UP: भदोही में 15 वर्षीय दलित किशोरी से दुष्कर्म के दोषी को 20 साल की जेल, 50 हजार का जुर्माना

'ऑपरेशन कनविक्शन' के तहत भदोही कोर्ट का बड़ा फैसला, नाबालिग का अपहरण कर मुंबई में किया था दुष्कर्म, दोषी पर 50 हजार का जुर्माना भी लगा।
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कोर्ट/अदालत Internet
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उत्तर प्रदेश: भदोही जिले की एक अदालत ने महिला और बाल अपराधों के खिलाफ चल रहे 'ऑपरेशन कनविक्शन' के तहत एक बड़ा और कड़ा फैसला सुनाया है। गुरुवार को कोर्ट ने 15 वर्षीय एक दलित किशोरी के साथ दुष्कर्म करने के मामले में 22 वर्षीय युवक को दोषी करार देते हुए 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई।

ज्ञानपुर (भदोही) स्थित पॉक्सो (POCSO) मामलों के विशेष न्यायाधीश दुर्गेश की अदालत ने यह अहम फैसला दिया। अदालत ने दोषी को पॉक्सो एक्ट की धारा 3/4(2) और भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 376(3) के तहत अपराधी माना है। जेल की सजा के साथ-साथ उस पर 50,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माना अदा न करने की स्थिति में उसे छह महीने अतिरिक्त जेल की सजा काटनी होगी।

इस घटना की शुरुआत 12 अप्रैल 2024 को हुई थी। पीड़िता अपनी मां को बताकर घर का कुछ घरेलू सामान लेने निकली थी, लेकिन वापस नहीं लौटी। इसके बाद घबराई हुई मां की शिकायत पर पुलिस ने 17 अप्रैल 2024 को एफआईआर दर्ज की। अपनी शिकायत में मां ने भदोही के ही रहने वाले अखिलेश यादव नाम के युवक पर गंभीर आरोप लगाए थे।

एफआईआर के मुताबिक, अखिलेश यादव ने किशोरी का अपहरण किया और उसे अपने साथ मुंबई ले जाकर उसके साथ दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया। करीब छह से सात दिनों तक उसे अपने चंगुल में रखने के बाद आरोपी ने उसे हंडिया इलाके में अकेला छोड़ दिया। इसके बाद बदहवास हालत में पीड़िता किसी तरह अपने घर वापस पहुंची।

आरोपी अखिलेश यादव गोपीगंज थाना क्षेत्र के जगनंदनपट्टी (किशुनदेवपुर) गांव का निवासी है। पुलिस ने उसके खिलाफ आईपीसी, पॉक्सो एक्ट और एससी/एसटी (SC/ST) एक्ट की संबंधित और गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार किया था।

अदालत में अभियोजन पक्ष के वकील एडीजीसी (ADGC) धीरज शुक्ला ने पीड़ित पक्ष की ओर से मजबूती से दलीलें रखीं। उन्होंने कोर्ट के सामने पीड़िता की जन्मतिथि का रिकॉर्ड, मेडिकल रिपोर्ट और आरोपी के साथ पीड़िता की मुंबई तक की लोकेशन से जुड़े पुख्ता तकनीकी सबूत पेश किए। इन सबूतों के आधार पर उन्होंने दोषी के लिए सख्त से सख्त सजा की मांग की।

इस मामले में पुलिस की वैज्ञानिक जांच और सटीक साक्ष्य संकलन ने भी अहम भूमिका निभाई। समय पर अदालत में चार्जशीट दाखिल होने के कारण ही प्रभावी पैरवी सुनिश्चित हो सकी और आखिरकार पीड़िता को त्वरित न्याय मिला।

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