उत्तर प्रदेश: बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सुप्रीमो मायावती ने गुरुवार को एक बेहद सख्त कदम उठाते हुए पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी और पूर्व मंत्री अनंत कुमार मिश्रा उर्फ अंटू मिश्रा को तत्काल प्रभाव से निष्कासित कर दिया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर इस बड़े फैसले की जानकारी देते हुए मायावती ने स्पष्ट किया कि मिश्रा को पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के कारण बाहर का रास्ता दिखाया गया है।
बसपा प्रमुख ने अपनी पोस्ट में उत्तर प्रदेश के मौजूदा चुनावी माहौल को काफी अस्थिर और उतार-चढ़ाव वाला बताया। उन्होंने पार्टी के सभी स्तर के कार्यकर्ताओं से अपील की है कि वे विरोधियों के किसी भी तरह के हथकंडे से पूरी तरह सावधान रहें।
इसके साथ ही मायावती ने कार्यकर्ताओं को आगामी राज्य विधानसभा चुनावों में पार्टी के 'आंबेडकरवादी मिशन' को सफल बनाने के लिए पूरी ईमानदारी और निष्ठा से काम करने का कड़ा निर्देश भी दिया है।
अंटू मिश्रा का निष्कासन राजनीतिक गलियारों में इसलिए भी चर्चा का विषय है क्योंकि वे बसपा के राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा के रिश्तेदार हैं। दिलचस्प बात यह है कि बीते 10 अगस्त को हाथरस में हुई एक जनसभा के दौरान आकाश आनंद ने सतीश चंद्र मिश्रा की खुलकर तारीफ की थी। उस वक्त आनंद ने कहा था कि हर मुश्किल घड़ी में सतीश चंद्र मिश्रा पार्टी नेतृत्व के साथ मजबूती से खड़े रहे हैं।
बसपा के भीतर हाल के दिनों में यह तीसरी सबसे बड़ी कार्रवाई है। इससे पहले 2 अगस्त को मायावती ने राज्यसभा के पूर्व सांसद और पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद के ससुर अशोक सिद्धार्थ को निष्कासित कर दिया था। उसी दिन राष्ट्रीय समन्वयक रणधीर सिंह बेनीवाल को भी पार्टी से बाहर कर दिया गया था।
अंटू मिश्रा के राजनीतिक रुख को लेकर पहले से ही कई तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं। साल 2024 के लोकसभा चुनावों के दौरान यह चर्चा जोरों पर थी कि मिश्रा जल्द ही भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में शामिल हो सकते हैं, हालांकि तब ऐसा कुछ नहीं हुआ था।
अनंत कुमार मिश्रा का बसपा सरकार में एक बड़ा सियासी कद रहा है और वे साल 2007 से लेकर 2011 तक मायावती सरकार में स्वास्थ्य मंत्री की अहम जिम्मेदारी संभाल चुके हैं।
उन्होंने अप्रैल 2011 में अपने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। यह इस्तीफा 2 अप्रैल 2011 को लखनऊ के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (परिवार नियोजन) डॉ. बीपी सिंह की हत्या के बाद उपजे विवाद के कारण दिया गया था। वर्तमान में उत्तर प्रदेश के बहुचर्चित करोड़ों रुपये के एनआरएचएम (NRHM) घोटाले में भी उनकी भूमिका को लेकर जांच की जा रही है।
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