महाराष्ट्र में मुस्लिम समुदाय के लिए बड़ा झटका! 5% आरक्षण रद्द, पुराने सभी अध्यादेश और सर्कुलर निरस्त, पूरी खबर

मुस्लिम समुदाय के सामाजिक-आर्थिक रूप से पिछड़े तबके, जो शिक्षा और रोजगार में मुख्यधारा से जुड़ने के लिए इस आरक्षण पर निर्भर थे, अब और अधिक चुनौतियों का सामना करेंगे। इससे सामाजिक असमानता बढ़ने की आशंका है।
 यह फैसला राज्य में मुस्लिम समुदाय के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि इससे शिक्षा और सरकारी नौकरियों में आरक्षण का लाभ पूरी तरह समाप्त हो गया है।
यह फैसला राज्य में मुस्लिम समुदाय के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि इससे शिक्षा और सरकारी नौकरियों में आरक्षण का लाभ पूरी तरह समाप्त हो गया है।सांकेतिक चित्र: द मिल्ली गजट
Published on

मुंबई – महाराष्ट्र सरकार ने मुस्लिम समुदाय के सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों को दिए गए 5% आरक्षण (SBC-A के तहत) से जुड़े सभी पुराने सरकारी फैसलों को आधिकारिक तौर पर रद्द कर दिया है। सामाजिक न्याय एवं विशेष सहाय्य विभाग ने 17 फरवरी को जारी एक शासन निर्णय में स्पष्ट किया है कि 2014 के अध्यादेश के आधार पर जारी किए गए शासन निर्णय, परिपत्रक और संबंधित प्रक्रियाएं अब रद्द हैं। यह फैसला राज्य में मुस्लिम समुदाय के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि इससे शिक्षा और सरकारी नौकरियों में आरक्षण का लाभ पूरी तरह समाप्त हो गया है।

2014 का अध्यादेश और उसकी कानूनी स्थिति

यह पूरा मामला 9 जुलाई 2014 को जारी महाराष्ट्र अध्यादेश क्रमांक 14 से शुरू होता है। उस समय की सरकार ने सामाजिक और शैक्षणिक रूप से मागास मुस्लिम समूहों को 'विशेष मागास प्रवर्ग-अ' (SBC-A) श्रेणी में रखते हुए शिक्षा संस्थानों में प्रवेश और सरकारी/निमशासकीय नौकरियों में 5% आरक्षण प्रदान किया था। अल्पसंख्यक विकास विभाग और सामाजिक न्याय विभाग ने इसके आधार पर जाति प्रमाणपत्र और जाति वैधता प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया शुरू की थी।

हालांकि इस अध्यादेश के खिलाफ बॉम्बे हाई कोर्ट में रिट याचिका (2053/2014) दाखिल की गई थी। कोर्ट ने 14 नवंबर 2014 को सरकारी नौकरियों में 5% आरक्षण पर स्टे लगा दी। इसके अलावा अध्यादेश को 23 दिसंबर 2014 तक विधानमंडल में विधेयक के रूप में पेश नहीं किया गया, जिसके कारण वह स्वतः लैप्स हो गया। इससे जुड़े सभी शासन निर्णय और परिपत्रक भी कानूनी रूप से अमान्य हो गए थे।

12 साल बाद अब महाराष्ट्र सरकार ने इस कानूनी स्थिति को औपचारिक रूप से मान्यता देते हुए 22 जुलाई 2014 और 28 अगस्त 2014 के शासन निर्णयों तथा संबंधित परिपत्रकों को रद्द कर दिया है। शासन निर्णय में स्पष्ट कहा गया है कि अध्यादेश लैप्स होने के कारण ये दस्तावेज अब लागू नहीं रहेंगे।

अब शिक्षा-नौकरी में कोई लाभ नहीं, लाखों प्रभावित

फैसले का क्या प्रभाव पड़ेगा?

यह निर्णय मुस्लिम समुदाय के लाखों युवाओं और परिवारों पर गहरा असर डालेगा:

आरक्षण का लाभ समाप्त: शिक्षा (प्रवेश) और सरकारी नौकरियों में 5% आरक्षण अब पूरी तरह खत्म हो गया है। कोई नया आवेदन इस श्रेणी के तहत स्वीकार नहीं किया जाएगा।

जाति प्रमाणपत्र की प्रक्रिया बंद: SBC-A श्रेणी के तहत मुस्लिम समुदाय के लिए जाति प्रमाणपत्र और जाति वैधता प्रमाणपत्र जारी करने की पूरी प्रक्रिया तत्काल प्रभाव से रोक दी गई है। पहले जारी प्रमाणपत्रों की वैधता पर भी सवाल उठ सकते हैं, हालांकि सरकार ने स्पष्ट रूप से केवल पुराने GR रद्द किए हैं।

पिछड़े वर्गों पर प्रतिकूल प्रभाव: मुस्लिम समुदाय के सामाजिक-आर्थिक रूप से पिछड़े तबके, जो शिक्षा और रोजगार में मुख्यधारा से जुड़ने के लिए इस आरक्षण पर निर्भर थे, अब और अधिक चुनौतियों का सामना करेंगे। इससे सामाजिक असमानता बढ़ने की आशंका है।

कानूनी और राजनीतिक विवाद: हालांकि यह फैसला पुराने अध्यादेश की व्यपगत स्थिति पर आधारित है, विपक्षी दल जैसे कांग्रेस ने इसे 'मुस्लिम समुदाय के अधिकारों पर हमला' करार देते हुए कड़ी निंदा की है। कांग्रेस ने कहा है कि सरकार 'सबका साथ, सबका विकास' का नारा देती है, लेकिन पिछड़े वर्गों के लिए रास्ते बंद कर रही है।

सरकारी अधिकारी स्पष्ट कर रहे हैं कि यह कोई नया नीतिगत बदलाव नहीं है, बल्कि 2014 की कानूनी स्थिति को औपचारिक रूप से लागू करने वाला प्रशासकीय सुधार है। अध्यादेश कभी कानून नहीं बन सका और कोर्ट के स्टे के बाद आरक्षण कभी पूरी तरह लागू नहीं हुआ था।

मुम्बई नार्थ सेन्ट्रल की सांसद वर्षा एकनाथ गायकवाड ने अपने x अकाउंट से इस आदेश की निंदा की है, उन्होंने लिखा: " हम इस फ़ैसले की कड़ी निंदा करते हैं, 2014 में घोषित शिक्षा और नौकरियों के लिए 5% रिज़र्वेशन के बारे में पॉज़िटिव कदम उठाने के बजाय, सरकार ने पुराने प्रोसेस को कैंसिल कर दिया है। सरकार ने हाई कोर्ट के अंतरिम स्टे और ऑर्डिनेंस के खत्म होने का हवाला देकर मुस्लिम समुदाय के अधिकारों पर हमला किया है। क्या एक तरफ 'सबका साथ, सबका विकास' कहना और दूसरी तरफ रिज़र्वेशन के लिए ज़रूरी डॉक्यूमेंट्स पाने के रास्ते बंद करना दोगलापन नहीं है? भले ही बॉम्बे हाई कोर्ट ने शिक्षा में मुस्लिम समुदाय के लिए 5% रिज़र्वेशन को मंज़ूरी दे दी है, लेकिन इसे आज तक महाराष्ट्र में लागू नहीं किया गया है। कोर्ट से मंज़ूर आरक्षण को लागू करने में सरकार की नाकामी लोकतंत्र के लिए खतरनाक है।

समाज के पिछड़े तबकों को मुख्यधारा में लाने के बजाय, इस सरकार ने उन्हें वापस अंधेरे में धकेल दिया है।"

 यह फैसला राज्य में मुस्लिम समुदाय के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि इससे शिक्षा और सरकारी नौकरियों में आरक्षण का लाभ पूरी तरह समाप्त हो गया है।
World Watch List 2026: ईसाइयों पर अत्याचार के टॉप 50 देशों में भारत 12वें पायदान पर! Open Doors की चिंताजनक रिपोर्ट क्या कहती है?
 यह फैसला राज्य में मुस्लिम समुदाय के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि इससे शिक्षा और सरकारी नौकरियों में आरक्षण का लाभ पूरी तरह समाप्त हो गया है।
प्राइवेट प्रॉपर्टी में नमाज करने से रोकने वाले डीएम और एसएसपी को इलाहाबाद हाईकोर्ट का अवमानना नोटिस, पूरा मामला

द मूकनायक की प्रीमियम और चुनिंदा खबरें अब द मूकनायक के न्यूज़ एप्प पर पढ़ें। Google Play Store से न्यूज़ एप्प इंस्टाल करने के लिए यहां क्लिक करें.

The Mooknayak - आवाज़ आपकी
www.themooknayak.com