महिला आरक्षण की समयसीमा पर कांग्रेस में उभरे मतभेद, राहुल गांधी ने OBC नेताओं से लिखित में मांगा जवाब

कांग्रेस पार्टी में महिला आरक्षण कानून लागू करने की समयसीमा को लेकर अलग-अलग सुर उठने लगे हैं। ओबीसी नेताओं ने 'कोटे के भीतर कोटा' और जातिगत जनगणना की शर्त रखी है, जिस पर राहुल गांधी ने उनसे लिखित में अपना पक्ष नेतृत्व को सौंपने को कहा है।
Rahul Gandhi
विपक्ष के नेता राहुल गांधी(IANS)
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नई दिल्ली: लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू करने की समयसीमा को लेकर कांग्रेस पार्टी के भीतर मतभेद सामने आने लगे हैं। इन अलग-अलग सुरों को देखते हुए लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पार्टी के ओबीसी (OBC) नेताओं को अपनी राय लिखित रूप में देने का सुझाव दिया है।

कांग्रेस की ओबीसी विंग की राष्ट्रीय सलाहकार परिषद की एक बंद कमरे में हुई बैठक के दौरान यह मुद्दा गरमाया। इस बैठक में कई ओबीसी नेताओं ने यह पुरजोर मांग रखी कि महिला आरक्षण कानून के तहत ओबीसी महिलाओं के लिए कोटे के भीतर अलग से कोटा निर्धारित होना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इसे वर्तमान जनगणना के हिस्से के रूप में जातिगत जनगणना पूरी होने के बाद ही लागू किया जाना चाहिए।

बैठक में शामिल एक वरिष्ठ सदस्य ने जानकारी दी कि राहुल गांधी ने ओबीसी नेताओं की चिंताओं पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने नेताओं से कहा कि यदि उनके विचार पार्टी के आधिकारिक रुख से अलग हैं, तो उन्हें अपने मत को औपचारिक रूप देते हुए पार्टी नेतृत्व को एक पत्र भेजना चाहिए। इसके बाद इस मुद्दे को कांग्रेस कार्य समिति (CWC) की बैठक में चर्चा के लिए उठाया जा सकता है।

कांग्रेस के ओबीसी नेताओं का यह मौजूदा रुख पार्टी की उस आधिकारिक लाइन से बिल्कुल अलग है, जिसमें महिला आरक्षण कानून को तुरंत लागू करने की वकालत की जा रही है। इसी आधिकारिक स्टैंड के तहत बुधवार, 22 अप्रैल 2026 को अखिल भारतीय महिला कांग्रेस ने एक देशव्यापी पोस्टकार्ड अभियान की घोषणा की है। इस अभियान के जरिए प्रधानमंत्री को 10 लाख पोस्टकार्ड भेजकर उनसे जुलाई तक इस कानून को अमलीजामा पहनाने का आग्रह किया जाएगा।

इस वैचारिक भिन्नता पर ओबीसी नेता सुभाषिनी यादव ने अपना पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि ओबीसी परिषद ने 'कोटे के भीतर कोटा' देने का प्रस्ताव पारित कर लिया है। उनका स्पष्ट रूप से मानना है कि सबसे पहले जातिगत जनगणना होनी चाहिए, उसके बाद परिसीमन का काम हो और फिर अंत में आरक्षण विधेयक लाया जाना चाहिए।

सुभाषिनी यादव ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि महिलाओं को आम बोलचाल में 'आधी आबादी' कहा जाता है, लेकिन अगर ठीक से सिरों की गिनती की जाए, तो यह संख्या आधे से अधिक भी हो सकती है। उनका तर्क है कि ऐसी स्थिति में महिलाओं को 33 प्रतिशत से भी अधिक आरक्षण देना पड़ सकता है। उन्होंने यह भी साफ किया कि इस संबंध में कांग्रेस अध्यक्ष, राहुल गांधी और पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं को आधिकारिक तौर पर पत्र लिखा जाएगा।

इस महत्वपूर्ण बैठक में राहुल गांधी के अलावा पार्टी के कई अन्य दिग्गज भी मौजूद थे। विचार-विमर्श में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और भूपेश बघेल के साथ-साथ सचिन पायलट और श्रीनिवास बी.वी. जैसे प्रमुख युवा नेताओं ने भी हिस्सा लिया।

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