
भोपाल। केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर कांग्रेस द्वारा निकाले गए विरोध जुलूस पर मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। शनिवार रात इंदौर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस की पूरी राजनीति अवसरवाद पर आधारित है और जिस छात्र आंदोलन का हवाला देकर वह अपनी भूमिका बताने की कोशिश कर रही है, उसमें उसका कोई वास्तविक योगदान नहीं था। विजयवर्गीय ने कहा कि आंदोलन छात्रों ने किया, पुलिस की कार्रवाई भी हुई, लेकिन बाद में कांग्रेस केवल राजनीतिक लाभ लेने के उद्देश्य से मैदान में उतर आई। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह हर जनभावना वाले मुद्दे को अपने राजनीतिक हितों के लिए इस्तेमाल करने का प्रयास करती है।
कैलाश विजयवर्गीय ने कांग्रेस पर कटाक्ष करते हुए कहा कि यदि पड़ोसी के घर बच्चा पैदा हो जाए और कांग्रेस ढोल बजाने लगे, तो इससे यह साबित नहीं हो जाता कि उस घटना में उसकी कोई भूमिका थी। उन्होंने कहा कि जिस आंदोलन का जिक्र किया जा रहा है, उसमें छात्रों ने अपनी मांगों को लेकर संघर्ष किया, लेकिन कांग्रेस बाद में उसमें शामिल होकर उसे अपना आंदोलन बताने की कोशिश कर रही है। उनके अनुसार यह कांग्रेस की पुरानी राजनीतिक शैली है, जिसमें वह पहले से चल रहे आंदोलनों और जनभावनाओं को अपने पक्ष में भुनाने का प्रयास करती है।
उन्होंने कहा कि बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद विपक्ष पूरी तरह निराश हो चुका था और उसे इस पूरे घटनाक्रम में राजनीति करने का एक नया अवसर दिखाई दिया। विजयवर्गीय के अनुसार कांग्रेस और विपक्ष के अन्य दलों ने छात्र आंदोलन को राजनीतिक रंग देने का प्रयास किया, जबकि इस पूरे घटनाक्रम में उनका कोई प्रत्यक्ष योगदान नहीं था। उन्होंने कहा कि कांग्रेस जनता के मुद्दों पर गंभीरता से काम करने के बजाय केवल राजनीतिक अवसर तलाशने में लगी रहती है।
राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए विजयवर्गीय ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का भी बचाव किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को आरएसएस पर टिप्पणी करने से पहले उसके कार्य और योगदान को समझना चाहिए। उनके अनुसार यदि आरएसएस जैसी संस्था नहीं होती तो आज देश की स्थिति क्या होती, इसकी कल्पना मात्र से रोंगटे खड़े हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि देश में जो अनुशासन, संगठन क्षमता और राष्ट्रहित की भावना दिखाई देती है, उसके पीछे आरएसएस के स्वयंसेवकों की वर्षों की मेहनत और समर्पण है। विजयवर्गीय ने कहा कि आरएसएस ने समाज और राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और उसके योगदान को राजनीतिक चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और उनकी कार्यशैली की चर्चा करते हुए विजयवर्गीय ने कहा कि वे उन्हें विद्यार्थी परिषद के समय से जानते हैं। उन्होंने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान एक अनुशासित, समर्पित और जिम्मेदार कार्यकर्ता हैं, जो संगठन को हमेशा स्वयं से ऊपर रखते हैं। उनके अनुसार प्रधान जिस भी जिम्मेदारी को संभालते हैं, उसे पूरी ईमानदारी, निष्ठा और अनुशासन के साथ निभाते हैं। विजयवर्गीय ने दावा किया कि आंदोलन शुरू होने के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने स्वयं पार्टी नेतृत्व से कहा था कि यदि संगठन उचित समझे तो वे इस्तीफा देने के लिए तैयार हैं। बाद में पार्टी के सामूहिक निर्णय के आधार पर उन्होंने अपना इस्तीफा दिया। विजयवर्गीय ने कहा कि यही एक सच्चे कार्यकर्ता की पहचान होती है कि वह पद से अधिक संगठन और देश के हित को महत्व देता है।
मंत्री विजयवर्गीय ने यह भी दावा किया कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से उन विदेशी ताकतों की साजिशें विफल हो गईं, जो भारत में हिंसा और अस्थिरता का माहौल पैदा करना चाहती थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ विदेशी शक्तियां भारत में बांग्लादेश और श्रीलंका जैसी परिस्थितियां बनाने का प्रयास कर रही थीं, लेकिन धर्मेंद्र प्रधान के इस कदम से उनके मंसूबों पर पानी फिर गया। विजयवर्गीय ने कहा कि प्रधान ने संगठन और देशहित को प्राथमिकता देकर उन सभी ताकतों की योजनाओं को नाकाम कर दिया और इसके लिए वे बधाई के पात्र हैं।
इस दौरान विजयवर्गीय ने एक बार फिर कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्ष को जनहित के मुद्दों पर सकारात्मक राजनीति करनी चाहिए, लेकिन वह हर मुद्दे में केवल राजनीतिक लाभ तलाशता है। उन्होंने कहा कि देश की राजनीति में संगठन, अनुशासन और राष्ट्रहित सर्वोपरि होना चाहिए और धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा उसी भावना का उदाहरण है।
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