पन्ना में चिता आंदोलन 36वें दिन भी जारी, अमित भटनागर 21 दिन से आमरण अनशन पर; कांग्रेस नेता पूर्व मंत्री बोले- "मांगें नहीं मानीं तो राहुल गांधी आएंगे"

केन-बेतवा लिंक परियोजना सहित अन्य परियोजनाओं से प्रभावित परिवारों का विरोध प्रदर्शन जारी; आंदोलन स्थल पर पहुंचे कांग्रेस नेता सज्जन सिंह वर्मा ने मुख्यमंत्री मोहन यादव से आदिवासियों की मांगें पूरी करने की अपील की। दिव्या अहिरवार की गिरफ्तारी और आंदोलनकारियों पर कथित झूठे मुकदमे दर्ज करने का भी उठाया मुद्दा।
पन्ना में चिता आंदोलन 36वें दिन भी जारी, अमित भटनागर 21 दिन से आमरण अनशन पर; कांग्रेस नेता पूर्व मंत्री बोले- "मांगें नहीं मानीं तो राहुल गांधी आएंगे"
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भोपाल। मध्य प्रदेश के पन्ना जिले के बहनरीकला की टपरियन में केन-बेतवा लिंक परियोजना सहित अन्य परियोजनाओं से जुड़े प्रभावित परिवारों का चिता आंदोलन 36वें दिन भी जारी रहा। अपने अधिकारों और मांगों को लेकर चल रहे इस आंदोलन में सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर पिछले 21 दिनों से आमरण अनशन पर हैं। आंदोलनकारियों का विरोध लगातार जारी है। प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर सरकार से ठोस निर्णय लेने की मांग कर रहे हैं।

शनिवार को कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा आंदोलन स्थल पहुंचे। उन्होंने आंदोलनकारियों से मुलाकात की और उनकी मांगों के समर्थन में अपनी बात रखी। इस दौरान उन्होंने भारतीय जनता पार्टी की सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि सरकार ने जल्द ही प्रभावित परिवारों की मांगों पर फैसला नहीं लिया, तो कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी स्वयं पन्ना आकर आदिवासियों के साथ खड़े होंगे। वर्मा ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से भी अपील की कि वे इस मामले में हस्तक्षेप कर प्रभावित परिवारों को राहत देने के लिए आवश्यक कदम उठाएं।

आंदोलन स्थल पर मीडिया से बातचीत के दौरान सज्जन सिंह वर्मा ने कहा कि आदिवासी समुदाय के लोगों को अपने अधिकारों की मांग के लिए ऐसे तरीके अपनाने पड़ रहे हैं, जो उनकी पीड़ा और नाराजगी को सामने लाते हैं। उन्होंने कहा कि आदिवासी महिलाओं को अपने हक के लिए चिताओं पर लेटना पड़ रहा है और गले में फांसी के फंदे डालकर विरोध दर्ज कराना पड़ रहा है।

वर्मा ने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में लोगों को अपनी जायज मांगें रखने और सरकार तक अपनी बात पहुंचाने का अधिकार है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि आंदोलन को केवल विरोध प्रदर्शन के रूप में देखने के बजाय इसके पीछे मौजूद समस्याओं और प्रभावित परिवारों की चिंताओं को समझा जाए।

चिता आंदोलन के जरिए प्रभावित परिवार अपनी मांगों को लेकर सरकार का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश कर रहे हैं। आंदोलन के 36वें दिन तक जारी रहने और सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर के आमरण अनशन पर होने के बीच इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज होती दिखाई दे रही है।

दिव्या अहिरवार की गिरफ्तारी और मुकदमों का उठाया मुद्दा

सज्जन सिंह वर्मा ने आंदोलन से जुड़ी दिव्या अहिरवार की गिरफ्तारी पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलनकारियों के खिलाफ झूठे मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं। वर्मा ने इन आरोपों के संदर्भ में सरकार से जवाबदेही की मांग करते हुए कहा कि आंदोलन कर रहे लोगों की समस्याओं का समाधान करने के बजाय उनके खिलाफ कार्रवाई किए जाने से स्थिति और गंभीर हो सकती है।

उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से आग्रह किया कि वे पूरे मामले को गंभीरता से लें और प्रभावित परिवारों की मांगों पर संवेदनशीलता के साथ विचार करें। हालांकि, दिव्या अहिरवार की गिरफ्तारी और आंदोलनकारियों पर दर्ज मामलों को लेकर सरकार या पुलिस का पक्ष इस बातचीत में सामने नहीं आया।

राहुल गांधी के पन्ना आने की बात कही

सज्जन सिंह वर्मा ने कहा कि चिता आंदोलन और आदिवासी परिवारों की मांगों को लेकर कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व से चर्चा हो चुकी है। उन्होंने संकेत दिया कि यदि राज्य सरकार जल्द कोई निर्णय नहीं लेती है, तो कांग्रेस इस मुद्दे को और व्यापक स्तर पर उठाएगी।

वर्मा के मुताबिक, मांगों का समाधान नहीं होने की स्थिति में राहुल गांधी स्वयं पन्ना पहुंचकर आंदोलनरत आदिवासियों के बीच खड़े होंगे। उनके इस बयान को आंदोलन के मुद्दे पर कांग्रेस नेतृत्व की संभावित सक्रियता के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

हालांकि, राहुल गांधी के पन्ना दौरे की कोई निश्चित तारीख घोषित नहीं की गई। फिलहाल कांग्रेस नेता ने सरकार से जल्द निर्णय लेने की मांग करते हुए कहा कि प्रभावित परिवारों की समस्याओं को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

मुख्यमंत्री मोहन यादव से की भावुक अपील

आंदोलन स्थल पर मीडिया से बातचीत के दौरान सज्जन सिंह वर्मा ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से व्यक्तिगत संदर्भ देते हुए अपील की। उन्होंने कहा, "मैं जब उज्जैन का प्रभारी मंत्री था, तब हम मोहन यादव जी के बहुत काम करते थे। आज मैं इस आशा के साथ आया हूं कि मोहन यादव जी दलगत राजनीति और सरकार के प्रतिबंधनों से ऊपर उठकर सोचें। वे हमारा काम समझकर इन आदिवासी भाई-बहनों की जायज मांगें पूरी करें।"

वर्मा ने इस बयान के जरिए मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि वे राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर प्रभावित आदिवासी परिवारों की मांगों पर विचार करें। उन्होंने कहा कि सरकार को इस मामले में जल्द फैसला लेकर आंदोलन समाप्त कराने की दिशा में पहल करनी चाहिए।

उनकी अपील का मुख्य जोर इस बात पर रहा कि आंदोलन कर रहे परिवारों की समस्याओं का समाधान राजनीतिक खींचतान के बजाय संवाद और निर्णय के माध्यम से किया जाए।

अमित भटनागर की सेहत को लेकर जताई चिंता

आंदोलन स्थल पर पहुंचने के दौरान सज्जन सिंह वर्मा ने पिछले 21 दिनों से आमरण अनशन कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर की सेहत को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि सरकार को आंदोलनकारियों की मांगों पर जल्द निर्णय लेना चाहिए, ताकि आमरण अनशन और विरोध प्रदर्शन की स्थिति का समाधान हो सके।

आमरण अनशन लंबे समय तक जारी रहने की स्थिति में स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ सकते हैं। ऐसे में आंदोलनकारी की सेहत और उनकी मांगों पर सरकार की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण हो जाती है। वर्मा ने सरकार से अपील की कि वह मामले को लंबित रखने के बजाय बातचीत और निर्णय की प्रक्रिया आगे बढ़ाए।

आंदोलन स्थल पर सज्जन सिंह वर्मा के साथ युवक कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष अभिषेक परमार और पूर्व विधायक विक्रम सिंह भी मौजूद रहे। कांग्रेस नेताओं की मौजूदगी के दौरान आंदोलनकारियों की मांगों, गिरफ्तारी और मुकदमों के मुद्दे प्रमुखता से उठाए गए।

36 दिन बाद भी समाधान का इंतजार

बहनरीकला की टपरियन में जारी चिता आंदोलन ने केन-बेतवा लिंक परियोजना सहित अन्य परियोजनाओं से जुड़े प्रभावित परिवारों की चिंताओं को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। आंदोलनकारियों का प्रदर्शन 36वें दिन भी जारी रहना और अमित भटनागर का 21 दिनों से आमरण अनशन पर होना इस बात को रेखांकित करता है कि मामले का समाधान अब भी लंबित है।

शनिवार को कांग्रेस नेता सज्जन सिंह वर्मा के आंदोलन स्थल पहुंचने के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी भी सामने आई। उन्होंने मुख्यमंत्री से मांगें पूरी करने की अपील की और निर्णय नहीं होने पर राहुल गांधी के पन्ना आने की बात कही।

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