MP: सीहोर में क्लोरीन गैस रिसाव से हड़कंप! पानी फिल्टर प्लांट में दूसरी बार हादसा, 10 मरीज अस्पताल पहुंचे

काहिरी बांध के पास लसूड़िया खास में गुरुवार-शुक्रवार की रात हुआ गैस रिसाव, ग्रामीणों ने आंखों में जलन, घुटन और सांस लेने में परेशानी की शिकायत की; आसपास के पेड़-पौधों के झुलसने का भी दावा
MP: सीहोर में क्लोरीन गैस रिसाव से हड़कंप! पानी फिल्टर प्लांट में दूसरी बार हादसा, 10 मरीज अस्पताल पहुंचे
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भोपाल। मध्यप्रदेश के सीहोर जिले में काहिरी बांध के पास स्थित पानी फिल्टर प्लांट में क्लोरीन गैस के रिसाव से देर रात हड़कंप मच गया। घटना लसूड़िया खास गांव के पास गुरुवार-शुक्रवार की रात सामने आई। बताया जा रहा है कि प्लांट में रखे क्लोरीन टैंक में लीकेज होने के बाद गैस आसपास के क्षेत्र में फैल गई। गैस के प्रभाव में आने से ग्रामीणों और राहगीरों को आंखों में तेज जलन, घुटन, सांस लेने में परेशानी तथा उल्टी-दस्त जैसी शिकायतें हुईं। घटना के बाद प्रभावित लोगों को तत्काल सीहोर जिला अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका उपचार किया गया।

गैस के प्रभाव से ग्रामीण परेशान, कई लोगों की तबीयत बिगड़ी

क्लोरीन गैस के रिसाव के बाद आसपास के क्षेत्र में कुछ समय के लिए अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। गैस के संपर्क में आने वाले लोगों ने आंखों में तेज जलन और सांस लेने में परेशानी की शिकायत की। कुछ लोगों को उल्टी-दस्त की समस्या भी हुई। जिला अस्पताल में देर रात प्रभावित मरीजों के पहुंचने के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने उनका परीक्षण कर उपचार शुरू किया।

जिला अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. हरिओम गुप्ता के मुताबिक, लसूड़िया खास क्षेत्र से करीब 10 मरीज उपचार के लिए आपातकालीन कक्ष में पहुंचे थे। इनमें प्रेमजी, अनमोल, रामसभा, केसर सिंह और प्रेम सिंह को देर रात अस्पताल में भर्ती किया गया। कुछ मरीजों को प्राथमिक उपचार देने के बाद उनकी स्थिति सामान्य होने पर छुट्टी दे दी गई। वहीं भर्ती मरीजों में से एक की हालत अपेक्षाकृत अधिक गंभीर बताई गई है। अस्पताल में चिकित्सकों की निगरानी में मरीजों का उपचार जारी रहा।

सीएमओ बोले- तीनों क्लोरीन सिलेंडर प्लांट से हटाए गए

घटना के बाद प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए तकनीकी विशेषज्ञों की मदद ली। नगर पालिका सीहोर के सीएमओ सुधीर सिंह के अनुसार, मामले की जानकारी मिलने के बाद ग्रासिम कंपनी नागदा की टेक्निकल टीम को मौके पर बुलाया गया। टीम ने वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट में रखे तीनों क्लोरीन सिलेंडरों को सावधानीपूर्वक हटाया।

सीएमओ के मुताबिक, तीनों सिलेंडरों को तकनीकी टीम की निगरानी में ट्रक में रखकर प्लांट से बाहर ले जाया गया, ताकि दोबारा गैस रिसाव की आशंका को कम किया जा सके। प्रशासन का कहना है कि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है और प्लांट में लीकेज नहीं है।

ग्रामीणों का दावा- प्लांट के आसपास अब भी गैस का असर

हालांकि प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की ओर से स्थिति नियंत्रण में होने की बात कही जा रही है, लेकिन स्थानीय ग्रामीणों और प्रत्यक्षदर्शियों की चिंता अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि प्लांट के आसपास गैस का प्रभाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।

ग्रामीणों ने दावा किया कि गैस के प्रभाव से आसपास लगे पेड़-पौधों पर भी असर दिखाई दे रहा है और कई पेड़-पौधे झुलसे हुए नजर आ रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि गैस का रिसाव पूरी तरह बंद हो चुका है तो क्षेत्र में इसके प्रभाव की वैज्ञानिक तरीके से जांच की जानी चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि आसपास का वातावरण पूरी तरह सुरक्षित है या नहीं।

तीन दिन में दूसरी बार क्लोरीन गैस रिसाव

इस पूरी घटना ने इसलिए भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं क्योंकि काहिरी डैम के पास स्थित इसी ट्रीटमेंट प्लांट में कुछ ही दिनों के भीतर क्लोरीन गैस रिसाव की यह दूसरी घटना बताई जा रही है। करीब दो दिन पहले भी रात के समय गैस रिसाव हुआ था। उस घटना के बाद कई लोगों की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें जिला अस्पताल पहुंचाया गया था।

पहली घटना की जानकारी मिलने के बाद एसडीईआरएफ, स्वास्थ्य विभाग और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची थी। बताया गया कि रिसाव को नियंत्रित करने के लिए विशेषज्ञों की आवश्यकता पड़ी और विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं होने पर गेल कंपनी की टीम को बुलाना पड़ा था। इसके बाद रिसाव को नियंत्रित किया गया था। लेकिन अब दोबारा गैस रिसाव की घटना सामने आने से प्लांट की सुरक्षा व्यवस्था, रखरखाव और तकनीकी निरीक्षण को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।

पहली घटना के बाद क्या कदम उठाए गए

सबसे बड़ा सवाल यह है कि पहली गैस रिसाव की घटना के बाद प्लांट में ऐसी घटना दोबारा न हो, इसके लिए क्या स्थायी कदम उठाए गए थे। यदि पहली घटना के बाद तकनीकी जांच की गई थी तो उसके आधार पर क्या कमियां सामने आईं और उन्हें दूर करने के लिए क्या कार्रवाई की गई, यह भी स्पष्ट होना जरूरी है।

लगातार दो घटनाओं ने यह सवाल भी खड़ा किया है कि क्लोरीन जैसे खतरनाक रसायन के भंडारण और इस्तेमाल के दौरान निर्धारित सुरक्षा मानकों का कितना पालन किया जा रहा है। प्लांट में गैस लीकेज की स्थिति से निपटने के लिए प्रशिक्षित कर्मचारी, आपातकालीन उपकरण, सुरक्षा प्रोटोकॉल और पर्याप्त चिकित्सा सहायता उपलब्ध है या नहीं, इसकी भी जांच की जरूरत है।

क्लोरीन गैस के इस्तेमाल वाले प्लांट में सुरक्षा व्यवस्था क्यों जरूरी?

वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट में पानी को कीटाणुरहित करने के लिए क्लोरीन का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन क्लोरीन गैस का रिसाव होने पर आसपास मौजूद लोगों के लिए गंभीर परेशानी पैदा हो सकती है। गैस के संपर्क में आने पर आंखों, नाक और गले में जलन, खांसी तथा सांस लेने में परेशानी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। अधिक संपर्क की स्थिति में स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है।

ऐसे में क्लोरीन सिलेंडरों का सुरक्षित भंडारण, नियमित तकनीकी जांच, लीकेज डिटेक्शन सिस्टम और आपात स्थिति से निपटने की स्पष्ट व्यवस्था बेहद महत्वपूर्ण है। खासकर ऐसे प्लांट जो आबादी या ग्रामीण बस्तियों के नजदीक स्थित हैं, वहां सुरक्षा व्यवस्था में किसी भी तरह की लापरवाही बड़ा खतरा बन सकती है।

ग्रामीणों ने की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग

लगातार गैस रिसाव की घटनाओं के बाद लसूड़िया खास और आसपास के ग्रामीणों में चिंता का माहौल है। ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि केवल रिसाव रोक देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह पता लगाया जाना चाहिए कि गैस रिसाव की वास्तविक वजह क्या थी और पहली घटना के बाद उसे रोकने के लिए प्रभावी कदम क्यों नहीं उठाए गए।

ग्रामीणों ने प्लांट की तकनीकी और सुरक्षा व्यवस्था का विस्तृत निरीक्षण कराने, क्लोरीन सिलेंडरों के रखरखाव और संचालन की जांच करने तथा यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई करने की मांग की है।

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