
तेलंगाना में दलित कल्याण के मुद्दे पर सियासत गरमा गई है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के अनुसूचित जाति (एससी) मोर्चा ने कांग्रेस सरकार की नीतियों को दलित विरोधी करार देते हुए मंगलवार को सभी जिलों में एससी कॉर्पोरेशन के दफ्तरों का घेराव करने की चेतावनी दी है। संगठन का सीधा आरोप है कि राज्य सरकार अपने चुनावी वादों को पूरा करने में पूरी तरह से विफल रही है। इसके साथ ही, दलितों के विकास के लिए आवंटित फंड के इस्तेमाल को लेकर एक श्वेत पत्र जारी करने की भी पुरजोर मांग की गई है।
एससी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष कांथी किरण ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार दलितों के कल्याण को नजरअंदाज कर रही है और उनके हिस्से का पैसा दूसरी जगहों पर डायवर्ट किया जा रहा है। किरण के मुताबिक, कांग्रेस सरकार कागजों पर आंकड़ों की बाजीगरी दिखाकर दलित विकास का झूठा ढिंढोरा पीट रही है। जमीनी हकीकत यह है कि बेरोजगार दलित युवाओं को कोई ठोस फायदा नहीं मिल रहा है और वे आज भी रोजगार के लिए भटकने को मजबूर हैं।
विधानसभा में उपमुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क द्वारा दिए गए बयानों का हवाला देते हुए कांथी किरण ने सरकार को घेरा। उन्होंने याद दिलाया कि सरकार ने वित्तीय वर्ष 2024, 2025 और 2026 के दौरान अनुसूचित जाति विशेष विकास कोष (SCSDF) के तहत लगभग 1.20 लाख करोड़ रुपये आवंटित करने का दावा किया था। यह रकम हर साल करीब 40,000 करोड़ रुपये बैठती है। हालांकि, बीजेपी नेता का कहना है कि यह भारी-भरकम राशि जमीन पर कहीं भी लोगों के जीवन को बेहतर बनाती हुई नजर नहीं आ रही है।
इस दौरान कांग्रेस के मशहूर चेवेल्ला डिक्लेरेशन पर भी गंभीर सवाल उठाए गए। इस घोषणापत्र में हर दलित परिवार को 12 लाख रुपये की आर्थिक मदद देने का वादा किया गया था। किरण ने दावा किया कि 'राजीव युवा विकासम' स्वरोजगार योजना के तहत अब तक लगभग पांच लाख आवेदन आ चुके हैं। इतनी बड़ी संख्या में आवेदन मिलने के बावजूद अब तक एक भी आवेदन को मंजूरी नहीं मिली है और न ही योजना को सही ढंग से लागू किया गया है।
प्रशासन की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए बीजेपी नेता ने बताया कि हैदराबाद जिला एससी कॉर्पोरेशन और जिला कलेक्टरों के पास तीन आरटीआई (RTI) आवेदन दाखिल किए गए थे। इसके बावजूद सरकार खर्च का ब्योरा देने में नाकाम रही है, जो कई गहरे संदेह पैदा करता है। उन्होंने मांग की है कि प्रस्तावित श्वेत पत्र में एससी विकास कोष से विभागवार हुए आवंटन का पूरा हिसाब दिया जाए। इसमें वास्तविक खर्च और स्वरोजगार योजनाओं के तहत लाभ पाने वाले लाभार्थियों की सही संख्या को भी सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
दूसरी ओर, मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) के खिलाफ निकाली गई रैली को लेकर भी तेलंगाना की राजनीति गरमाई हुई है। बीजेपी प्रवक्ता एनवी सुभाष, उपाध्यक्ष बी. नरसैय्या गौड़ और विधायक दल के नेता ए. महेश्वर रेड्डी सहित कई प्रमुख नेताओं ने इस 'एंटी-सीईसी रैली' की कड़ी निंदा की है। बीजेपी नेताओं ने राज्य सरकार पर पुलिस तंत्र के दुरुपयोग का गंभीर आरोप लगाया है। उनका कहना है कि सरकार विपक्ष की आवाज को दबाने के लिए पुलिस का इस्तेमाल कर रही है, जबकि एक संवैधानिक संस्था के खिलाफ कांग्रेस समर्थित विरोध-प्रदर्शनों को खुली छूट दी जा रही है।
इन नेताओं ने आरोप लगाया कि कांग्रेस मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को जानबूझकर निशाना बना रही है। इसका मुख्य कारण यह है कि मतदाता सूची की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए उठाए जा रहे कदमों से कांग्रेस असहज महसूस कर रही है। डॉ. गौड़ ने सीधा चैलेंज देते हुए कहा कि अगर कांग्रेस को चुनाव प्रक्रिया पर इतना ही शक है, तो विभिन्न राज्यों में उनकी सरकारों को तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए। वहीं, महेश्वर रेड्डी ने चुनाव आयोग पर लगाए गए आरोपों को साबित करने के लिए सबूत मांगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि हाल ही में दिए गए स्पष्टीकरणों से संवैधानिक संस्थाओं के प्रति जनता का विश्वास और अधिक मजबूत हुआ है।
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