उत्तर प्रदेश: बहुजन समाज पार्टी (BSP) की सुप्रीमो मायावती ने गुरुवार को सरकारी स्कूलों की बदहाली और बच्चों के प्रदर्शन पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि यह बेहद दुख की बात है कि जिन मासूम बच्चों को जीवन के इस पड़ाव पर खेलना, पढ़ना और अपनी उम्र का आनंद लेना चाहिए, वे आज बुनियादी सुविधाओं की कमी के कारण सड़कों पर उतरकर विरोध करने को मजबूर हैं।
स्कूलों की इस खस्ताहाल स्थिति ने बच्चों और उनके अभिभावकों को अपनी आवाज बुलंद करने के लिए प्रेरित किया है। इसी का नतीजा है कि ये लोग जेन-जेड (Gen-Z) या कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा चलाए जा रहे राष्ट्रव्यापी 'फिक्स द स्कूल्स' (स्कूलों को ठीक करो) अभियान में बेहद सक्रिय रूप से हिस्सा ले रहे हैं।
उत्तर प्रदेश में स्कूलों की खराब दशा को लेकर जेन-अल्फा (Gen Alpha) के विरोध प्रदर्शन पर बीएसपी प्रमुख ने सरकारों को कड़ी नसीहत दी है। उन्होंने कहा कि यूपी सहित अन्य जगहों की सरकारों को बच्चों की मांगों पर बल प्रयोग करने के बजाय, सही नीयत और नीति के साथ सहानुभूतिपूर्वक विचार करना चाहिए।
पूर्व मुख्यमंत्री ने अपनी सरकार के कार्यकाल को याद करते हुए जोर देकर कहा कि उनके नेतृत्व में बीएसपी ने हमेशा शोषित और वंचित वर्गों की शिक्षा तथा भलाई पर पूरा ध्यान दिया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों ने हमेशा इन वर्गों के हितों की भारी अनदेखी की है।
मायावती ने बताया कि उनकी सरकार का यह काम बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर द्वारा रचे गए मानवतावादी और कल्याणकारी संविधान के बिल्कुल अनुरूप था। इसका मुख्य उद्देश्य यह था कि इन पीड़ित परिवारों को सम्मान, बेहतर शिक्षा और आजीविका के साथ एक न्यायपूर्ण जीवन मिल सके।
उन्होंने मौजूदा हालात को बेहद चिंताजनक बताते हुए सरकारों पर गंभीर आरोप भी लगाए। उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों की दशा सुधारने पर ध्यान देने के बजाय, सरकारें इस मुद्दे से पूरी तरह आंखें चुरा रही हैं। ऐसा प्रतीत होता है जैसे पूरी शिक्षा व्यवस्था को निष्प्रभावी बनाने की कोई बड़ी साजिश रची जा रही हो।
अपने बयान के अंत में उन्होंने कहा कि आज हजारों की संख्या में सरकारी स्कूलों को बंद किया जा रहा है, जिसके खिलाफ बीएसपी ने हमेशा निरंतर विरोध दर्ज कराया है। स्कूल की इमारतों, शिक्षकों, पीने के पानी, शौचालय और साफ-सफाई जैसी बुनियादी जरूरतों के भारी अभाव के कारण ही जेन-अल्फा के बच्चे अब सिर्फ मुखर ही नहीं हो रहे हैं, बल्कि उनके भीतर भारी आक्रोश भी पनप रहा है।
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