उत्तर प्रदेश: सहारनपुर जिले में समाजवादी पार्टी की कैराना सांसद इकरा हसन और उनके छह अन्य साथियों के खिलाफ पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया है। इन सभी पर इस हफ्ते की शुरुआत में हुए एक विरोध प्रदर्शन के दौरान सड़क जाम करने और यातायात बाधित करने का गंभीर आरोप लगा है।
यह पूरा विवाद 19 मई की एक घटना से जुड़ा है। उस दिन सांसद इकरा हसन शामली जिले के जसाला गांव में मारे गए एक युवक की मां और अपने कई समर्थकों के साथ सहारनपुर के डीआईजी कार्यालय पहुंची थीं। सांसद का आरोप था कि डीआईजी ने पीड़ित मां की बातों को अनसुना कर दिया और कुछ ऐसी टिप्पणियां कीं जिससे उन्हें गहरी ठेस पहुंची।
इस घटना के बाद समाजवादी पार्टी की तरफ से यह दावा किया गया कि पुलिस ने इकरा हसन को हिरासत में ले लिया है। हालांकि, सहारनपुर पुलिस ने सांसद को हिरासत में लिए जाने के इन सभी दावों को पूरी तरह से खारिज कर दिया।
पुलिस कार्रवाई को लेकर सब-इंस्पेक्टर संजय कुमार शर्मा ने एक शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके आधार पर सदर बाजार पुलिस स्टेशन में एफआईआर लिखी गई है। पुलिस ने नामजद सात लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 126, 132, 191 और 121 के तहत मामला दर्ज किया है।
पुलिस की ओर से दी गई शिकायत के अनुसार, 19 मई को उन्हें यह सूचना मिली थी कि डीआईजी कार्यालय के बाहर कुछ लोगों द्वारा सड़क को बाधित किया जा रहा है। मौके पर पहुंची पुलिस टीम ने देखा कि इकरा हसन अपने समर्थकों मांगेराम, तेजपाल सिंह, अजय, अनुज, शीशपाल, सत्यपाल सिंह और 20 से 25 अन्य अज्ञात लोगों के साथ सड़क रोककर हंगामा कर रही थीं।
शिकायतकर्ता का कहना है कि ड्यूटी पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने प्रदर्शनकारियों को समझाने और वहां से हटने की बहुत कोशिश की, लेकिन उन्होंने किसी की नहीं सुनी। ट्रैफिक पुलिस ने भी जाम खुलवाने का प्रयास किया, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने यातायात बहाल नहीं होने दिया। पुलिस का आरोप है कि इस सार्वजनिक सड़क को बंद करके समूह ने आम जनता की आवाजाही को रोका और सरकारी कामकाज में सीधा हस्तक्षेप किया।
इस पूरी घटना पर 19 मई को समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट करते हुए भाजपा सरकार पर लोकतांत्रिक आवाजों को दबाने का आरोप लगाया। सपा प्रमुख ने कहा कि एक जनप्रतिनिधि होने के बावजूद पुलिस ने कैराना सांसद को जबरन रोका।
अखिलेश यादव ने राज्य सरकार पर पुलिस के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए लिखा, "जब जनता की आवाज उठाने के लिए किसी को हिरासत में लिया जाता है, तब समझ लीजिए कि सत्ता घबरा गई है।"
वहीं दूसरी तरफ, पुलिस विभाग ने एक आधिकारिक बयान जारी कर स्थिति को स्पष्ट किया है। पुलिस का कहना है कि कानूनी कार्रवाई केवल उन लोगों के खिलाफ की गई है जिन पर शांति भंग करने और यातायात बाधित करने का आरोप है। बयान में साफ तौर पर कहा गया कि सांसद इकरा हसन को पुलिस ने हिरासत में नहीं लिया था, बल्कि मजिस्ट्रेट और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने केवल उनके साथ बातचीत कर मामले को सुलझाने का प्रयास किया था।
द मूकनायक की प्रीमियम और चुनिंदा खबरें अब द मूकनायक के न्यूज़ एप्प पर पढ़ें। Google Play Store से न्यूज़ एप्प इंस्टाल करने के लिए यहां क्लिक करें.
‘द मूकनायक’ जनवादी पत्रकारिता करता है. यह संविधान, लोकतंत्र और सामाजिक न्याय पर चलने वाला मीडिया समूह है. अगर आप भी चाहते हैं कि ‘द मूकनायक’ हमेशा हाशिए पर खड़े लोगों की आवाज़ बुलंद करता रहे, बेजुबानों की पीड़ा दिखाते रहे तो सपोर्ट करें.
यहां सपोर्ट करें