
भोपाल। मध्य प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के 27 प्रतिशत आरक्षण का मुद्दा लगातार तूल पकड़ रहा है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब इस मुद्दे पर राजनीतिक और सामाजिक संगठनों का विरोध तेज होने के संकेत हैं। आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) ने ओबीसी आरक्षण के समर्थन में आंदोलन का ऐलान किया है। दामोदर यादव की ओर से जारी पोस्टर के मुताबिक, 16 अक्टूबर को दोपहर 12 बजे मंत्री कृष्णा गौर और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के बंगले पर धरना दिया जाएगा।
इस आंदोलन का नेतृत्व मध्य प्रदेश में आजाद समाज पार्टी के नेता दामोदर यादव करेंगे। पार्टी ने पोस्टर के जरिए ओबीसी आरक्षण के सवाल पर संघर्ष जारी रखने और इस मुद्दे को लेकर सरकार तथा संबंधित राजनीतिक नेतृत्व के सामने अपनी मांगें रखने का संदेश दिया है।
27% आरक्षण रद्द होने के बाद बढ़ा विरोध
मध्य प्रदेश में ओबीसी आरक्षण को 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने का फैसला लंबे समय से कानूनी और राजनीतिक विवाद का विषय रहा है। हाल ही में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 27 प्रतिशत आरक्षण से जुड़े प्रावधान को असंवैधानिक ठहराते हुए रद्द कर दिया। इस फैसले के बाद ओबीसी संगठनों और राजनीतिक दलों की ओर से विरोध तथा कानूनी लड़ाई आगे बढ़ाने की घोषणाएं सामने आई हैं।
ओबीसी आरक्षण का सवाल केवल राजनीतिक प्रतिनिधित्व तक सीमित नहीं है। इसका सीधा संबंध शिक्षा, सरकारी नौकरियों और सामाजिक भागीदारी में पिछड़े वर्गों को मिलने वाले अवसरों से भी है। ऐसे में आरक्षण की मौजूदा स्थिति को लेकर सरकार पर कानूनी और राजनीतिक स्तर पर समाधान निकालने का दबाव बढ़ रहा है।
शिवराज सिंह चौहान और कृष्णा गौर के बंगले पर धरना
आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के नेता की ओर से जारी पोस्टर में 16 अक्टूबर को दोपहर 12 बजे धरने का ऐलान किया गया है। इसमें पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और मंत्री कृष्णा गौर के बंगले का उल्लेख किया गया है। पार्टी नेता दामोदर यादव के नेतृत्व में प्रस्तावित इस प्रदर्शन के जरिए ओबीसी आरक्षण के मुद्दे पर सरकार और भाजपा नेतृत्व से जवाब मांगने की कोशिश की जाएगी।
पार्टी ने इस आंदोलन को आरक्षण के सवाल पर संघर्ष के रूप में पेश किया है। हालांकि, प्रदर्शन के दौरान उठाई जाने वाली मांगों, कार्यक्रम के विस्तृत स्वरूप और दोनों स्थानों पर धरने की प्रशासनिक अनुमति की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने दिल्ली में की वकीलों से मुलाकात
हाईकोर्ट के फैसले के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी इस मामले के समाधान के लिए दिल्ली में अधिवक्ताओं से मुलाकात कर चुके हैं। हालांकि, सरकार हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी या नहीं, इसे लेकर अब तक स्थिति स्पष्ट नहीं है।
सरकार के अगले कदम पर ओबीसी आरक्षण का भविष्य काफी हद तक निर्भर करेगा। यदि राज्य सरकार फैसले को चुनौती देती है, तो मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट में बढ़ सकती है। फिलहाल, सरकार की ओर से इस संबंध में अंतिम निर्णय और आधिकारिक रणनीति का इंतजार है।
उमंग सिंघार ने विशेष सत्र बुलाने की मांग उठाई
मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भी ओबीसी आरक्षण के मुद्दे पर मुख्यमंत्री को घेरा है। उन्होंने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर मुख्यमंत्री से सवाल किया कि इस मामले में दिल्ली जाने की जरूरत क्यों है।
सिंघार ने मुख्यमंत्री से मध्य प्रदेश विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने और ओबीसी के 27 प्रतिशत आरक्षण को लेकर विधानसभा में प्रस्ताव पारित कराने की मांग की। उनका कहना है कि राज्य सरकार को इस मुद्दे पर स्पष्ट राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखानी चाहिए और आरक्षण के सवाल पर ठोस कदम उठाना चाहिए।
इस बयान के जरिए कांग्रेस ने सरकार पर दबाव बढ़ाने की कोशिश की है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार विशेष सत्र बुलाने की मांग पर क्या रुख अपनाती है और हाईकोर्ट के फैसले के बाद आरक्षण के मुद्दे पर आगे की रणनीति क्या रहती है।
कांग्रेस और ओबीसी महासभा भी जाएगी सुप्रीम कोर्ट
ओबीसी आरक्षण के मुद्दे पर कांग्रेस और ओबीसी महासभा ने भी कानूनी लड़ाई आगे बढ़ाने की घोषणा की है। दोनों की ओर से हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की बात कही गई है।
इससे साफ है कि मध्य प्रदेश में ओबीसी आरक्षण का विवाद अब अदालत से लेकर सड़क तक पहुंचता नजर आ रहा है। एक ओर राजनीतिक दल सरकार से कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सामाजिक संगठन आंदोलन के जरिए अपनी आवाज बुलंद करने की तैयारी में हैं।
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