MP: दो बच्चों की मौत के बाद खसरा संक्रमण रोकथाम की तैयारी!

खसरा से प्रभावित होने वाले बच्चों में करीब 30 प्रतिशत की मौत हो जाती है।
सांकेतिक फोटो।
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भोपाल। मध्य प्रदेश में खसरा तेजी से फैल रहा है। डॉक्टर्स इसका कारण मौसम में हो रहे अचानक बदलाव को मान रहे हैं। अब तक इस बीमारी से प्रदेश में 2 बच्चों की मौत हो चुकी है। खसरा रूबेला जैसे संक्रमण को रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने टीकाकरण अभियान को तेज करने और स्वयं सहायता समूह के सहयोग से ग्रामीण इलाकों में जागरूकता का काम शुरू किया है। 

राज्य टीकाकरण अधिकारी डॉ. संतोष शुक्ला ने बताया कि प्रदेश में प्रतिवर्ष खसरा के लगभग 125 से 250 रोगी मिलते हैं। जनवरी माह में दिल्ली में हुई एक बैठक में प्रदेश में हुए इन बीमारियों से निपटने के लिए किए जा रहे नवाचारों की जानकारी दी गई थी। प्रदेश में किए जा रहे इन नवाचारों को सभी राज्यों में लागू करने की बात केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा की गई है। 

राज्य टीकाकरण अधिकारी ने बताया इन बीमारियों को जड़ से नष्ट करने के लिए सबसे बड़ी रणनीति है कि लक्ष्य के 95 प्रतिशत बच्चों का टीकाकरण हो। हमारे अभियान में अब तक शुरुआत में यह 90 प्रतिशत रहा है। दूसरी बात यह कि आउटब्रेक यानी अचानक किसी जगह पर खसरा का फैलाव रोककर लक्ष्य के अनुरूप इस बीमारी का उन्मूलन किया जा सकता है।

30 प्रतिशत रोगियों की होती है मौत

डॉक्टर्स के मुताबिक खसरा, रूबेला के वायरस से होने वाली बीमारी कोरोना और दूसरी बीमारियों से बहुत ज्यादा संक्रामक है। इससे प्रभावित होने वाले बच्चों में करीब 30 प्रतिशत की मौत हो जाती है। बाकी को अलग-अलग तरह की दिव्यांगता होती है। यह वायरस शरीर के भीतर की झिल्लियों पर असर डालता है। इस बीमारी से प्रभावित महिला से जन्म लेने वाले बच्चों में जन्मजात विकृति रहती है। नौ से 12 माह की उम्र में खसरा-रूबेला का पहला और 16 से 24 माह में दूसरा टीका लगता है।

संक्रमण से दो बच्चों की मौत

दरअसल, पिछले महीने ही मैहर जिले के बुढागर, सेमरा, खेरवासानी, मोहनिया, डूडी, यदुवीरनगर, मतवारा और घुनवारा में खसरा फैल गया था। बुढागर में 12 और 14 फरवरी को 7 और 8 साल के दो बच्चों ने दम तोड़ दिया था। एक बच्चे को बुखार के साथ झटके आ रहे थे। दूसरे को बुखार और पूरे शरीर पर लाल दाने आ गए थे। 

15 फरवरी को माध्यमिक शाला बुढागर के प्रिंसिपल ने घुनवारा के संकुल प्राचार्य को पत्र लिखकर तीसरी क्लास में पढ़ने वाले छात्र की मौत की जानकारी दी थी। इसी दिन सेमरा की माध्यमिक शाला के हेडमास्टर ने भी संकुल प्राचार्य को अधिकांश बच्चों में स्मॉल पॉक्स जैसे लक्षण होने की जानकारी दी थी। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग को इसकी जानकारी दी गई। स्मॉल पॉक्स के लक्षण तरह दिखने वाली बीमारी गांव में तेजी से फैल रही है। 

कलेक्टर रानी बाटड़ ने स्वास्थ्य विभाग की टीम को अलर्ट रहने के लिए कहा है। कलेक्टर खुद लगातार प्रभावित गांवों का दौरा कर रही हैं। आशंका जताई जा रही है कि बच्चों में स्मॉल पॉक्स फैल रहा है। गांवों में लोग इसे छोटी माता का प्रकोप मान रहे हैं। इसी कारण लोग अब तक इलाज से बचते रहे और घरेलू नुस्खे अपनाकर बच्चों के ठीक होने का इंतजार करते रहे। उस समय इस संक्रमण को अज्ञात माना जा रहा था, बाद में सेंपल की जांच में खसरा फैलने की पुष्टि की गई थी। 

कैसे फैलता है खसरा?

खसरा को रूबेला के नाम से भी जाना जाता है। यह संक्रामक बीमारी है जो तेजी से एक व्यक्ति से दूसरे तक फैलती है। खसरे का वायरस नाक-गले में म्यूकस की तरह भर जाता है। जब संक्रमित व्यक्ति खांसता या छींकता है तो यह वायरस एक व्यक्ति से दूसरे में तक पहुँच जाता है। डॉक्टर्स के मुताबिक 7-14 दिनों में इसके लक्षण दिखाई देते हैं। इस बीमारी में स्किन पर हल्के रैशेज आ जाते हैं। यह बीमारी छोटे बच्चों के लिए बेहद खतरनाक है। 

यह हैं लक्षण

  • 104 डिग्री तक तेज बुखार आना। 

  • तेज खांसी आना और बहती हुई नाक। 

  • आंखों से पानी आना।

  • काफी ज्यादा दस्त होना।

  • गाल के अंदर छोटे धब्बे। 

  • शरीर में गहरे और लाल दाने निकलना। 

खसरे से बचाव ऐसे करें

खसरे से बचने का सबसे अच्छा तरीका है। समय पर इंजेक्शन। अगर फिर भी खसरा हो जाए तो भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचें। खसरे के लक्षण तुरंत नहीं दिखाई देते हैं। इसलिए साफ-सफाई का खास ध्यान रखें। खसरा एक संक्रामक बीमारी है। अगर आपको बच्चे का लक्षण देखकर लग रहा है कि अस्पताल जाना चाहिए तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। जांच कराएं। यदि गर्भवती महिला के त्वचा पर ऐसे कुछ लक्षण दिखाई दे रहे हैं तो बिना समय गवाएं तुरंत डॉक्टर के पास जाएं। 

खसरा से बचने का सबसे अच्छा तरीका वैक्सीन है।  बच्चों को समय पर वैक्सीन लगवाएं। इसके दो डोज दिए जाते हैं। पहला जब बच्चा एक साल का हो जाता है, और दूसरा बूस्टर डोज उसके स्कूल शुरू होने से पहले यानि जब वह तीन साल 4 महीने का हो जाता है तब लगवाना चाहिए।

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