
लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार ने कामगारों के हित में एक बड़ा कदम उठाते हुए उनकी न्यूनतम मजदूरी में अंतरिम वृद्धि की सिफारिश की है। इस फैसले का लाभ 74 विभिन्न श्रेणियों के श्रमिकों को मिलेगा। इनमें निजी पुस्तकालयों, कोचिंग सेंटरों, फार्मेसी, नर्सिंग होम और क्लबों में काम करने वाले लोग मुख्य रूप से शामिल हैं। इसके साथ ही ईंट भट्ठों, घरेलू कामगार मुहैया कराने वाली एजेंसियों और पेट्रोल पंपों पर कार्यरत कर्मचारियों को भी इस वेतन वृद्धि के दायरे में लाया गया है।
श्रम विभाग के सूत्रों के अनुसार, इस कदम का उद्देश्य राज्य के विविध क्षेत्रों में काम कर रहे मजदूरों को व्यापक स्तर पर राहत पहुंचाना है। इस फैसले से व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और कारखानों में काम करने वाले लोगों को सीधा फायदा होगा। इसके अलावा एरेटेड पेय निर्माण इकाइयों, टिन प्रिंटिंग प्रेस, फर्नीचर बनाने वाले कारखानों और कपड़ा बुनाई के काम से जुड़े श्रमिकों को भी इसके अंतर्गत कवर किया जाएगा।
इस वृद्धि के लाभार्थियों की सूची में विनिर्माण गतिविधियों से जुड़े कई अन्य कामगार भी शामिल हैं। रबर और प्लास्टिक उत्पाद, कांच, सीमेंट का सामान और मेटल फैब्रिकेशन के क्षेत्र में काम करने वाले मजदूरों को इसका लाभ दिया जाएगा। इसके साथ ही गारमेंट्स, हथकरघा, जरी वर्क, बेकरी, बिस्किट इकाइयों, कागज व कार्डबोर्ड उद्योगों और छोटी इंजीनियरिंग इकाइयों के कर्मचारी भी इस नई व्यवस्था के तहत आएंगे।
सरकार ने कृषि आधारित उद्योगों को भी इस फैसले के दायरे में रखा है। राइस मिलों, आटा मिलों, तेल मिलों और डेयरी इकाइयों में अपनी सेवाएं दे रहे कर्मचारियों की मजदूरी में भी इस अंतरिम संशोधन के तहत सीधा इजाफा किया जाएगा।
निर्माण और बुनियादी ढांचे के विकास से जुड़े श्रमिकों के लिए भी यह एक बड़ी राहत की खबर है। सड़क निर्माण, सिंचाई परियोजनाओं, तालाब की खुदाई और पत्थर तोड़ने (स्टोन क्रशिंग) के काम में लगे मजदूरों को भी इस संशोधित न्यूनतम मजदूरी का पूरा लाभ मिलेगा।
इसके अतिरिक्त, यह नया आदेश परिवहन और यांत्रिक सेवाओं के क्षेत्र में भी पूरी तरह लागू होगा। ऑटोमोबाइल मरम्मत कार्यशालाओं, ट्रांसपोर्ट कंपनियों और लॉजिस्टिक्स संचालन के काम से जुड़े कर्मचारी भी इस वेतन वृद्धि के हकदार होंगे।
इस न्यूनतम मजदूरी संशोधन में सेवा क्षेत्र का एक बहुत बड़ा हिस्सा शामिल किया गया है। नई अधिसूचना के जरिए अनौपचारिक और सहायक सेवाओं में लगे भारी संख्या में कामगारों को फायदा पहुंचने की उम्मीद है। इनमें बढ़ईगिरी, सिलाई, कपड़े रंगने का काम, हाउसकीपिंग, साफ-सफाई और निजी सुरक्षा सेवाओं में तैनात कर्मचारी शामिल हैं।
विभागीय जानकारों का कहना है कि मजदूरी में इस अंतरिम संशोधन का मुख्य इरादा बढ़ती महंगाई और जीवन यापन की लागत के बीच कामगारों को आर्थिक रूप से संबल प्रदान करना है। इस पहल के जरिए पारंपरिक उद्योगों के साथ-साथ उभरते हुए नए सेवा क्षेत्रों को भी शामिल करने का प्रयास किया गया है, ताकि राज्य के कार्यबल के एक विशाल स्पेक्ट्रम को इसका फायदा मिल सके।
इस बीच, कानून-व्यवस्था और जमीनी स्थिति पर पैनी नजर रखने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों ने गौतम बुद्ध नगर में डेरा डाल रखा है। प्रशासन का कहना है कि वेतन संशोधन को प्रभावी ढंग से लागू करने के साथ-साथ इलाके में शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
राज्य सरकार के आधिकारिक फैसले के अनुसार, न्यूनतम मजदूरी में यह अंतरिम वृद्धि 1 अप्रैल से प्रभावी मानी जाएगी। इसके सुचारू कार्यान्वयन को लेकर जल्द ही एक आधिकारिक आदेश जारी किया जाएगा, जिसमें इससे जुड़े सभी विस्तृत दिशा-निर्देश स्पष्ट किए जाएंगे।
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