
नई दिल्ली: समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा चौधरी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को एक पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने संसद के प्रत्येक सत्र में महिला और बाल विकास से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करने के लिए एक 'विशेष दिन' आवंटित करने का आग्रह किया है। उनका स्पष्ट रूप से मानना है कि सदन में इन गंभीर विषयों पर व्यापक और सार्थक विचार-विमर्श होना सबसे ज्यादा जरूरी है।
उत्तर प्रदेश की कैराना सीट से पहली बार सांसद बनीं इकरा चौधरी महिलाओं के सशक्तिकरण संबंधी स्थायी समिति की सदस्य भी हैं। उन्होंने स्पीकर को लिखे पत्र में इस बात पर जोर दिया कि ये मुद्दे न केवल सामाजिक न्याय और समावेशी विकास का अभिन्न अंग हैं, बल्कि हमारे देश के उज्ज्वल भविष्य की नींव भी बनाते हैं। सांसद ने इस बात पर संतोष जताया कि ऐसे मामलों पर आमतौर पर पार्टी लाइन से हटकर सभी सदस्यों के बीच व्यापक सहमति होती है।
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने गहरी चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि समय की पाबंदियों के कारण अक्सर इन बेहद महत्वपूर्ण मुद्दों पर सदन में उतना ध्यान नहीं दिया जाता, जितने के ये हकदार हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि ये विषय काफी हद तक गैर-विवादास्पद प्रकृति के होते हैं और आमतौर पर इनसे कोई विभाजनकारी बहस नहीं छिड़ती है।
इसके विपरीत, प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने, चुनौतियों का समाधान खोजने और स्पष्ट प्राथमिकताएं तय करने के लिए इन पर गहराई से ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता होती है। सांसद ने बताया कि वर्तमान में महिला और बाल विकास से जुड़ी नीतियों और जनहित के मामलों पर चर्चा के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पाता है, जिससे विस्तृत बातचीत का दायरा सीमित हो जाता है।
इसी कमी को दूर करने के लिए उन्होंने ओम बिरला से गुजारिश की है कि हर सत्र में कम से कम एक दिन विशेष रूप से 'महिला और बाल विकास' के लिए निर्धारित किया जाए। इकरा चौधरी का मानना है कि इस कदम से इस महत्वपूर्ण क्षेत्र की नीतियों, सरकारी योजनाओं और उनके सामने आने वाली चुनौतियों पर व्यवस्थित रूप से विस्तृत चर्चा सुनिश्चित हो सकेगी।
उन्होंने अंत में कहा कि इस तरह की सार्थक पहल से सदन की कार्यवाही की प्रभावशीलता काफी बढ़ेगी और यह अधिक जन-केंद्रित बन सकेगी।
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