MP अजाक्स संगठन पर कब्जे की साजिश का आरोप, फर्जी दावेदारों पर 420 की कार्रवाई की मांग, भवन में तोड़फोड़ का मामला गरमाया

अजाक्स ने पुलिस प्रशासन की भूमिका पर भी नाराजगी जताई है। संगठन का आरोप है कि अवैध रूप से भवन में प्रवेश करने और तोड़फोड़ करने वालों को रोकने के बजाय उन्हें अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग दिया
MP अजाक्स संगठन पर कब्जे की साजिश का आरोप, फर्जी दावेदारों पर 420 की कार्रवाई की मांग, भवन में तोड़फोड़ का मामला गरमाया
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भोपाल। मध्य प्रदेश अनुसूचित जाति एवं जनजाति अधिकारी-कर्मचारी संघ (अजाक्स) में चल रहे विवाद ने अब गंभीर रूप ले लिया है। संगठन ने आरोप लगाया है कि कुछ तथाकथित और निष्कासित व्यक्तियों द्वारा षड्यंत्रपूर्वक संगठन पर कब्जा करने की कोशिश की जा रही है। इस संबंध में जारी प्रेस विज्ञप्ति में संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि रजिस्ट्रार फर्म्स एंड सोसाइटी कार्यालय में भ्रामक और कूटरचित जानकारी प्रस्तुत कर संगठन की वैधता को चुनौती देने का प्रयास किया गया है, जो कि न केवल गैरकानूनी है बल्कि संगठन की साख को नुकसान पहुंचाने की सुनियोजित साजिश भी है। संघ ने ऐसे व्यक्तियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420 के तहत कार्रवाई की मांग की है।

अजाक्स ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि यह संगठन मध्य प्रदेश के अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के अधिकारियों-कर्मचारियों का एक बड़ा और प्रभावशाली मंच है, जो प्रदेश की लगभग 40 प्रतिशत आबादी का प्रतिनिधित्व करता है। संगठन के अनुसार, इसकी स्थापना से लेकर अब तक भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के अधिकारी ही इसके अध्यक्ष बनते रहे हैं और संगठन ने अपने अनुशासन व सक्रियता के बल पर प्रदेश में एक विशिष्ट पहचान बनाई है। वर्तमान में संगठन के लगभग डेढ़ लाख आजीवन एवं सामान्य सदस्य हैं, जो इसे प्रदेश का सबसे बड़ा कर्मचारी संगठन बनाते हैं। अजाक्स ने राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं के प्रचार-प्रसार और सामाजिक सरोकारों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

संघ के पदाधिकारियों के अनुसार भोपाल के तुलसी नगर स्थित अजाक्स भवन, जो कि संगठन के सदस्यों के योगदान से निर्मित हुआ है, हाल के महीनों में विवाद का केंद्र बन गया है। आरोप है कि कुछ असामाजिक तत्वों ने इस भवन पर अवैध कब्जा करने की नीयत से जबरन प्रवेश किया, मुख्य कांच के दरवाजे तोड़े, ताले बदल दिए और सीसीटीवी डीवीआर को भी नुकसान पहुंचाया। संगठन का कहना है कि यह पूरी घटना सुनियोजित तरीके से अंजाम दी गई है, ताकि संगठन की संपत्ति पर कब्जा किया जा सके और उसकी छवि धूमिल की जा सके।

संघ ने यह भी आरोप लगाया कि जिन व्यक्तियों को पहले ही संगठन विरोधी गतिविधियों और वित्तीय अनियमितताओं के चलते निष्कासित किया जा चुका है, वही लोग अब स्वयं को संगठन का अध्यक्ष घोषित कर रहे हैं। इतना ही नहीं, उन्होंने संगठन के लेटरहेड की नकल कर फर्जी दस्तावेज तैयार किए और रजिस्ट्रार कार्यालय में प्रस्तुत कर भ्रम की स्थिति पैदा की। अजाक्स के पदाधिकारियों ने सवाल उठाया कि वर्ष 1993 से लेकर अब तक संगठन में नियमित रूप से चुनाव और वार्षिक सम्मेलन होते आए हैं, जिनमें इन तथाकथित व्यक्तियों की कोई भूमिका नहीं रही, फिर अचानक वे अध्यक्ष कैसे बन गए?

संगठन ने अपने आधिकारिक नेतृत्व को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की है। संघ के अनुसार, पूर्व प्रांताध्यक्ष जे.एन. कंसोटिया के सेवानिवृत्त होने के बाद 23 नवंबर 2025 को भोपाल के डॉ. अंबेडकर जयंती मैदान, तुलसी नगर में आयोजित प्रांतीय आमसभा में सर्वसम्मति से आईएएस अधिकारी संतोष वर्मा को अध्यक्ष निर्वाचित किया गया था। इस प्रक्रिया की विधिवत सूचना रजिस्ट्रार कार्यालय को दी गई थी और निर्वाचन के बाद प्रतिवेदन भी प्रस्तुत किया गया था। इसके बावजूद रजिस्ट्रार कार्यालय द्वारा कथित रूप से भ्रामक जानकारी स्वीकार करना और समय पर विवाद का समाधान न करना भी सवालों के घेरे में है।

पुलिस की भूमिका पर सवाल

अजाक्स ने पुलिस प्रशासन की भूमिका पर भी नाराजगी जताई है। संगठन का आरोप है कि अवैध रूप से भवन में प्रवेश करने और तोड़फोड़ करने वालों को रोकने के बजाय उन्हें अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग दिया जा रहा है, जो अत्यंत चिंताजनक है। संघ का कहना है कि इस पूरे मामले की शिकायत संबंधित थाना, रजिस्ट्रार कार्यालय और शासन-प्रशासन के उच्च स्तर पर की जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

संगठन के पदाधिकारियों ने इस पूरे प्रकरण को आरक्षित वर्ग के सम्मान और अधिकारों से जुड़ा मुद्दा बताते हुए प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि एक सप्ताह के भीतर दोषी व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई नहीं की गई, तो संगठन को व्यापक आंदोलन के लिए बाध्य होना पड़ेगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन की होगी।

द मूकनायक से बातचीत करते हुए अजाक्स के महासचिव (प्रशासन) एस.एल. सूर्यवंशी ने कहा कि संगठन पर कब्जा करने की कोशिश पूरी तरह से सुनियोजित साजिश है। कुछ निष्कासित लोग खुद को पदाधिकारी बताकर न केवल भ्रम फैला रहे हैं, बल्कि फर्जी दस्तावेजों के जरिए संगठन की छवि को नुकसान पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह मामला केवल संगठन का नहीं, बल्कि उससे जुड़े लाखों सदस्यों की मेहनत और सम्मान का भी है।

उन्होंने आगे कहा कि अजाक्स भवन में जबरन घुसकर तोड़फोड़ करना और ताले बदलना कानून का खुला उल्लंघन है। इस पूरे मामले की शिकायत प्रशासन को दी जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है, जो चिंता का विषय है। सूर्यवंशी ने मांग की कि दोषी लोगों पर सख्त कानूनी कार्रवाई हो, ताकि भविष्य में कोई भी इस तरह की हरकत करने की हिम्मत न कर सके।

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