उत्तर प्रदेश: नोएडा के औद्योगिक क्षेत्र में सोमवार को दर्जनों फैक्ट्रियों के हजारों मजदूरों ने बेहतर वेतन और कामकाज की स्थितियों की मांग को लेकर उग्र प्रदर्शन किया। इस दौरान कामगारों ने भारी पथराव किया, वाहनों में तोड़फोड़ की और कई गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया।
यह हिंसक घटना शुक्रवार से फैक्ट्रियों में सुलग रहे तनाव का सीधा नतीजा है। पिछले कुछ महीनों में उत्तर भारत के कम से कम चार अन्य शहरों में भी इसी तरह के मजदूर आंदोलन देखे गए हैं, और नोएडा का यह बवाल उसी कड़ी का ताज़ा हिस्सा बताया जा रहा है।
ठेका मजदूरों द्वारा दो दिनों तक दिए गए धरने के बाद, उत्तर प्रदेश सरकार ने शनिवार को उनके कल्याण के लिए कई अहम कदमों की घोषणा की थी। इन उपायों में अनिवार्य रूप से दोगुना ओवरटाइम वेतन और समय पर पगार देना शामिल था।
इसके अगले ही दिन रविवार को गौतम बुद्ध नगर की जिलाधिकारी मेधा रूपम ने औद्योगिक इकाइयों के प्रतिनिधियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। उन्होंने प्रबंधन को मजदूरों के अधिकारों की रक्षा के लिए आवश्यक और त्वरित कदम उठाने के निर्देश दिए थे।
पुलिस प्रशासन का कहना है कि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि सोमवार को मजदूर अचानक इतने हिंसक क्यों हो गए। यूपी के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) राजीव कृष्ण ने बताया कि हिंसा में शामिल उकसाने वाले और बाहरी तत्वों की पहचान की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि शिनाख्त होने के बाद ऐसे लोगों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
मुजफ्फरनगर में एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मजदूरों के प्रति अपना समर्थन जताया। हालांकि, उन्होंने कामगारों से अपील की कि वे उन लोगों से सावधान रहें जो जानबूझकर अशांति फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। सीएम ने फैक्ट्री मालिकों से भी प्रदर्शनकारियों के साथ बातचीत की मेज पर आने को कहा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जब राज्य विकास और शांति की ओर तेजी से बढ़ रहा है, तब कुछ लोग अशांति फैलाने की गहरी साजिश रच रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि औद्योगिक अस्थिरता पैदा करने वालों से सतर्क रहने की जरूरत है और उनके मंसूबों को किसी भी हाल में सफल नहीं होने देना चाहिए।
बेहतर औद्योगिक संबंधों की वकालत करते हुए सीएम योगी ने सभी उद्यमियों से मजदूरों के साथ सीधा संवाद बनाए रखने की अपील की। उन्होंने आश्वासन दिया कि उनकी सरकार मजदूरों के साथ मजबूती से खड़ी है, जो उद्यमियों को सुरक्षा और मजदूरों को संरक्षण देने के साथ-साथ उचित वेतन भी सुनिश्चित करेगी।
सोमवार शाम एक सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि यूपी श्रम विभाग द्वारा इस विवाद को सुलझाने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया है। इस समिति ने सभी हितधारकों के साथ चर्चा शुरू कर दी है और यह अशांति व हिंसा के मूल कारणों की जांच कर प्राथमिकता के आधार पर सरकार को अपनी सिफारिशें सौंपेगी।
औद्योगिक विकास आयुक्त की अध्यक्षता वाली इस समिति में सरकार के कई शीर्ष अधिकारी शामिल हैं। इसके अलावा, निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए समिति में मजदूर संगठनों और उद्योग संघों के प्रतिनिधियों को भी जगह दी गई है।
सोमवार शाम एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने जानकारी दी कि नोएडा के फेज 2 और सेक्टर 60, 62 व 84 के औद्योगिक क्षेत्रों में 80 से अधिक स्थानों पर 40,000 से 45,000 मजदूर सड़कों पर उतर आए थे। इस व्यापक हंगामे के दौरान पुलिस ने 60 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया है।
पुलिस के अनुसार, विभिन्न थानों में अब तक सात एफआईआर दर्ज की गई हैं और कई असामाजिक तत्वों को पकड़ा गया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर दो हैंडल के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज हुई है। पुलिस ने यह भी बताया कि भ्रामक नैरेटिव फैलाने के उद्देश्य से पिछले 24 घंटों में 50 से अधिक बॉट अकाउंट बनाए गए थे।
सुबह के व्यस्त समय में शुरू हुई इस तोड़फोड़ और पत्थरबाजी के कारण नोएडा की कई प्रमुख सड़कें पूरी तरह से अवरुद्ध हो गईं। इसका असर दिल्ली के कुछ हिस्सों में भी दिखा और शहर भर में शाम तक भारी ट्रैफिक जाम की स्थिति बनी रही, जिससे आम लोगों को खासी परेशानी उठानी पड़ी।
औद्योगिक कामगारों का पहला विरोध प्रदर्शन 2 फरवरी को बिहार के बेगूसराय जिले के बरौनी में हुआ था, जहां आईओसीएल (IOCL) रिफाइनरी और एचयूआरएल (HURL) उर्वरक इकाई स्थित है। इसके बाद गुजरात के हीरा कटाई केंद्र सूरत, हरियाणा के ऑटोमोबाइल हब मानेसर और कपड़ा व रीसाइक्लिंग केंद्र पानीपत में भी ऐसे ही प्रदर्शन हुए। गौरतलब है कि नोएडा फुटवियर, टेक्सटाइल और ऑटो पार्ट्स निर्माण इकाइयों का एक प्रमुख केंद्र माना जाता है।
मुख्य रूप से ठेका मजदूरों द्वारा किए जा रहे इन प्रदर्शनों की सबसे बड़ी मांग नियमित कर्मचारियों के समान कामकाज के हालात मुहैया कराना है। इसके साथ ही, न्यूनतम वेतन में वृद्धि, बेहतर ओवरटाइम भुगतान और बकाए की जल्द निकासी भी उनकी प्रमुख मांगों में शामिल है।
कई मजदूर संघों के सूत्रों ने बताया कि कामगारों को नवंबर 2025 में लेबर कोड लागू होने के बाद वेतन वृद्धि की भारी उम्मीद थी। हालांकि, वैसा नहीं हुआ जैसा उन्होंने सोचा था। इसके अलावा मध्य पूर्व में युद्ध छिड़ने, रसोई गैस की कमी और इससे कुछ क्षेत्रों में पैदा हुए संकट ने मजदूरों की निराशा को और बढ़ा दिया है।
वेतन, सामाजिक सुरक्षा, औद्योगिक संबंध और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं काम करने की स्थिति से जुड़े कोड पिछले साल 21 नवंबर को लागू हुए थे। इनका मुख्य उद्देश्य नियोक्ताओं के लिए नियमों को आसान बनाना और मजदूरों के लिए वेतन संरचना व सामाजिक सुरक्षा में एकरूपता सुनिश्चित करना है।
पिछले एक महीने में ऊर्जा संकट गहराने और एलपीजी की कमी के कारण जीवन यापन की लागत काफी बढ़ गई है। इसका सबसे ज्यादा खामियाजा प्रवासी मजदूरों को भुगतना पड़ रहा है, जिनमें से कई ने हालात सुधरने तक अस्थायी रूप से अपने मूल शहरों की ओर लौटने का विकल्प चुना है।
नोएडा में सोमवार का यह प्रदर्शन हरियाणा सरकार द्वारा 9 अप्रैल को न्यूनतम वेतन में किए गए संशोधन के ठीक बाद हुआ है, जो 1 अप्रैल, 2026 से प्रभावी माना जाएगा। 21 अक्टूबर, 2015 के बाद हरियाणा में यह पहला वेतन संशोधन था।
हरियाणा में अब अकुशल श्रमिकों के लिए मूल मासिक न्यूनतम वेतन 15,220.71 रुपये और अत्यधिक कुशल श्रमिकों के लिए 19,42.85 रुपये तय किया गया है। वहीं, ठेका मजदूरों पर लागू होने वाली प्रति-दिन की मजदूरी अब क्रमशः 582.40 रुपये और 747.14 रुपये होगी। मानेसर और फरीदाबाद सहित प्रमुख औद्योगिक केंद्रों में मजदूरों के बड़े पैमाने पर हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद ही हरियाणा सरकार ने इन वृद्धियों की आधिकारिक अधिसूचना जारी की थी।
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