उत्तर प्रदेश: विधानसभा चुनाव की सुगबुगाहट के बीच राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। रविवार, 27 सितंबर को बहुजन समाज पार्टी के कई पूर्व दिग्गज नेता, जिनमें एक पूर्व राज्य मंत्री और लोकसभा उम्मीदवार शामिल हैं, आधिकारिक तौर पर उत्तर प्रदेश कांग्रेस के साथ जुड़ गए। लखनऊ स्थित राज्य मुख्यालय में आयोजित इस अहम कार्यक्रम ने प्रदेश की राजनीति में एक नए समीकरण की नींव रख दी है। कांग्रेस के रणनीतिकारों का मानना है कि यह विस्तार राज्य में सत्तासीन भारतीय जनता पार्टी के गिरते ग्राफ और कांग्रेस के प्रति जनता के बढ़ते भरोसे का जीता-जागता प्रमाण है।
कांग्रेस का हाथ थामने वाले प्रमुख चेहरों में 1990 के दशक की बसपा सरकार में मंत्री रहे इज़हार-उल-हक और 1998 में अमेठी से बसपा के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़कर एक लाख से अधिक वोट हासिल करने वाले नईम अहमद शामिल हैं। इनके अलावा आगरा की श्री बांके बिहारी एजुकेशनल सोसाइटी के संस्थापक अध्यक्ष व पूर्व छात्र नेता मदन मोहन शर्मा और बहराइच जिले के नानपारा के पूर्व ब्लॉक प्रमुख राशिद खान ने भी कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की। इन जमीनी नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं के शामिल होने से पार्टी के भीतर नई ऊर्जा का संचार हुआ है।
उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अजय राय ने सभी नए सदस्यों का गर्मजोशी से स्वागत किया। उन्होंने कहा कि राज्य मुख्यालय में उमड़ी यह भारी भीड़ कांग्रेस के प्रति समर्थन की विविधता को दर्शाती है। अजय राय ने स्पष्ट किया कि विभिन्न दलों और सामाजिक समूहों से आए इन वरिष्ठ नेताओं के पार्टी में जुड़ने से कांग्रेस का जनाधार और अधिक व्यापक हुआ है। उन्होंने विश्वास जताया कि अल्पसंख्यक समुदाय, पिछड़े वर्ग, दलित और सवर्ण अब पूरी तरह से राहुल गांधी की विचारधारा के साथ मजबूती से खड़े हैं।
प्रदेश अध्यक्ष ने विशेष रूप से इज़हार-उल-हक और नईम अहमद के मजबूत सामाजिक आधार का जिक्र करते हुए कहा कि उनके क्षेत्रों में पार्टी को इसका सीधा लाभ मिलेगा। उनके अनुसार, उत्तर प्रदेश में बदलाव की बयार अब साफ महसूस की जा सकती है। युवाओं के भविष्य, सामाजिक न्याय और जनता के अधिकारों की इस ऐतिहासिक लड़ाई को अब राहुल गांधी के मार्गदर्शन में एक नई दिशा और असीम ऊर्जा मिलेगी।
इससे ठीक तीन दिन पहले 24 सितंबर को भी कांग्रेस ने एक बड़ी राजनीतिक सेंधमारी की थी। तब पूर्व सांसद अमीर आलम खान और उनके बेटे एवं पूर्व विधायक नवाजिश आलम खान के साथ-साथ एआईएमआईएम, आजाद समाज पार्टी, आम आदमी पार्टी और राष्ट्रीय लोक दल के कई नेता कांग्रेस में शामिल हुए थे। अमीर आलम खान कैराना से रालोद के लोकसभा सांसद रहने के अलावा राज्यसभा सदस्य और तीन बार विधायक भी रह चुके हैं। लगातार हो रही इन जॉइनिंग ने प्रदेश के राजनीतिक माहौल को और भी गरमा दिया है।
कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव शाहनवाज आलम ने इन घटनाक्रमों को सत्ता परिवर्तन की स्पष्ट आहट बताया। उनके मुताबिक, उत्तर प्रदेश की जनता अब बदलाव के लिए पूरी तरह तैयार है और भाजपा सरकार को सत्ता से बाहर करने का मन बना चुकी है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि 'भारत जोड़ो यात्रा' के बाद से मुस्लिम समुदाय सहित देश के तमाम नागरिकों का कांग्रेस नेतृत्व के प्रति विश्वास और भी गहरा हुआ है। उन्होंने दावा किया कि केवल देश की यह सबसे पुरानी पार्टी ही भाजपा की सत्तावादी प्रवृत्तियों से लड़कर भारत के बहुलवादी और लोकतांत्रिक ताने-बाने की रक्षा करने में सक्षम है।
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