
नई दिल्ली: भारत में मैनुअल स्कैवेंजिंग और सीवर व सेप्टिक टैंक की खतरनाक सफाई का संकट लगातार गहराता जा रहा है। देश में समानता और गरिमा की संवैधानिक गारंटी, स्पष्ट कानूनी प्रतिबंधों और सर्वोच्च न्यायालय के बार-बार दिए गए निर्देशों के बावजूद सफाई कर्मचारी असुरक्षित परिस्थितियों में लगातार अपनी जान गंवा रहे हैं। केवल पिछले तीन महीनों में ही देश के विभिन्न हिस्सों में सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान कम-से-कम 25 श्रमिकों की मौत दर्ज की जा चुकी है।
इस गंभीर और संवेदनशील मुद्दे पर व्यापक चर्चा करने तथा प्रशासनिक व सामाजिक विफलता को उजागर करने के लिए दलित आदिवासी शक्ति अधिकार मंच (DASAM) आगामी 22 मई 2026 को एक विशेष प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन करने जा रहा है।
यह प्रेस कॉन्फ्रेंस नई दिल्ली स्थित प्रेस क्लब ऑफ इंडिया के ग्राउंड फ्लोर पर बने न्यू लाउंज में शाम 4:00 बजे से 6:00 बजे तक आयोजित की जाएगी। इसमें मीडिया के सदस्यों, नागरिक समाज संगठनों, ट्रेड यूनियनों, शोधकर्ताओं, शिक्षाविदों और चिंतित नागरिकों को आमंत्रित किया गया है।
आयोजक संस्था का मानना है कि ये मौतें कोई अलग-थलग या दुर्भाग्यपूर्ण दुर्घटनाएँ नहीं हैं, बल्कि ये जाति-आधारित और शोषणकारी श्रम प्रथाओं के लगातार बने रहने को दर्शाती हैं।
इसके साथ ही देश में पर्याप्त मशीनीकरण की कमी, सुरक्षा मानकों का कमजोर क्रियान्वयन तथा राज्य संस्थाओं और नागरिक निकायों द्वारा कानून को लागू करने में लगातार विफलता भी इसके लिए जिम्मेदार है। बिना उचित सुरक्षा उपकरणों के श्रमिकों को जहरीले सीवर और सेप्टिक टैंकों में उतारना मानवाधिकारों, श्रम अधिकारों और संवैधानिक मूल्यों का गंभीर उल्लंघन है।
इस प्रेस कॉन्फ्रेंस का मुख्य उद्देश्य खतरनाक सफाई कार्य की वर्तमान वास्तविकता और उसे बनाए रखने वाली संरचनात्मक परिस्थितियों की ओर देश का तत्काल ध्यान आकर्षित करना है।
इसके साथ ही सफाई कर्मचारियों और उनके परिवारों के लिए न्याय, जवाबदेही, पुनर्वास और सम्मानजनक आजीविका से लगातार हो रहे इनकार को भी प्रमुखता से रेखांकित किया जाएगा। चर्चा के दौरान इस बात पर विशेष ध्यान दिया जाएगा कि कानूनी प्रतिबंध होने के बावजूद सीवर और सेप्टिक टैंक में मौतें क्यों नहीं रुक रही हैं।
कार्यक्रम के दौरान जानलेवा सफाई कार्यों के लिए जिम्मेदार ठेकेदारों, नगर निकायों और सरकारी एजेंसियों की जवाबदेही तय करने में प्रशासनिक विफलता पर भी विस्तार से बात होगी। वक्ताओं द्वारा बार-बार होने वाले उल्लंघनों के बावजूद मैनुअल स्कैवेंजिंग कानून के तहत बेहद कम दोषसिद्धि दर का मुद्दा उठाया जाएगा।
इसके साथ ही मृत श्रमिकों के परिवारों को मुआवजा देने में होने वाली देरी व अनियमितताओं तथा पुनर्वास उपायों के अपर्याप्त क्रियान्वयन और स्थायी आजीविका विकल्पों की कमी को भी सामने लाया जाएगा।
चर्चा के अन्य महत्वपूर्ण बिंदुओं में सफाई कार्य में पूर्ण मशीनीकरण सुनिश्चित करने और अनिवार्य सुरक्षा उपाय लागू करने में सिस्टम की विफलता शामिल है। मैनुअल स्कैवेंजिंग कानून और सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों के संबंध में आम जनता तथा संस्थाओं में सीमित जागरूकता एक बड़ी बाधा बनी हुई है।
वक्ताओं का मानना है कि इस जाति-आधारित सफाई श्रम को पूरी तरह समाप्त करने के लिए मजबूत कानूनी प्रवर्तन, संस्थागत जवाबदेही और गहरे सामाजिक परिवर्तन की तत्काल आवश्यकता है।
इस महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्य वक्ता के रूप में दिल्ली जल बोर्ड सीवर विभाग मजदूर संगठन के महासचिव सुशील कुमार चंदेल, म्यूनिसिपल वर्कर्स लाल झंडा यूनियन (CITU) के अध्यक्ष धर्मेंद्र भाटी और अखिल भारतीय निगम मजदूर अधिकार यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव पालीवाल शामिल होंगे।
उनके साथ ही अधिवक्ता कवलप्रीत कौर और दलित आदिवासी शक्ति अधिकार मंच (DASAM) की राष्ट्रीय समन्वयक मोहसिना अख्तर भी अपने विचार साझा करेंगी। कार्यक्रम का कुशल संचालन महिला कामकाजी मंच (DASAM का महिला विंग) की राष्ट्रीय समन्वयक सुनीता चौहान द्वारा किया जाएगा।
आयोजक संस्था ने अपील की है कि सफाई कर्मचारियों, प्रभावित परिवारों और उन हाशिए पर मौजूद समुदायों की आवाज़ को मजबूत करने में सभी वर्ग अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें, जो आज भी जाति-आधारित और खतरनाक श्रम का बोझ उठाने को मजबूर हैं।
न्याय, जवाबदेही, पुनर्वास, सुरक्षा और सभी सफाई कर्मचारियों के सम्मान की सामूहिक मांग को मजबूत करने के लिए व्यापक सहयोग और उपस्थिति की अपेक्षा की गई है। इस संबंध में किसी भी जानकारी के लिए आयोजकों द्वारा मोबाइल नंबर 8491052270 जारी किया गया है।
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