
उत्तर प्रदेश: बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने देश में राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' को लेकर हो रही राजनीति को पूरी तरह से गैर-जरूरी करार दिया है। शुक्रवार को उन्होंने स्पष्ट किया कि इस वक्त देश के सामने 'जेन जेड' (Gen Z) और 'जेन अल्फा' (Gen Alpha) की समस्याएं अधिक गंभीर हैं, जिनका समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाना चाहिए।
बसपा प्रमुख ने बेरोजगारी और पेपर लीक के मुद्दे पर युवाओं के विरोध प्रदर्शनों का खुलकर समर्थन किया। उन्होंने दिल्ली के जंतर-मंतर और झारखंड के रांची में 'जेन जेड' द्वारा किए जा रहे आंदोलनों के साथ-साथ उत्तर प्रदेश में स्कूलों की खस्ताहाल स्थिति को लेकर 'जेन अल्फा' की चिंताओं को भी जायज ठहराया।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (X) पर अपनी बात रखते हुए, पूर्व मुख्यमंत्री ने केंद्र और राज्य सरकारों से इन ज्वलंत मुद्दों पर उचित कदम उठाने की मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में केंद्र, सभी राज्य सरकारों और सभी राजनीतिक दलों को अपना ध्यान देश और जनहित के कार्यों पर केंद्रित करना चाहिए, विशेषकर बेरोजगार युवाओं, 'जेन-जेड' के छात्रों और 'जेन-अल्फा' वर्ग के स्कूली बच्चों की दिक्कतों पर।
मायावती ने इस बात पर भी जोर दिया कि देश के कई हिस्से इस समय भीषण बाढ़ की तबाही का सामना कर रहे हैं। ऐसे में बाढ़ पीड़ितों की मदद और अन्य महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मुद्दों पर तत्काल ध्यान देने की सख्त जरूरत है।
राष्ट्रगीत के विवाद पर अपनी पार्टी का रुख साफ करते हुए उन्होंने कहा कि वंदे मातरम का पूरा संस्करण गाया जाए, केवल शुरुआती दो छंद गाए जाएं, या इसे बिल्कुल न गाया जाए- इस तरह की राजनीति थी नहीं है।
हाल ही में संसद में राष्ट्रगीत गाने के तरीके को लेकर पारित हुए कानून पर प्रतिक्रिया देते हुए मायावती ने कहा कि ऐसा कोई पहली बार नहीं हुआ है। उन्होंने राजनीतिक दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि जब भी केंद्र या राज्यों में सत्ता परिवर्तन होता है, तो पार्टियां अपने सियासी फायदे के लिए एक-दूसरे के बनाए कानूनों में बदलाव करती रहती हैं, जिसका मुख्य उद्देश्य जनता का ध्यान अपनी कमियों से भटकाना होता है।
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