'EVM की गड़बड़ियों से गरीबों का चुनाव से उठ रहा भरोसा': मायावती ने आजाद की जीत पर भी उठाए सवाल

मायावती का चंद्रशेखर आजाद पर बड़ा हमला, नगीना में उनकी जीत को बताया भाजपा की साजिश और ईवीएम में छेड़छाड़ का नतीजा।
बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती
बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती
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लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने देश में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की मांग की है। सोमवार को उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) में हो रही 'गड़बड़ियों' के कारण गरीब और हाशिए पर रहने वाले लोगों का मतदान से धीरे-धीरे विश्वास कम हो रहा है।

उन्होंने कहा कि बसपा ने चुनाव में ईवीएम के इस्तेमाल का हमेशा विरोध किया है। यह पार्टी गरीबों, दलितों और समाज के अन्य हाशिए के वर्गों के हित में बनाई गई थी। ये लोग बसपा के उम्मीदवारों को वोट देते हैं, लेकिन ईवीएम में गड़बड़ी के कारण उनका वोट किसी और को चला जाता है। इसके परिणामस्वरूप, इन लोगों की मतदान में रुचि खत्म हो रही है।

आजाद समाज पार्टी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद का जिक्र करते हुए मायावती ने कहा कि 2024 के लोकसभा चुनाव में नगीना से उनकी जीत इस बात का उदाहरण है कि बसपा के मतदाता वोट डालने नहीं गए क्योंकि उन्हें पता था कि उनके वोटों में धांधली की जा रही है।

उन्होंने आरोप लगाया कि नगीना लोकसभा सीट पर चंद्रशेखर का कोई जनाधार नहीं है। फिर भी, भाजपा ने बसपा को नुकसान पहुंचाने की साजिश के तहत ईवीएम में छेड़छाड़ कर उनकी जीत सुनिश्चित की। वहां के लोगों का यही मानना है।

मायावती ने कहा कि भाजपा के निर्देश पर चंद्रशेखर उन जगहों पर जाते हैं जहां दलितों के खिलाफ अत्याचार होते हैं। वह धरने पर बैठते हैं और युवाओं को उकसाते हैं, जिससे लोग कानून की विभिन्न धाराओं के तहत कई मामलों में फंस जाते हैं।

उन्होंने दलितों को चंद्रशेखर आजाद से गुमराह न होने की चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि लोगों को यह समझना चाहिए कि जब तक उनके खिलाफ मामले लंबित रहेंगे, उन्हें कोई सरकारी नौकरी नहीं मिलेगी। इससे वे पिछड़े ही रहेंगे।

बसपा प्रमुख ने कहा कि उनकी पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट में चुनाव में ईवीएम के इस्तेमाल को चुनौती दी थी, लेकिन अदालत ने ईवीएम के साथ वीवीपैट (VVPAT) के इस्तेमाल का निर्देश दिया।

उन्होंने दावा किया कि वीवीपैट उपयोगी साबित नहीं हुए हैं क्योंकि गिनती में सभी पर्चियों का उपयोग नहीं किया जाता है। अब यह स्पष्ट हो गया है कि किसी भी इलेक्ट्रॉनिक मशीन को रिमोट कंट्रोल सिस्टम से दूर से ही हैक किया जा सकता है। ऐसे में मतदाताओं को यह विश्वास नहीं दिलाया जा सकता कि उनका वोट उसी उम्मीदवार को गया है जिसे उन्होंने वोट दिया था।

मायावती ने याद दिलाया कि पांच दशकों तक चुनाव कराने के लिए मतपत्रों का उपयोग किया जाता था, लेकिन बाद में चुनाव आयोग ने ईवीएम का उपयोग शुरू कर दिया।

उन्होंने कहा कि भाजपा ईवीएम के उपयोग का विरोध करने वाली पहली पार्टी थी। उनका तर्क था कि ईवीएम एक मशीन है और इसे हैक किया जा सकता है। भाजपा ने इस विषय पर एक किताब भी लिखी थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि कांग्रेस ईवीएम का दुरुपयोग करके चुनाव जीतती थी। यही कारण है कि दुनिया के कई देश अभी भी मतपत्रों का उपयोग कर रहे हैं।

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