
नई दिल्ली- दलित आदिवासी शक्ति अधिकार मंच (DASAM) ने पंजाब, जयपुर, बिहार, चेन्नई, इंदौर तथा देश के अन्य हिस्सों में कार्यरत उन सफाई कर्मचारियों के साथ अपनी एकजुटता व्यक्त की है, जिन्हें रोजगार के नियमितीकरण, उचित वेतन, सामाजिक सुरक्षा, सुरक्षित कार्य परिस्थितियों तथा सम्मानजनक कार्यस्थल की मांग को लेकर प्रदर्शन और हड़ताल करने के लिए मजबूर होना पड़ा है। दशम ने नगर निकायों और राज्य सरकारों द्वारा इन लंबे समय से लंबित मांगों की निरंतर उपेक्षा की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि यह उपेक्षा देश के सबसे आवश्यक कार्यबलों में से एक के प्रति संस्थागत असंवेदनशीलता और उदासीनता को दर्शाती है।
सफाई कर्मचारियों ने अत्यंत खतरनाक, असुरक्षित और शोषणकारी परिस्थितियों में कार्य करते हुए भी सार्वजनिक स्वास्थ्य, पर्यावरणीय स्वच्छता और शहरी जीवन को सुचारु बनाए रखने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता बार-बार सिद्ध की है। इसके बावजूद हजारों कर्मचारी आज भी ठेका व्यवस्था के तहत कार्यरत हैं, उन्हें अपर्याप्त वेतन दिया जाता है, वैधानिक सेवा लाभों से वंचित रखा जाता है तथा सामाजिक सुरक्षा के अधिकारों से बाहर रखा जाता है। दशम ने इसे श्रम अधिकारों और संवैधानिक गारंटियों का स्पष्ट उल्लंघन बताया है।
दशम ने इस बात को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है कि सफाई कार्य को आज भी एक सम्मानजनक सार्वजनिक सेवा के रूप में मान्यता नहीं दी जा रही है, जिसके साथ सुरक्षित रोजगार, पर्याप्त वेतन, व्यावसायिक सुरक्षा और सामाजिक संरक्षण सुनिश्चित होना चाहिए। संगठन ने कहा कि देश के अधिकांश सफाई कर्मचारी ऐतिहासिक रूप से उत्पीड़ित अनुसूचित जाति समुदायों से आते हैं, विशेषकर वे समुदाय जिन्हें पीढ़ियों से जाति-आधारित पेशों में भेदभाव और सामाजिक बहिष्कार के कारण धकेला गया है। सफाई कर्मचारियों के लिए ठेका व्यवस्था और अस्थायी रोजगार की निरंतरता न केवल संरचनात्मक जातिगत असमानताओं को बनाए रखती है, बल्कि कर्मचारियों को समान अवसर, आर्थिक सुरक्षा और मानवीय गरिमा से भी वंचित करती है। दशम ने कहा कि ऐसी व्यवस्था संविधान में निहित समानता, सामाजिक न्याय और जाति-आधारित भेदभाव के उन्मूलन की भावना के प्रतिकूल है।
गौरतलब है कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 16, 17, 21, 23 और 42 सामूहिक रूप से कानून के समक्ष समानता, भेदभाव पर रोक, अस्पृश्यता के उन्मूलन, गरिमापूर्ण जीवन के अधिकार, शोषण के निषेध तथा राज्य द्वारा न्यायसंगत और मानवीय कार्य परिस्थितियों को सुनिश्चित करने की गारंटी देते हैं। राज्य के नीति-निर्देशक तत्व भी सरकारों को सभी श्रमिकों के लिए जीवन-निर्वाह योग्य वेतन, मानवीय कार्य परिस्थितियाँ और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने का दायित्व सौंपते हैं। इसके बावजूद दशम ने कहा कि सफाई कार्य के लिए असुरक्षित ठेका श्रम पर निर्भरता इन संवैधानिक गारंटियों को कमजोर करती है।
दशम ने यह भी दोहराया कि पर्याप्त सुरक्षा उपकरण, स्वास्थ्य बीमा, नियमित स्वास्थ्य परीक्षण तथा व्यावसायिक सुरक्षा तंत्र उपलब्ध कराए बिना सफाई कर्मचारियों से खतरनाक कार्य कराना "हाथ से मैला उठाने के रूप में नियोजन का प्रतिषेध एवं उनका पुनर्वास अधिनियम, 2013", व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य परिस्थितियाँ संहिता, 2020 तथा सम्मानजनक कार्य, व्यावसायिक सुरक्षा और समानता से संबंधित अंतरराष्ट्रीय श्रम मानकों के प्रति भारत की प्रतिबद्धताओं का उल्लंघन है।
संगठन ने कहा कि नगर निकायों के कार्यों में लगातार ठेका व्यवस्था पर निर्भरता के कारण कर्मचारियों को भविष्य निधि (पीएफ), पेंशन, सवेतन अवकाश, स्वास्थ्य सेवाएँ, मातृत्व लाभ, दुर्घटना मुआवजा तथा श्रम कानूनों के अंतर्गत प्रदत्त अन्य वैधानिक अधिकारों से व्यापक रूप से वंचित किया जा रहा है। दशम ने कहा कि जो कर्मचारी प्रतिदिन आवश्यक सार्वजनिक सेवाएँ प्रदान करते हैं, उन्हें उपभोग के बाद छोड़ दिए जाने वाले श्रमिकों की तरह नहीं माना जा सकता, जबकि पूरे शहर उनकी सेवाओं पर निर्भर हैं।
दशम का मानना है कि सफाई कर्मचारी केवल सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थितियों के दौरान प्रशंसा के पात्र नहीं हैं, बल्कि उन्हें सुरक्षित रोजगार, उचित वेतन, सामाजिक सुरक्षा और सम्मानजनक कार्य परिस्थितियों के माध्यम से वास्तविक सम्मान मिलना चाहिए। संगठन ने कहा कि प्रशासन अपनी जिम्मेदारियों को निजी ठेकेदारों पर डालते हुए उन कर्मचारियों के श्रम से लाभ नहीं उठा सकता, जिनका योगदान समाज के लिए अनिवार्य है।
दशम ने सफाई कर्मचारियों के हित में एक व्यापक मांग पत्र जारी किया है। संगठन ने ठेका प्रथा की शोषणकारी व्यवस्था को समाप्त करते हुए सभी सफाई कर्मचारियों का तत्काल नियमितीकरण करने की मांग की है।
संगठन ने महँगाई के अनुरूप जीवन-निर्वाह योग्य वेतन सुनिश्चित करने, "समान कार्य के लिए समान वेतन" के सिद्धांत को लागू करने, समय पर वेतन भुगतान करने तथा लंबित वेतन संशोधनों को तत्काल लागू करने की मांग भी रखी है।
सभी सफाई कर्मचारियों को, चाहे उनका रोजगार किसी भी प्रकार का हो, भविष्य निधि (पीएफ), पेंशन, कर्मचारी राज्य बीमा (ईएसआई), स्वास्थ्य बीमा, मातृत्व लाभ, दुर्घटना मुआवजा, सवेतन अवकाश तथा सेवानिवृत्ति लाभ सहित सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा प्रदान किए जाने की मांग की गई है।
दशम ने पर्याप्त सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराने, जहाँ संभव हो वहाँ खतरनाक सफाई कार्यों का पूर्ण मशीनीकरण करने, नियमित स्वास्थ्य परीक्षण आयोजित करने, व्यावसायिक सुरक्षा प्रशिक्षण देने तथा कार्यस्थल सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने की भी मांग की है।
संगठन ने मशीनीकरण, कठोर कानूनी कार्रवाई, प्रभावी पुनर्वास तथा कानून का उल्लंघन करने वाले सार्वजनिक प्राधिकरणों की जवाबदेही सुनिश्चित करते हुए हाथ से मैला उठाने तथा सीवर और सेप्टिक टैंक की खतरनाक मैनुअल सफाई की सभी प्रथाओं का पूर्ण उन्मूलन करने की मांग भी रखी है।
दशम ने श्रम कानूनों और संवैधानिक सुरक्षा प्रावधानों का कड़ाई से पालन करने की मांग करते हुए कहा कि सफाई कर्मचारियों को भेदभाव, शोषण, जातिगत उत्पीड़न, असुरक्षित कार्य परिस्थितियों और मनमाने ढंग से सेवा समाप्ति से संरक्षण मिलना चाहिए।
संगठन ने प्रभावी शिकायत निवारण तंत्र स्थापित करने, कर्मचारियों के यूनियनों और प्रतिनिधि संगठनों के साथ नियमित संवाद सुनिश्चित करने तथा रोजगार और कल्याण से जुड़े निर्णयों में सफाई कर्मचारियों की भागीदारी सुनिश्चित करने की भी मांग की है।
इसके अलावा दशम ने सफाई कर्मचारियों के लिए एक राष्ट्रीय नीति बनाने की मांग रखी है, जिसमें रोजगार सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवाएँ, आवास, कर्मचारियों के बच्चों की शिक्षा तथा जाति-आधारित व्यवसायों से आगे सामाजिक और आर्थिक उन्नति के अवसर सुनिश्चित किए जाएँ।
दशम ने यह भी अनुशंसा की है कि केंद्र और राज्य सरकारें सफाई कर्मचारी यूनियनों, दलित अधिकार संगठनों, श्रम विशेषज्ञों, सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों और मानवाधिकार संस्थाओं के प्रतिनिधियों को शामिल करते हुए स्वतंत्र निगरानी समितियों का गठन करें, जो समय-समय पर श्रम मानकों, व्यावसायिक सुरक्षा नियमों तथा सामाजिक सुरक्षा दायित्वों के अनुपालन की समीक्षा करें। साथ ही, नगर निगमों को अस्थायी ठेका मॉडल पर निर्भर रहने के बजाय कर्मचारियों के कल्याण के लिए पर्याप्त बजटीय प्रावधान सुनिश्चित करने चाहिए, जिससे कर्मचारियों के अधिकारों और सार्वजनिक सेवा दोनों की गुणवत्ता सुरक्षित रह सके।
दशम ने कहा कि सफाई कर्मचारियों की मांगों की लगातार अनदेखी यह चिंताजनक संदेश देती है कि समाज के सबसे आवश्यक और सबसे जोखिमपूर्ण कार्य करने वाले लोग ही हमारी सार्वजनिक संस्थाओं में सबसे कम महत्व रखते हैं। संगठन ने कहा कि यह संस्थागत उदासीनता जातिगत पदानुक्रम को मजबूत करती है, आर्थिक असमानताओं को गहरा करती है और सभी नागरिकों की गरिमा सुनिश्चित करने के संवैधानिक वादे को कमजोर करती है।
दशम ने पुनः स्पष्ट किया कि सफाई कर्मचारी किसी प्रकार की दया या खैरात नहीं मांग रहे हैं; वे अपने संवैधानिक, कानूनी और मानवीय अधिकारों की मांग कर रहे हैं। संगठन ने कहा कि उनका संघर्ष मूलतः गरिमा, समानता और सामाजिक न्याय का संघर्ष है।
दशम ने देशभर के सफाई कर्मचारियों के साथ खड़े रहने का संकल्प व्यक्त करते हुए सभी सरकारों से अपील की कि वे तत्काल संवाद स्थापित करें, उनकी वर्षों से लंबित मांगों का समाधान करें तथा यह सुनिश्चित करें कि किसी भी कर्मचारी को अपनी आजीविका और गरिमा में से किसी एक को चुनने के लिए मजबूर न होना पड़े। दशम ने कहा कि वह सफाई कर्मचारियों के संघर्षों का निरंतर समर्थन करता रहेगा और जाति-आधारित पेशागत भेदभाव के उन्मूलन, सम्मानजनक कार्य, सुरक्षित रोजगार तथा संविधान में निहित न्याय, समानता, बंधुत्व और मानवीय गरिमा के मूल्यों की स्थापना के लिए संघर्ष जारी रखेगा।
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