
नई दिल्ली: एबीपी न्यूज़ के शो 'महादंगल' में 3 नवंबर को दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर संगीत कुमार रागी और समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता मनोज काका के बीच हुई तीखी बहस ने एक बड़े राजनीतिक और सामाजिक विवाद का रूप ले लिया है। एंकर चित्रा त्रिपाठी के इस शो में बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री के बयानों पर चर्चा चल रही थी, जो देखते ही देखते व्यक्तिगत और जातिगत गालियों में तब्दील हो गई।
विवाद की शुरुआत धीरेंद्र शास्त्री की राम-कृष्ण को लेकर की गई एक टिप्पणी से हुई, जिसका सपा प्रवक्ता मनोज काका ने कड़ा विरोध किया। दूसरी ओर, प्रोफेसर रागी ने शास्त्री का बचाव करते हुए कहा कि उन्होंने कुछ भी गलत नहीं कहा है। बहस के दौरान मनोज काका ने रागी पर निशाना साधते हुए उन्हें 'सरकार संरक्षित बड़े दर्जे का गदहा' और 'बेहूदा' कह दिया। इसके जवाब में अपना आपा खोते हुए रागी ने लाइव नेशनल टीवी पर बेहद आपत्तिजनक और जातिसूचक भाषा का इस्तेमाल किया।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो को पोस्ट करते हुए RJD प्रवक्ता प्रियंका भारती ने लिखा, "संगीत रागी जैसे लम्पट ने आज पूरी यादव जाति को गलियाँ दी। इस लम्पट को जब मैंने स्टूडियो में काँपने पर मजबूर कर दिया था, तब कुछ स्वघोषित लिबरल मेरे शब्दों को अमर्यादित बोलते थे। ऐसे लंपटों का यार हर जगह मौजूद है। वो आपको भाषा पर टोकेंगे, मगर इसके साथ दोस्ती - यारी निभायेंगे!"
जाहिर है इस अमर्यादित टिप्पणी के तुरंत बाद बवाल मच गया। यादव समाज और विपक्षी नेताओं ने रागी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया।
कांग्रेस प्रवक्ता रागिनी नायक ने रागी को 'बदज़ुबान संघी' करार देते हुए कहा कि इस टिप्पणी ने उनके घटियापन को उजागर कर दिया है।
जबकि पत्रकार मीना कोटवाल ने रागी पर मुकदमा दर्ज करने और उन्हें दिल्ली विश्वविद्यालय से निष्कासित करने की मांग की।
सपा प्रवक्ता मनोज काका ने इस घटना को रागी के 'जातीय घमंड' का नतीजा बताया। वहीं, कुछ लोगों ने एंकर चित्रा त्रिपाठी की भी आलोचना की कि उन्होंने इस अभद्र भाषा को रोकने के लिए पर्याप्त हस्तक्षेप नहीं किया।
आपको बता दें कि, प्रोफेसर संगीत रागी दिल्ली विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष रह चुके हैं और टीवी डिबेट्स में अक्सर भाजपा व आरएसएस की विचारधारा का पक्ष रखते नजर आते हैं। वह 'आरएसएस एंड गांधी' जैसी पुस्तकों के लेखक भी हैं। एक वरिष्ठ शिक्षाविद द्वारा ऐसी सड़क छाप भाषा के प्रयोग ने टीवी डिबेट्स के लगातार गिरते स्तर पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
विवाद को तूल पकड़ता देख प्रोफेसर रागी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक स्पष्टीकरण और माफीनामा पोस्ट किया। उन्होंने लिखा कि मनोज काका द्वारा बार-बार 'गधा' और 'बेहूदा' कहकर गाली देने पर उन्होंने प्रतिक्रिया दी थी। रागी ने सफाई दी कि उनके बयान में 'अहीर' शब्द का प्रयोग केवल 'सहचर' के रूप में हुआ था और उनका इरादा पूरे समुदाय को निशाना बनाना नहीं था। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह गालीबाज़ों के लिए था, लेकिन अगर इससे किसी की भावनाएं आहत हुई हैं तो वह इसके लिए माफी मांगते हैं।
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