
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के भीतर टिकट बंटवारे को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। दैनिक भास्कर के एक खुफिया स्टिंग ऑपरेशन में पार्टी के शीर्ष पदाधिकारी खुलेआम करोड़ों रुपये में चुनाव लड़ने का टिकट बेचते हुए कैमरे में कैद हुए हैं। इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद राज्य के राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, पार्टी प्रमुख मायावती से महज एक मुलाकात करने की कीमत 5 लाख रुपये तय की गई है। वहीं, लखनऊ की बख्शी का तालाब (बीकेटी) विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने के लिए 3 करोड़ 35 लाख रुपये की भारी-भरकम रकम की मांग की गई। इस खुलासे के तुरंत बाद 19 जून 2026 को बसपा प्रमुख मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर आकर इस पूरी घटना को विरोधियों की साजिश करार दिया है।
स्टिंग ऑपरेशन की शुरुआत लखनऊ के बसपा जिलाध्यक्ष शैलेंद्र गौतम से हुई। छुपे हुए कैमरे पर शैलेंद्र गौतम ने स्पष्ट रूप से बताया कि उम्मीदवार की हैसियत से मायावती से मिलने के लिए 5 लाख रुपये नकद लेकर जाना होगा। यह रकम एक लिफाफे में सीधे 'बहनजी' की टेबल पर रखनी होती है, जिसे एक गिफ्ट माना जाता है और इसका कोई हिसाब-किताब नहीं होता।
शैलेंद्र गौतम ने टिकट की पूरी प्रक्रिया समझाते हुए बताया कि बीकेटी सीट के लिए कुल 3 करोड़ 35 लाख रुपये चुकाने होंगे। इसमें से एक-डेढ़ करोड़ रुपये तुरंत जमा करने होंगे, जबकि बाकी रकम चुकाने के लिए एक से डेढ़ महीने का समय दिया जाएगा। उन्होंने यह भी साफ किया कि पार्टी को उम्मीदवार के राजनीतिक अनुभव से कोई खास मतलब नहीं है, उनकी नजर सिर्फ इस बात पर होती है कि दावेदार पर कोई आपराधिक मुकदमा तो नहीं है।
इस सौदेबाजी की पुष्टि खुद बसपा के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल ने भी की। लखनऊ के 1090 चौराहे के पास स्थित अपने निजी कार्यालय में विश्वनाथ पाल ने रिपोर्टर को बताया कि अगर पार्टी की सरकार बनती है, तो मंत्री बनाने की पूरी गारंटी दी जाएगी। उन्होंने यह भी खुलासा किया कि बिना टिकट की दावेदारी के, मायावती से सामान्य मुलाकात के लिए भी 2 लाख रुपये का रेट अलग से तय है।
विश्वनाथ पाल ने स्टिंग में यह भी बताया कि आजमगढ़ के दीदारगंज, जौनपुर के मुंगरा बादशाहपुर और शाहगंज, जालौन के माधोगढ़ तथा सहारनपुर देहात जैसी सीटों पर प्रत्याशियों की घोषणा उसी आधार पर की गई है, जहां से पैसा आ चुका है। पार्टी फिलहाल कानपुर मंडल की 10 सीटों पर प्रभारी घोषित करने और 40 से 50 सीटों पर ब्राह्मण उम्मीदवार उतारने की विशेष चुनावी रणनीति पर काम कर रही है।
दैनिक भास्कर की इस रिपोर्ट के प्रकाशित होने के बाद, मायावती ने अपने बचाव में एक विस्तृत बयान जारी किया। उन्होंने कहा कि बसपा दूसरी पार्टियों की तरह बड़े-बड़े पूंजीपतियों के इशारे पर नहीं, बल्कि अपने लोगों के तन, मन और धन के बलबूते चलती है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव नजदीक आते देख संकीर्ण और जातिवादी ताकतें 'आयरन लेडी' नेतृत्व को बदनाम करने के लिए मीडिया का इस्तेमाल कर रही हैं।
मायावती ने स्टिंग में पकड़े गए नेताओं का बचाव करते हुए एक अनोखा तर्क पेश किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल और अन्य पदाधिकारी केवल उम्मीदवारों की सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक हैसियत परख रहे थे। पार्टी प्रमुख के अनुसार, करोड़ों रुपये की यह बातचीत उम्मीदवारों की वफादारी और टिकाऊपन जांचने के लिए कोर्ट की जिरह जैसा एक सख्त 'स्क्रीनिंग' तरीका मात्र है।
बसपा प्रमुख ने स्पष्ट किया कि पार्टी को जो भी आर्थिक सहयोग मिलता है, वह उम्मीदवार की जीत सुनिश्चित करने के लिए कानूनी तौर पर खर्च किया जाता है। उन्होंने मीडिया और कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे इन कड़े सवालों को उनके 'फेस वैल्यू' पर न लें। मायावती ने कार्यकर्ताओं से विरोधियों के षड्यंत्र का शिकार हुए बिना 'मिशन 2027' की तैयारी में पूरे जी-जान से जुटे रहने का आह्वान किया है।
गौरतलब है कि 14 अप्रैल 1984 को कांशीराम द्वारा स्थापित बहुजन समाज पार्टी के जनाधार में हाल के वर्षों में भारी गिरावट आई है। वर्ष 2007 के विधानसभा चुनाव में 30 प्रतिशत वोट शेयर हासिल करने वाली बसपा, 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव में मात्र 12.9 प्रतिशत वोट और केवल 1 सीट तक सिमट कर रह गई है। ऐसे में यह नया 'कैश फॉर टिकट' विवाद पार्टी के आगामी चुनावी सफर को और भी ज्यादा चुनौतीपूर्ण बना सकता है।
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