
नई दिल्ली: पंजाब के संगरूर में 47 वर्षीय एक दलित व्यक्ति की कथित आत्महत्या का मामला अब पूरी तरह से गर्मा गया है। पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा ने शुक्रवार को आम आदमी पार्टी (AAP) की सरकार पर इस पीड़ित परिवार को गुमराह करने का बेहद गंभीर आरोप लगाया है।
मृतक ने सोमवार रात को कथित तौर पर जहर खाकर अपनी जान दे दी थी। पीड़ित परिवार का दावा है कि रविवार को एक कार्यक्रम के दौरान इस व्यक्ति ने पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा से इलाके में नशीले पदार्थों की सप्लाई को लेकर सवाल पूछा था। आरोप है कि इसी बात से नाराज होकर उसे प्रताड़ित किया गया और खुलेआम जातिसूचक गालियां दी गईं।
शुक्रवार को संगरूर पहुंचकर शोक संतप्त परिवार से मुलाकात के बाद राजा ने राज्य सरकार पर बड़ा हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि प्रशासन ने परिवार को पक्की नौकरी का नियुक्ति पत्र देने के बजाय, स्थानीय डिप्टी कमिश्नर का केवल एक 'सिफारिशी पत्र' थमा दिया।
राजा के अनुसार, मंगलवार को हुए अंतिम संस्कार से ठीक पहले परिवार को यह झूठा विश्वास दिलाया गया था कि यह सरकारी नौकरी का पक्का प्रस्ताव है। कांग्रेस नेता ने इस पूरी घटना को पीड़ित परिवार के साथ हुई 'धोखाधड़ी और फरेब' करार दिया है।
उन्होंने साफ तौर पर कहा कि चीमा के सहयोगियों द्वारा किए गए अपमान और डराने-धमकाने के कारण ही उस व्यक्ति को आत्महत्या जैसा खौफनाक कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ा। अपनी मांग को दोहराते हुए राजा ने कहा कि हरपाल सिंह चीमा को तुरंत वित्त मंत्रालय से बर्खास्त किया जाना चाहिए। इसके साथ ही, आत्महत्या के लिए उकसाने का आपराधिक मामला दर्ज कर उनकी तत्काल गिरफ्तारी होनी चाहिए।
मीडिया से बातचीत के दौरान विपक्ष पर इस मुद्दे के राजनीतिकरण के आरोपों को राजा ने सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि मृतक ने अपने मृत्यु पूर्व बयान (डाइंग डिक्लेरेशन) में सीधे तौर पर मंत्री का नाम लिया था, इसलिए पीड़ित परिवार को न्याय दिलाना कांग्रेस की नैतिक जिम्मेदारी है।
राजा ने कहा कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से लेकर पार्टी के आम जमीनी कार्यकर्ता तक, पूरी कांग्रेस इस न्याय की लड़ाई में परिवार के साथ मजबूती से खड़ी है। इसी कड़ी में चीमा के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और उनकी गिरफ्तारी की मांग को लेकर कांग्रेस ने शुक्रवार को पूरे राज्य में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किए।
इन प्रदर्शनों के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पंजाब के पुलिस महानिदेशक (DGP) के नाम ज्ञापन भी सौंपे। कांग्रेस ने प्रशासन पर यह भी आरोप लगाया है कि सरकार ने दबाव बनाकर, परिवार की इच्छा के खिलाफ जबरन मृतक का अंतिम संस्कार करवाया था।
इस मामले में एक और नया मोड़ तब आया जब शुक्रवार को मोहनजीत सिंह ने भी पीड़ित परिवार से मुलाकात की। गौरतलब है कि 2 सितंबर को मुख्यमंत्री भगवंत मान के संगरूर कार्यक्रम के दौरान काले झंडे दिखाने पर मोहनजीत सिंह को कथित तौर पर पुलिस हिरासत में प्रताड़ना का शिकार होना पड़ा था। परिवार से मुलाकात के बाद उन्होंने ऐलान किया है कि इस पूरे अन्याय के खिलाफ 13 सितंबर को संगरूर में मुख्यमंत्री आवास के बाहर एक विशाल विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।
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