उत्तर प्रदेश: बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने रविवार को अनुशासनहीनता के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए एक बड़ा फैसला लिया है। उन्होंने अपने भतीजे आकाश आनंद के ससुर और पूर्व राज्यसभा सांसद अशोक सिद्धार्थ को एक बार फिर पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया है। इसके साथ ही, पार्टी के दिशा-निर्देशों की अनदेखी करने पर राष्ट्रीय समन्वयक रणधीर सिंह बेनीवाल को भी निष्कासित कर दिया गया है।
अशोक सिद्धार्थ बसपा के केंद्रीय समन्वयक के तौर पर काम कर रहे थे और उन पर ओडिशा, पश्चिम बंगाल तथा कर्नाटक जैसे राज्यों की अहम जिम्मेदारी थी। मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (X) पर हिंदी में जानकारी देते हुए बताया कि लगातार मिल रही अनुशासनहीनता की रिपोर्ट के बाद शनिवार को ही सिद्धार्थ को इन राज्यों की संगठनात्मक जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया गया था।
पार्टी प्रमुख ने यह भी स्पष्ट किया कि सिद्धार्थ के यूपी लौटने की खबरें पार्टी के भीतर भ्रम पैदा करने की एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा थीं। इसका मुख्य उद्देश्य आगामी यूपी विधानसभा चुनावों के लिए चल रहे सघन प्रचार अभियान को प्रभावित करना था। मायावती ने कड़े शब्दों में कहा कि पार्टी और आंदोलन के हित में अशोक सिद्धार्थ को तत्काल प्रभाव से निष्कासित किया जा रहा है और भविष्य में उन्हें किसी भी परिस्थिति में वापस नहीं लिया जाएगा।
इससे पहले फरवरी 2025 में भी महाराष्ट्र चुनाव में टिकट बंटवारे को लेकर निर्देशों के उल्लंघन के कारण सिद्धार्थ पर गाज गिरी थी। उस वक्त उन पर गुटबाजी को बढ़ावा देने और आकाश आनंद का राजनीतिक करियर खराब करने के भी गंभीर आरोप लगे थे। हालांकि, अपनी गलतियों के लिए सार्वजनिक माफी मांगने के बाद सितंबर 2025 में उनकी पार्टी में दोबारा वापसी हुई थी। तब उन्हें इस शर्त पर बहाल किया गया था कि वे उत्तर प्रदेश में नहीं, बल्कि केवल अन्य राज्यों में पार्टी का जनाधार बढ़ाने का काम करेंगे।
रविवार को पार्टी के कड़े एक्शन का शिकार होने वाले दूसरे नेता राष्ट्रीय समन्वयक रणधीर सिंह बेनीवाल रहे। बेनीवाल पंजाब के प्रभारी थे और हिमाचल प्रदेश व जम्मू-कश्मीर से जुड़ी कुछ जिम्मेदारियां भी संभाल रहे थे। मायावती ने अपने बयान में बताया कि बेनीवाल के खिलाफ भी पार्टी के निर्देशों की अवहेलना करने की खबरें लगातार मिल रही थीं, जिसके चलते यह कठोर कदम उठाया गया है।
सूत्रों के मुताबिक, चुनाव वाले राज्य पंजाब में समय देने के बजाय बेनीवाल पश्चिमी यूपी के स्थानीय संगठनात्मक मामलों में ज्यादा उलझे हुए थे। केंद्रीय नेतृत्व को यह सूचना मिली थी कि 2027 के विधानसभा चुनावों के लिए बसपा की तैयारियां उनकी वजह से संतोषजनक दिशा में नहीं जा रही थीं।
इन नेताओं पर कड़ी कार्रवाई की घोषणा करने के साथ ही मायावती ने राष्ट्रीय स्तर पर कुछ अहम संगठनात्मक बदलाव भी किए। उन्होंने बेनीवाल की जगह बसपा के राज्यसभा सांसद रामजी गौतम को पंजाब का नया प्रभारी नियुक्त किया है। मायावती ने स्पष्ट किया कि गौतम न केवल आगामी पंजाब चुनावों के दौरान पार्टी के प्रयासों की देखरेख करेंगे, बल्कि 2029 के लोकसभा चुनावों तक इस महत्वपूर्ण भूमिका को निभाते रहेंगे।
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