
उत्तर प्रदेश: यूपी की राजनीति में एक बार फिर से हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस पार्टी ने शुक्रवार को एक बड़े राज्यव्यापी अभियान का ऐलान किया है। इस महाअभियान का मुख्य उद्देश्य जातीय जनगणना फॉर्म में ओबीसी वर्ग के लिए एक अलग कॉलम शामिल करने की पुरजोर मांग करना है। इसके साथ ही, पार्टी यह भी चाहती है कि विभिन्न समुदायों की गिनती केंद्र और राज्य की वर्तमान ओबीसी सूचियों के आधार पर ही की जाए।
यह अहम घोषणा लखनऊ स्थित यूपी कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित पार्टी के ओबीसी विभाग की एक विशेष बैठक के दौरान की गई। इस महत्वपूर्ण रणनीतिक बैठक में प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम, राष्ट्रीय ओबीसी विभाग के अध्यक्ष अनिल जयहिंद और प्रदेश अध्यक्ष मनोज यादव मुख्य रूप से मौजूद रहे।
बैठक के दौरान कांग्रेस नेताओं ने सत्तारूढ़ बीजेपी सरकार पर तीखा राजनीतिक हमला बोला। पार्टी ने सीधा आरोप लगाया है कि जातीय जनगणना में अलग कॉलम शामिल न करके सरकार जानबूझकर ओबीसी समुदायों को उनके वाजिब हक और अधिकारों से वंचित करने का प्रयास कर रही है।
राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल जयहिंद ने अपनी रणनीति स्पष्ट करते हुए कहा कि कांग्रेस ओबीसी समुदायों की सटीक गिनती के लिए सरकार पर हर स्तर से दबाव बनाएगी। उनका कहना है कि इस सटीक और प्रामाणिक डेटा का इस्तेमाल नौकरियों, आरक्षण और सरकारी संसाधनों में पिछड़े वर्ग की ज्यादा से ज्यादा हिस्सेदारी सुनिश्चित करने के लिए किया जाएगा।
इस मांग को गांव-गांव तक पहुंचाने के लिए ओबीसी विभाग पूरे प्रदेश में व्यापक स्तर पर विरोध प्रदर्शन, सम्मेलन, पदयात्राएं और परिचर्चाएं आयोजित करेगा। इस बड़े मैदानी अभियान का विधिवत आगाज 22 अगस्त को कानपुर और 23 अगस्त को जालौन में होने वाले विशाल सम्मेलनों के साथ होगा। इन दोनों आयोजनों का मुख्य विषय जातीय जनगणना और 'भागीदारी न्याय' रखा गया है।
प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की संगठनात्मक और चुनावी रणनीति के केंद्र में हमेशा सामाजिक न्याय का मुद्दा ही सर्वोपरि रहेगा। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि पार्टी की वर्तमान में चल रही संगठनात्मक विस्तार की प्रक्रिया में समाज के हर एक वर्ग को उचित और सम्मानजनक प्रतिनिधित्व दिया जाएगा।
इसी कड़ी में प्रदेश अध्यक्ष मनोज यादव ने अभियान को धार देने के लिए एक विस्तृत पांच सूत्रीय कार्यक्रम की रूपरेखा पेश की। इस सघन कार्यक्रम के तहत जिला मुख्यालयों पर बड़े प्रदर्शन कर ज्ञापन सौंपना, जिला-स्तरीय सम्मेलनों का आयोजन, लंबी पदयात्राएं, ब्लॉक-स्तर पर गहन चर्चाएं और एक विशाल हस्ताक्षर अभियान जैसी गतिविधियां चलाई जाएंगी।
अपनी इस पूरी कवायद को ठोस आधार देने के लिए कांग्रेस ने दक्षिण भारत का भी रुख किया है। पार्टी ने ओबीसी समुदायों के कल्याण के लिए सटीक नीतियां बनाने हेतु जरूरी डेटा जुटाने के मामले में तेलंगाना के जातीय सर्वेक्षण को एक बेहतरीन और सफल मॉडल के रूप में पेश किया है।
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