
लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा में महिला आरक्षण के मुद्दे पर समाजवादी पार्टी ने सत्ताधारी भाजपा पर तीखा हमला बोला है। सदन में बोलते हुए वरिष्ठ विधायक कमाल अख्तर ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी महिला आरक्षण के नाम पर देश की जनता को गुमराह कर रही है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार महिला आरक्षण के तहत निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन के लिए 2011 की जनगणना को आधार बनाने पर जोर दे रही है।
यह रुख यूपी सरकार के उस फैसले के बिल्कुल विपरीत है जिसमें उसने 2011 की जनगणना के आधार पर पंचायत चुनाव कराने का विरोध किया था। अख्तर ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी महिलाओं को आगे बढ़ाने और संसद तथा राज्य विधानसभाओं में उन्हें आरक्षण देने की पुरजोर समर्थक है।
वहीं, सपा विधायक रागिनी सोनकर ने भाजपा पर अपनी ही महिला नेताओं की अनदेखी करने का आरोप लगाया। उन्होंने बहराइच में 25 अप्रैल को एक विरोध प्रदर्शन के दौरान झुलसीं भाजपा विधायक अनुपमा जायसवाल का जिक्र किया। सोनकर ने तंज कसते हुए कहा कि जब सपा प्रमुख अखिलेश यादव अस्पताल में जायसवाल का हालचाल जानने पहुंचे, उसके बाद ही दोनों उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक को उनसे मिलने की सुध आई।
इससे पहले दिन में, समाजवादी पार्टी के सदस्यों ने विधानसभा परिसर में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। उनके हाथों में '33 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू करो' लिखे बैनर थे। प्रदर्शनकारी विधायकों का सीधा आरोप था कि सत्ता पक्ष महिला कोटे के मुद्दे पर सिर्फ झूठ परोस कर जनता को भ्रमित कर रहा है।
सपा विधायक संग्राम सिंह ने इस मुद्दे पर सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि भाजपा जानबूझकर महिलाओं को इस कानून के लाभ से वंचित रख रही है, ताकि वह अपनी सुविधानुसार निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन करवा सके। सिंह ने कहा कि इस मुद्दे पर भाजपा की पोल खुल चुकी है और वह शुरू से ही महिला विरोधी रही है। उन्होंने याद दिलाया कि डॉ. राम मनोहर लोहिया और मुलायम सिंह यादव जैसे समाजवादी नेताओं ने हमेशा महिलाओं के अधिकारों की लड़ाई लड़ी है।
महिला आरक्षण कानून को तत्काल लागू करने की मांग करते हुए सपा विधायक अमिताभ बाजपेयी ने भी सरकार को घेरा। उन्होंने सवाल किया कि साल 2023 में पारित हो चुके इस कानून को लागू करने में भाजपा क्यों विफल साबित हो रही है। बाजपेयी ने यह भी मांग रखी कि 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव इसी महिला आरक्षण कानून के प्रावधानों के तहत कराए जाने चाहिए।
सदन के बाहर विधान परिषद में भी यह मुद्दा गूंजा। विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष लाल बिहारी यादव ने जोर देकर कहा कि समाजवादी पार्टी महिला आरक्षण की प्रबल समर्थक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि साल 2023 में संसद के दोनों सदनों से यह बिल पास हो चुका है और उनकी पार्टी को इससे कोई आपत्ति नहीं है। यादव ने आरोप लगाया कि वास्तव में भाजपा ही महिला सशक्तिकरण की आड़ में आम जनता की आंखों में धूल झोंक रही है।
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