लोकसभा में परिसीमन पर विपक्ष एकजुट: थरूर ने बताया 'राजनीतिक नोटबंदी', कनिमोझी बोलीं- यह एक जाल है

लोकसभा में महिला आरक्षण और परिसीमन बिल पर तीखी बहस; शशि थरूर ने इसे 'राजनीतिक नोटबंदी' बताया, वहीं अन्य विपक्षी नेताओं ने भी सरकार की मंशा पर उठाए गंभीर सवाल।
DMK MP Kanimozhi Karunanidhi and Shashi Tharur.jpg
डीएमके सांसद कनिमोझी करुणानिधि और कांग्रेस सांसद शशि थरूर
Published on

नई दिल्ली: परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े तीन विधेयकों पर केंद्र सरकार को घेरते हुए विपक्ष ने लोकसभा में जोरदार हमला बोला है। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने शुक्रवार को सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि परिसीमन देश के लिए 'राजनीतिक नोटबंदी' साबित होगा। उन्होंने सरकार को चेतावनी दी कि नए भारत की ओर बढ़ते कदम देश को विभाजित करने का कारण नहीं बनने चाहिए।

कांग्रेस नेता ने सहकारी संघवाद के भविष्य पर चिंता जताते हुए कहा कि सरकार जिस जल्दबाजी में परिसीमन का प्रस्ताव लाई है, वह नोटबंदी की याद दिलाता है। उन्होंने कहा कि देश ने नोटबंदी का भारी नुकसान झेला है और अब परिसीमन भी उसी तरह की विनाशकारी नीति साबित होने जा रहा है, इसलिए सरकार को इसे लागू करने से बचना चाहिए।

परिसीमन के लिए व्यापक विचार-विमर्श की वकालत करते हुए थरूर ने इसमें तीन प्रमुख खामियों को उजागर किया। उन्होंने छोटे और बड़े राज्यों के बीच संतुलन बिगड़ने की बात कही। इसके साथ ही, जनसंख्या नियंत्रण के राष्ट्रीय लक्ष्यों को हासिल करने वाले तमिलनाडु और केरल जैसे दक्षिणी राज्यों की तुलना में उत्तरी राज्यों के बीच असंतुलन का मुद्दा उठाया, जहां आबादी पर काबू नहीं पाया जा सका है।

थरूर ने तर्क दिया कि इस प्रक्रिया के तहत उन राज्यों को राजनीतिक रूप से अधिक ताकत देकर पुरस्कृत किया जाएगा, जो अपनी आबादी को नियंत्रित करने में विफल रहे हैं। उन्होंने यह भी सवाल किया कि क्या हम देश को यही संदेश देना चाहते हैं। इसके अलावा, उन्होंने देश की अर्थव्यवस्था को गति देने वाले राज्यों और केंद्रीय धन प्राप्त करने वाले राज्यों के बीच के संतुलन पर भी सवाल खड़े किए।

लोकसभा में सदस्यों की संख्या 800 से अधिक होने पर सदन की कार्यक्षमता को लेकर थरूर ने अपनी गंभीर आशंका जताई। इस पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने स्पष्ट किया कि यदि वह आसन पर विराजमान रहेंगे, तो सभी को बोलने का पर्याप्त समय दिया जाएगा। हालांकि, थरूर ने फिर चिंता जताते हुए कहा कि 850 सदस्यों की उपस्थिति में सदन की स्थिति क्या होगी, यह कहना बहुत मुश्किल है।

कांग्रेस सांसद ने इस मुद्दे पर राज्य सरकारों, राजनीतिक दलों और नागरिक हितधारकों के साथ व्यापक विचार-विमर्श की मांग की। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि वह महिला आरक्षण और परिसीमन के मुद्दों को अलग-अलग करे। उन्होंने सुझाव दिया कि महिला आरक्षण बिल को आज ही पास कर दिया जाए, विपक्ष इसका समर्थन करेगा। थरूर ने कहा कि प्रधानमंत्री ने 'नारी शक्ति' की बात की है, इसलिए इसे मौजूदा सीटों की संख्या के आधार पर ही अगले आम चुनावों से लागू किया जाए ताकि प्रतिबद्धता सिर्फ बयानबाजी न लगे और परिसीमन को फिलहाल टाल दिया जाए।

इस बीच, डीएमके सांसद कनिमोझी करुणानिधि ने परिसीमन को महिला आरक्षण से जोड़ने को सरकार का एक 'जाल' करार दिया। उन्होंने कहा कि परिसीमन आयोग की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के एक न्यायाधीश करेंगे, जिनकी नियुक्ति सरकार ही करेगी।

कनिमोझी ने गृह मंत्री के उस बयान पर भी सवाल उठाया जिसमें सीटों में 50 प्रतिशत की वृद्धि की बात कही गई थी। उन्होंने पूछा कि अगर परिसीमन आयोग गृह मंत्री की बात नहीं मानता है, तो हम न्याय के लिए कहां जाएंगे।

गुरुवार को डीएमके सदस्यों द्वारा काले कपड़े पहनकर विरोध करने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे बुरी नजर से बचाने वाला 'काला टीका' कहकर तंज कसा था। इस पर पलटवार करते हुए कनिमोझी ने कहा कि काला रंग देवी काली का प्रतीक है और उनकी पार्टी इस मुद्दे पर अंत तक अपना विरोध जारी रखेगी।

समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने भी सरकार की नीयत पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा का वोट बैंक लगातार खिसक रहा है, जिसके कारण ये विधेयक लाए गए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का मुख्य उद्देश्य जातीय जनगणना के असल आंकड़ों से भागना है।

डिंपल ने सदन में सवाल उठाया कि क्या सरकार वाकई महिलाओं को सशक्त बनाना चाहती है, या फिर इन विधेयकों के जरिए खुद की ताकत बढ़ाने के लिए काम कर रही है।

तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सांसद शताब्दी रॉय ने भाजपा नीत सरकार पर चुनाव जीतने के लिए महिलाओं को ढाल की तरह इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। उन्होंने सदन और देश से भावुक अपील करते हुए कहा कि महिलाओं को देवी, दुर्गा और काली बनाना बंद किया जाए। महिलाओं को सिर्फ इंसान समझना ही उनके लिए काफी होगा।

DMK MP Kanimozhi Karunanidhi and Shashi Tharur.jpg
इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला: थारू जनजाति के वन अधिकारों के दावों को खारिज करने वाला आदेश रद्द
DMK MP Kanimozhi Karunanidhi and Shashi Tharur.jpg
यूपी सरकार का सख्त कदम: श्रम कानूनों के उल्लंघन में 203 ठेकेदारों के लाइसेंस होंगे रद्द, मजदूरों का वेतन 21% बढ़ा
DMK MP Kanimozhi Karunanidhi and Shashi Tharur.jpg
TCS नासिक यौन उत्पीड़न मामला: एफआईआर में जुड़ी SC/CT धाराएं, सीएम फडणवीस ने दिए सख्त जांच के आदेश

द मूकनायक की प्रीमियम और चुनिंदा खबरें अब द मूकनायक के न्यूज़ एप्प पर पढ़ें। Google Play Store से न्यूज़ एप्प इंस्टाल करने के लिए यहां क्लिक करें.

द मूकनायक की मदद करें

‘द मूकनायक’ जनवादी पत्रकारिता करता है. यह संविधान, लोकतंत्र और सामाजिक न्याय पर चलने वाला मीडिया समूह है. अगर आप भी चाहते हैं कि ‘द मूकनायक’ हमेशा हाशिए पर खड़े लोगों की आवाज़ बुलंद करता रहे, बेजुबानों की पीड़ा दिखाते रहे तो सपोर्ट करें.

यहां सपोर्ट करें
The Mooknayak - आवाज़ आपकी
www.themooknayak.com