
चंडीगढ़ स्थित कांग्रेस भवन में दो दिग्गज नेताओं के बीच हुए विवाद ने अब गंभीर रूप ले लिया है। करीब एक सप्ताह पहले पंजाब युवा कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष बरिंदर ढिल्लों और पंजाब कांग्रेस कमेटी (पीसीसी) के पूर्व सचिव व दलित नेता रणजीत सिंह तरखान माजरा के बीच तीखी बहस हुई थी। इस मामले में सख्त कदम उठाते हुए पार्टी ने बरिंदर ढिल्लों को कारण बताओ नोटिस थमा दिया है।
अनुशासनात्मक कार्रवाई समिति के अध्यक्ष अवतार हेनरी ने रविवार को यह नोटिस जारी किया। उन्होंने ढिल्लों को तीन दिन के भीतर अपना स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया है। हेनरी ने नोटिस में स्पष्ट किया है कि पीसीसी को उनके खिलाफ एक लिखित शिकायत मिली है, जिसमें तरखान माजरा के साथ अनुचित व्यवहार करने और आपत्तिजनक व अपमानजनक टिप्पणियां करने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। संतोषजनक जवाब न मिलने की स्थिति में उनके खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।
दूसरी तरफ, बरिंदर ढिल्लों ने नोटिस मिलने की पुष्टि की है। हालांकि, उन्होंने हाथापाई के उन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया जो राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बने हुए हैं। ढिल्लों का कहना है कि यह केवल एक मौखिक बहस थी और उन्हें पूरी उम्मीद है कि वह इस मुद्दे को जल्द ही सुलझा लेंगे।
दिलचस्प बात यह है कि दोनों नेताओं के बीच कोई सीधा राजनीतिक या चुनावी टकराव नहीं है। ढिल्लों रोपड़ से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं, जबकि तरखान माजरा बस्सी पठाना से टिकट की मांग कर रहे हैं। इसके बावजूद, दोनों नेता पार्टी के भीतर दो अलग-अलग प्रतिद्वंद्वी गुटों का प्रतिनिधित्व करते हैं। यह विवाद तब और गहरा गया जब आरोप लगे कि ढिल्लों के समर्थकों ने कांग्रेस भवन के डीवीआर से घटना के वीडियो का एक खास हिस्सा डिलीट करवा दिया, जिससे तरखान माजरा की नाराजगी और बढ़ गई।
तरखान माजरा ने ढिल्लों के खिलाफ अपनी नाराजगी को सार्वजनिक रूप से जाहिर करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। पीसीसी अध्यक्ष परगट सिंह को औपचारिक शिकायत सौंपने से पहले उन्होंने फेसबुक पर अपना दर्द बयां किया। उन्होंने लिखा कि वह दशकों से कांग्रेस के वफादार सिपाही रहे हैं, लेकिन चंडीगढ़ कांग्रेस भवन में ढिल्लों द्वारा की गई मारपीट और जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल ने उन्हें अंदर तक झकझोर कर रख दिया है।
माजरा ने अपनी पोस्ट में इस बात पर भी जोर दिया कि आज जब 140 साल पुरानी कांग्रेस पार्टी का नेतृत्व दलित समुदाय से आने वाले मल्लिकार्जुन खड़गे कर रहे हैं, तो ऐसी घटना का होना बेहद दुखद है। उन्होंने परगट सिंह से न्याय की गुहार लगाते हुए स्पष्ट किया कि उनके साथ जो हुआ, वह किसी अन्य कार्यकर्ता के साथ नहीं होना चाहिए। माजरा ने इसे अपने आत्मसम्मान और पूरे दलित समुदाय के सम्मान की लड़ाई बताया है।
यह पूरा राजनीतिक विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब राहुल गांधी संगरूर में एक बड़ी रैली करने जा रहे हैं। रविवार को जारी हुआ यह नोटिस मंगलवार को सार्वजनिक हुआ, ठीक रैली से एक दिन पहले। राजनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज है कि आम आदमी पार्टी (आप) कांग्रेस के भीतर पनपे इस दलित विरोधी माहौल का सीधा फायदा उठाने की फिराक में है और रैली के दौरान इस मुद्दे को जोर-शोर से उछाल सकती है।
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