उत्तर प्रदेश: बहुजन समाज पार्टी (बसपा) 9 अक्टूबर को उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक बड़ा शक्ति प्रदर्शन करने जा रही है। पार्टी के संस्थापक कांशीराम की पुण्यतिथि के अवसर पर यह विशाल आयोजन किया जाएगा। बसपा सुप्रीमो मायावती ने राज्य भर के नेताओं और कार्यकर्ताओं को इस दिन एकजुट होकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करने का आह्वान किया है।
सोमवार को पार्टी की उत्तर प्रदेश इकाई की राज्य स्तरीय बैठक हुई। इस दौरान मायावती ने सभी पदाधिकारियों को मान्यवर कांशीराम जी स्मारक स्थल पहुंचने के निर्देश दिए। इस कार्यक्रम में सभी कार्यकर्ता सामूहिक रूप से 'मान्यवर कांशीराम जी का मिशन अधूरा, बहनजी करेंगी पूरा' नारे के साथ संकल्प लेंगे। इस आयोजन को आगामी विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी की एकजुटता और जमीनी लामबंदी के रूप में देखा जा रहा है।
फिलहाल यह तय नहीं है कि मायावती इस साल जनसभा को संबोधित करेंगी या नहीं। हालांकि, पिछले साल इसी दिन उन्होंने स्मारक स्थल पर एक बड़ी रैली को संबोधित किया था। वह नौ साल बाद लखनऊ में पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच उनका पहला सार्वजनिक भाषण था।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, 9 अक्टूबर के इस महाजुटान में पश्चिमी उत्तर प्रदेश सहित राज्य के सभी क्षेत्रों से कार्यकर्ताओं के पहुंचने की उम्मीद है। आमतौर पर पश्चिमी यूपी के कार्यकर्ता कांशीराम की पुण्यतिथि मनाने के लिए नोएडा के दलित प्रेरणा स्थल पर जुटते रहे हैं। लेकिन इस साल वहां नवीनीकरण का काम चल रहा है, जिसके चलते वहां के कार्यकर्ताओं को भी लखनऊ कार्यक्रम में शामिल होने के लिए कहा गया है।
सोमवार की समीक्षा बैठक के दौरान मायावती ने चुनावी तैयारियों का भी बारीकी से जायजा लिया। उन्होंने उम्मीदवारों के चयन और बूथ स्तर की समितियों के पुनर्गठन की प्रगति पर गहन चर्चा की। राज्य में मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण के बाद पार्टी ने अपनी बूथ समितियों को फिर से मजबूत करने का काम तेज कर दिया है।
मायावती ने कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया है कि वे विरोधी दलों द्वारा घोषित 'फ्रीबीज' यानी मुफ्त योजनाओं वाले मुद्दों पर मतदाताओं को जागरूक करें। उन्होंने ऐसे वादों को भ्रामक बताते हुए कहा कि इनका इस्तेमाल केवल चुनाव परिणामों को प्रभावित करने के लिए किया जाता है। उन्होंने विशेष रूप से आगाह किया कि प्रलोभनों के जरिए महिला मतदाताओं को लुभाने के प्रयास इन दिनों काफी बढ़ गए हैं।
इसके साथ ही, बसपा प्रमुख ने उत्तर प्रदेश से हो रहे पलायन को एक गंभीर चिंता का विषय बताया। उन्होंने इसे सीधे तौर पर गरीबी, बेरोजगारी और पिछड़ेपन से जोड़ा और कहा कि इस मुद्दे पर सरकारी घोषणाएं पूरी तरह अपर्याप्त रही हैं। मायावती ने अपने नेताओं को हिदायत दी कि वे जनता के बीच जाकर बसपा सरकारों के दौरान किए गए जनकल्याणकारी कार्यों को उजागर करें और राज्य की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों पर भी पैनी नजर रखें।
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