
नई दिल्ली: पंजाब कांग्रेस में लंबे समय से चली आ रही आंतरिक गुटबाजी अब खत्म होती नजर आ रही है। संगरूर के एक दलित व्यक्ति की कथित आत्महत्या के मुद्दे पर आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार को घेरने के लिए पार्टी के सभी विरोधी गुट 15 सितंबर को चंडीगढ़ में एक साथ मंच साझा करेंगे। यह विरोध प्रदर्शन प्रदेश कांग्रेस के लिए एकजुटता का एक बड़ा संदेश होने वाला है।
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के नवनियुक्त पंजाब प्रभारी सचिन पायलट इस अहम विरोध मार्च का नेतृत्व करेंगे। उनके नेतृत्व में होने वाले इस प्रदर्शन में पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा जैसे दिग्गज नेताओं ने भी शामिल होने का सार्वजनिक ऐलान कर दिया है। इसे 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी के सभी धड़ों को साथ लाने की पायलट की कोशिशों के पहले बड़े इम्तिहान के तौर पर देखा जा रहा है।
सचिन पायलट की अगुवाई में यह विशाल मार्च राज्य के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा के आधिकारिक आवास की ओर कूच करेगा। कांग्रेस की मांग है कि चीमा को तुरंत उनके पद से बर्खास्त किया जाए और दलित युवक की मौत के मामले की स्वतंत्र तथा समयबद्ध जांच हो। बता दें कि उस युवक ने चीमा से नशे की समस्या को लेकर सवाल किया था, जिसके बाद कथित तौर पर जहर खाने से उसकी मौत हो गई थी।
चरणजीत सिंह चन्नी और सुखजिंदर सिंह रंधावा दोनों ने सचिन पायलट को आश्वस्त किया है कि वे अपने समर्थकों के साथ इस मार्च में पूरी ताकत से हिस्सा लेंगे। चन्नी ने पंजाब कांग्रेस के कार्यकर्ताओं से अपील की है कि वे इस प्रदर्शन में भारी संख्या में पहुंचें। उन्होंने चीमा की तत्काल गिरफ्तारी और उन्हें कैबिनेट से बाहर करने की पुरजोर मांग उठाई है।
रंधावा ने पुष्टि करते हुए कहा कि पंजाब कांग्रेस प्रभारी सचिन पायलट ने उनसे बात की है और वे हर हाल में इस विशाल प्रदर्शन का हिस्सा बनेंगे। उन्होंने राज्य सरकार पर दोहरा मापदंड अपनाने का आरोप भी लगाया। इस साल मार्च में पंजाब स्टेट वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन के एक अधिकारी की आत्महत्या का जिक्र करते हुए रंधावा ने कहा कि तब आप सरकार ने तत्कालीन मंत्री लालजीत सिंह भुल्लर को निशाना बनाया था, लेकिन अब चीमा पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।
इस प्रदर्शन की अहमियत इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि हाल के महीनों में चन्नी और पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के गुट पूरी तरह से अलग-अलग रास्तों पर चलते दिखे हैं। 15 अगस्त को ईसरू सम्मेलन के दौरान यह विभाजन साफ नजर आया था, जहां चन्नी और रंधावा एक साथ थे, जबकि वड़िंग वहां नदारद रहे। इसी दौरान रंधावा ने वड़िंग के 'एक परिवार, एक टिकट' के फॉर्मूले को भी खुलेआम चुनौती दी थी।
पार्टी के भीतर यह दरार 28 अगस्त को बाबा बकाला में हुए रखड़ पुन्निया सम्मेलन में भी साफ दिखाई दी थी। उस कार्यक्रम में भी वड़िंग और उनके समर्थकों ने दूरी बनाए रखी थी और पूरे आयोजन की कमान चन्नी गुट के हाथों में थी।
भूपेश बघेल की जगह लेने वाले सचिन पायलट ने स्पष्ट कर दिया है कि 2027 के चुनावों से पहले पार्टी किसी को भी मुख्यमंत्री के चेहरे के तौर पर पेश नहीं करेगी। उन्होंने जोर देकर कहा है कि पार्टी में सभी नेताओं की अहम भूमिका होगी। वहीं, राजा वड़िंग ने भी साफ किया है कि कांग्रेस दलित व्यक्ति की मौत और जनता के दमन के खिलाफ 15 सितंबर को सरकार को चुनौती देने और एक जोरदार आंदोलन करने के लिए पूरी तरह से तैयार है।
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