मुंबई: स्टूडेंट्स इस्लामिक ऑर्गनाइज़ेशन ऑफ़ इंडिया (SIO), महाराष्ट्र साउथ ज़ोन ने राज्य सरकार को आगामी बजट 2026-27 के लिए अपनी सिफारिशें सौंप दी हैं। संगठन ने शिक्षा क्षेत्र में बड़े बदलावों की वकालत करते हुए सरकार से मांग की है कि राज्य के कुल बजट का कम से कम 20% हिस्सा शिक्षा पर खर्च किया जाए। SIO का कहना है कि यह कदम संवैधानिक मूल्यों और समावेशी विकास को सुनिश्चित करने के लिए बेहद जरूरी है।
मुस्लिम समुदाय के विकास में कमी
रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया है कि महाराष्ट्र के तेज आर्थिक विकास के बावजूद मुस्लिम समुदाय के लिए खर्च के पैटर्न में समानता नहीं है। सच्चर, कुंडू और महमूद-उर-रहमान कमेटियों के आंकड़ों का हवाला देते हुए रिपोर्ट में बताया गया है कि मुस्लिम समुदाय अक्सर प्रमुख 'ह्यूमन डेवलपमेंट इंडिकेटर्स' में अनुसूचित जातियों (SCs) और अनुसूचित जनजातियों (STs) से भी पीछे है, विशेषकर शहरी और पिछड़े जिलों में।
शिक्षा की स्थिति: उर्दू मीडियम स्कूलों में बड़ा अंतर
SIO की रिपोर्ट ने उर्दू और मराठी मीडियम स्कूलों के बीच एक बड़ी खाई को उजागर किया है:
ड्रॉपआउट दर: आंकड़ों के मुताबिक, उर्दू मीडियम स्कूलों में हर 100 में से सिर्फ 10 छात्र ही हायर सेकेंडरी सर्टिफिकेट (HSC) लेवल तक पहुंच पाते हैं, जबकि मराठी मीडियम स्कूलों में यह आंकड़ा 27 है।
बुनियादी सुविधाएं: राज्य के 9.1% स्कूलों में लड़कों के लिए और 6.9% स्कूलों में लड़कियों के लिए शौचालय नहीं हैं।
शिक्षकों की कमी: ठाणे जैसे इलाकों में स्टूडेंट-टीचर रेश्यो 45:1 तक पहुंच गया है। संगठन ने मांग की है कि शिक्षकों की तुरंत भर्ती की जाए और कॉन्ट्रैक्ट पर काम कर रहे शिक्षकों को रेगुलर किया जाए।
डिजिटल गैप और आधुनिकीकरण
शिक्षा में डिजिटल संसाधनों की कमी को भी प्रमुखता से उठाया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, केवल 7% उर्दू मीडियम स्कूलों में कंप्यूटर लैब हैं और कंप्यूटर-टू-स्टूडेंट रेश्यो 81:1 है। SIO ने स्मार्ट क्लासरूम और AI-पावर्ड लर्निंग टूल्स के लिए विशेष फंड आवंटित करने की मांग की है।
उच्च शिक्षा और स्कॉलरशिप पर सुझाव
माध्यमिक और उच्च शिक्षा में सुधार के लिए SIO ने निम्नलिखित सुझाव दिए हैं:
RTE का विस्तार: राइट टू एजुकेशन (RTE) एक्ट का दायरा 18 साल तक बढ़ाया जाए।
नया विश्वविद्यालय: जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए महाराष्ट्र में एक सेंट्रल यूनिवर्सिटी और एक हायर एजुकेशन रेगुलेटरी अथॉरिटी का गठन हो।
स्कॉलरशिप: MANF और प्री-मैट्रिक स्कॉलरशिप बंद होने से जो आर्थिक गैप आया है, उसे भरने के लिए राज्य सरकार स्कॉलरशिप का बजट बढ़ाए।
शहरी कल्याण और सामाजिक न्याय
क्लासरूम के बाहर भी सुधार की आवश्यकता बताते हुए, SIO ने अल्पसंख्यक बाहुल्य क्षेत्रों में पब्लिक पार्क, लाइब्रेरी, स्टूडेंट सेंटर और बेहतर वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम विकसित करने का प्रस्ताव रखा है।
इस अवसर पर SIO साउथ महाराष्ट्र के अध्यक्ष उज़ैर अहमद रंगरेज़ ने कहा, “2026-27 का बजट लंबे समय से चले आ रहे क्षेत्रीय और सामाजिक असंतुलन को ठीक करने का एक अहम मौका है। हम सिर्फ़ फंडिंग नहीं मांग रहे हैं, हम सामाजिक न्याय के लिए एक रोडमैप मांग रहे हैं। इन सुझावों को प्राथमिकता देकर, सरकार यह सुनिश्चित कर सकती है कि हर नागरिक ‘महाराष्ट्र डेवलपमेंट एजेंडा’ में शामिल हो।”
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