'मुझे ईंट तक नहीं छूने दिया...': काकोरी के शीतला मंदिर में दलित BJP विधायक ने लगाया छुआछूत का आरोप, सपा ने पार्टी को घेरा

लखनऊ के शीतला मंदिर में पूजा के दौरान दलित विधायक को ईंट न छूने देने का आरोप, समाजवादी पार्टी ने भाजपा के 'बंटेंगे तो कटेंगे' नारे पर उठाया कड़ा सवाल।
Dalit MLA caste discrimination
लखनऊ के काकोरी में दलित BJP विधायक जय देवी ने मंदिर में छुआछूत का गंभीर आरोप लगाया है। इस विवाद पर सपा ने भाजपा सरकार को जमकर घेरा।
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लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के काकोरी इलाके में एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। मलिहाबाद से भारतीय जनता पार्टी की विधायक जय देवी कौशल ने शीतला मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए आयोजित भूमि पूजन कार्यक्रम में उनके साथ जातीय भेदभाव होने का गंभीर आरोप लगाया है।

पासी दलित समुदाय से आने वाली विधायक का कहना है कि उन्हें इस पवित्र अनुष्ठान के दौरान वो सम्मान और अधिकार नहीं दिया गया, जो एक जनप्रतिनिधि को मिलना चाहिए। उन्होंने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए बताया कि पुजारी ने उन्हें एक ईंट तक नहीं छूने दी और न ही रोली लगाने दी।

विधायक ने इसे सीधे तौर पर दलित होने के कारण किया गया भेदभाव करार दिया। उनका यह भी दावा है कि पूजा के दौरान उन्हें लगातार खड़ा रखा गया। हिंदू अनुष्ठानों में आमतौर पर किए जाने वाले काम जैसे अगरबत्ती जलाना या नारियल फोड़ना, उन्हें ये सब भी नहीं करने दिया गया।

यह पूरी घटना बुधवार सुबह करीब 11 बजे की है। उस वक्त विधायक कई स्थानीय भाजपा नेताओं के साथ मंदिर पहुंची थीं। जय देवी ने बताया कि इस मंदिर के कायाकल्प के लिए सरकारी धन मंजूर कराने में उनकी अहम भूमिका रही है। उनके ही प्रयासों से शीतला मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए लगभग एक करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत हुई थी।

पूर्व केंद्रीय मंत्री और दो बार के सांसद रहे दिवंगत कौशल किशोर की पत्नी जय देवी ने निराशा जताते हुए कहा कि वह इस क्षेत्र से दो बार विधायक चुनी गई हैं। उन्होंने इलाके और जनता के लिए बहुत काम किया है, इसके बावजूद उन्हें इस तरह के जातीय भेदभाव का सामना करना पड़ा।

उन्होंने यह भी बताया कि उसी दिन उन्होंने मलिहाबाद के एक अन्य मंदिर में भी दर्शन किए, जहां पूजा-पाठ बिल्कुल सामान्य तरीके से संपन्न हुआ। विधायक के मुताबिक वह अतीत में भी कई बार शीतला देवी मंदिर आ चुकी हैं, लेकिन पहले कभी उनके साथ ऐसा दुर्व्यवहार नहीं हुआ था।

इस मामले ने तब तूल पकड़ लिया जब विधायक के बेटे विकास किशोर ने सोशल मीडिया पर इस कथित घटना को लेकर एक पोस्ट साझा की। उन्होंने अपनी पोस्ट में साफ तौर पर बताया कि पुजारी शैलेंद्र बाजपेयी पूजा करा रहे थे और रमाकांत गुप्ता मंत्रोच्चारण कर रहे थे। गौरतलब है कि विधायक के लगातार प्रयासों के बाद ही पर्यटन विभाग ने इस जीर्णोद्धार परियोजना को हरी झंडी दिखाई थी।

विवाद के सामने आने के बाद गुरुवार को आजाद समाज पार्टी के जिलाध्यक्ष अजय भारती अपने कई कार्यकर्ताओं के साथ मंदिर पहुंच गए। वहां उन्होंने इस कथित जातीय भेदभाव के खिलाफ जमकर विरोध प्रदर्शन किया।

दूसरी ओर मंदिर प्रशासन ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। मीडिया में आई खबरों के अनुसार, मंदिर के प्रबंधक रमाकांत गुप्ता ने विधायक के दावों को गलत ठहराया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मंदिर समाज के सभी वर्गों और जातियों के लोगों के लिए हमेशा खुला रहता है।

इस मामले को लेकर अब समाजवादी पार्टी ने भी सत्ताधारी भाजपा पर जोरदार हमला बोला है। सपा का कहना है कि एक दलित विधायक के साथ हुए इस व्यवहार ने राज्य सरकार के राज में फैले जातीय भेदभाव की पोल खोल दी है। समाजवादी पार्टी के बाबा साहब अंबेडकर वाहिनी के राष्ट्रीय महासचिव रामबाबू सुदर्शन ने इस पूरी घटना को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया है।

सपा नेता ने तंज कसते हुए कहा कि सूबे की राजधानी में और भाजपा सरकार के नौ साल पूरे होने के बाद ऐसी घटना का होना, उत्तर प्रदेश में जातिवाद की असली तस्वीर पेश करता है। उन्होंने कहा कि आरोप किसी विपक्षी ने नहीं बल्कि भाजपा की खुद की मौजूदा दलित विधायक ने लगाए हैं।

सुदर्शन ने यह भी कहा कि अगर यह किसी अन्य दल के विधायक के साथ हुआ होता, तो अब तक भाजपा की ट्रोल आर्मी इसे राजनीति से प्रेरित बता चुकी होती। उन्होंने कहा कि यह घटना केवल एक मौजूदा दलित विधायक की पीड़ा नहीं है, बल्कि यह प्रदेश और देश के करोड़ों दलितों की भावनाओं को आहत करने वाली बात है।

सपा नेता ने भाजपा और आरएसएस के 'बंटेंगे तो कटेंगे' जैसे नारों पर भी तीखा प्रहार किया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या भारतीय जनता पार्टी इसी तरह से हिंदुओं को एकजुट करना चाहती है। सुदर्शन ने कड़े शब्दों में पूछा कि ऐसी घटनाओं को देखकर तो यही विचार मन में आता है कि क्या भाजपा दलितों को हिंदू मानती भी है या नहीं।

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