
नई दिल्ली: उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के बाद हुए कथित 'शुद्धिकरण यज्ञ' ने सियासी तूल पकड़ लिया है। इस घटना के विरोध में कांग्रेस के एससी/एसटी संसदीय फोरम ने केंद्र की भाजपा और उत्तराखंड सरकार के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। रविवार, 27 सितंबर को फोरम ने ऐलान किया कि इस कृत्य के विरोध में 29 सितंबर को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में एक विशाल 'दलित-आदिवासी स्वाभिमान सभा' का आयोजन किया जाएगा।
कांग्रेस सांसद मल्लू रवि ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए इस घटना को केंद्र और राज्य सरकार की दूषित मानसिकता का परिचायक बताया। उन्होंने उत्तराखंड सरकार की तीखी आलोचना करते हुए कहा कि प्रशासन ने शुरुआत में इस गंभीर मामले पर एफआईआर दर्ज करने से ही साफ इनकार कर दिया था। भारी विरोध और कांग्रेस के लगातार दबाव के बाद ही पुलिस को यह प्राथमिकी दर्ज करनी पड़ी।
सांसद रवि ने शीर्ष नेतृत्व की चुप्पी पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने निराशा जताते हुए कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि अब तक न तो प्रधानमंत्री, न ही गृह मंत्री और न ही उत्तराखंड के मुख्यमंत्री ने इस शर्मनाक कृत्य की निंदा की है।
इस बीच, कांग्रेस नेता मनोज कुमार ने मोदी सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए उसे पूरी तरह से "दलित-विरोधी" और "आदिवासी-विरोधी" करार दिया। उन्होंने दावा किया कि मौजूदा शासनकाल में इन वंचित समुदायों के खिलाफ अत्याचारों में भारी वृद्धि देखी गई है। इसके साथ ही उन्होंने देश भर के सभी दलित और आदिवासी विधायकों से इस अहम स्वाभिमान सभा में भारी संख्या में भाग लेने की अपील की है।
पार्टी फोरम की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, दिल्ली में होने वाली इस बैठक में मुख्य रूप से नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1955 और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के उल्लंघन से जुड़े मामलों पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। इसके अलावा अनुसूचित जातियों और जनजातियों के खिलाफ बढ़ रहे भेदभाव और हिंसा के मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया जाएगा।
फोरम ने इस बात पर जोर दिया कि विधायिकाओं और सार्वजनिक मंचों के भीतर मौजूद सामाजिक पूर्वाग्रहों और भेदभाव से लड़ने के लिए इन समुदायों के सभी जनप्रतिनिधियों का एकजुट होना अब समय की सबसे बड़ी मांग है।
गौरतलब है कि 8 अगस्त को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने हल्द्वानी के रामलीला मैदान में एक विशाल जनसभा को संबोधित किया था। इस रैली के ठीक तीन दिन बाद, 11 अगस्त को कुछ स्थानीय लोगों द्वारा उसी मैदान में कथित तौर पर 'शुद्धिकरण यज्ञ' आयोजित करने के बाद यह पूरा विवाद खड़ा हुआ था।
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