्य की सभी प्रमुख पार्टियां दलित वोटों को अपने पाले में करने की जद्दोजहद में लगी हुई हैं। 'इंडिया' गठबंधन के नेताओं का यह दृढ़ विश्वास है कि 2024 के लोकसभा चुनावों में उनके बेहतरीन प्रदर्शन की एक बड़ी वजह दलित समर्थन का उनके पक्ष में आना था। यही कारण है कि आगामी राज्य चुनावों से पहले इस समुदाय को एक बार फिर से मुख्य फोकस एरिया बनाया गया है।
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