उत्तर प्रदेश: इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच द्वारा चार सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस (MBBS) दाखिले के लिए करीब 91 प्रतिशत आरक्षण लागू करने पर रोक लगाए जाने के बाद बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की अध्यक्ष मायावती ने अपना कड़ा रुख स्पष्ट किया है। उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार से अपील की है कि वह इस मामले में बिना कोई देरी किए तुरंत सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाए और वहां से आवश्यक राहत की मांग करे।
बसपा सुप्रीमो का मानना है कि राज्य सरकार ने अदालत में अपना पक्ष मजबूती से नहीं रखा। मायावती ने स्पष्ट किया कि यदि यूपी सरकार ने कोर्ट को यह ठीक से समझाया होता कि इन चार मेडिकल कॉलेजों में अनुसूचित जाति (एससी) समुदाय के लिए अतिरिक्त आरक्षण का प्रावधान, सामान्य 50 प्रतिशत आरक्षण की सीमा से बिल्कुल अलग है, तो न्यायालय का रुख इसके प्रति सकारात्मक हो सकता था। उनका दावा है कि सरकार की तरफ से ठोस दलीलों के अभाव में ही कोर्ट ने इस व्यवस्था पर रोक लगाई है।
आरक्षण के इस विशेष प्रावधान की पृष्ठभूमि समझाते हुए मायावती ने इन संस्थानों के निर्माण का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि सहारनपुर, अंबेडकर नगर, कन्नौज और जालौन में स्थापित किए गए ये चारों मेडिकल कॉलेज कोई सामान्य प्रोजेक्ट नहीं थे। इनका निर्माण विशेष रूप से अनुसूचित जाति समुदाय के कल्याण और विकास के लिए निर्धारित 'स्पेशल कंपोनेंट प्लान' के फंड से किया गया था।
यही कारण है कि इन संस्थानों में नीट-यूजी (NEET-UG) प्रवेश के लिए विशेष कोटा रखा गया था, जिसकी बहाली के लिए अब शीर्ष अदालत में प्रभावी पैरवी की सख्त जरूरत है।
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