MP: सरकारी अस्पतालों के हाल, टूटे पलंग से गिरकर वृद्ध-आक्सीजन नहीं मिलने से गर्भवती महिला की मौत!

भोपाल शहर के सरकारी अस्पतालों में अव्यवस्था का आलम, चिकित्सालय प्रशासन की अनदेखी .
कमला नेहरू अस्पताल.
कमला नेहरू अस्पताल.

भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के सरकारी अस्पतालों में बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था और सिस्टम की लापरवाही के कारण एक वृद्ध महिला की टूटे पलंग से गिरने के कारण मौत हो गई। इसके पहले एम्ब्युलेंस के देरी से मिलने और ऑक्सीजन नहीं होने के कारण एक गर्भवती महिला की मौत हुई थी। 

ताजा मामला कमला नेहरू अस्पताल का है।यहां महिला बेड पर लगे साइड रेल को पकड़ कर उठ रही थी, लेकिन अचानक लॉक खुलने से संतुलन बिगड़ा और वह नीचे गिर पड़ी, जिसके बाद महिला की मौत हो गई। इस मामले में परिजनों का आरोप है कि महिला जिस बेड पर थी वो टूटा हुआ था। उससे उठते समय महिला गिर गई और सिर में चोट लगने से उनकी मौत हो गई। घटना के दौरान वहां ना डॉक्टर थे ना ही कोई वॉर्डब्यॉय। अगर समय पर इलाज मिल जाता तो महिला मरीज की जान बच सकती थी।

जेपी नगर की रहने वाली 60 वर्षीय गैस पीड़ित जीनत बी को सांस में तकलीफ के चलते 22 फरवरी को कमला नेहरू अस्पताल में भर्ती कराया गया था। द मूकनायक से जीनत की बेटी शबाना ने बताया कि माँ की तबीयत खराब थी। हमने उन्हें रात में अस्पताल में भर्ती कराया था। मां के साथ पिता रुके थे। रात करीब 1:30 बजे जीनत वॉशरूम जाने के लिए उठी।

उठने के लिए उन्होंने जैसे ही साइट रेल का सहारा लिया, उसका लॉक खुल गया। वे पलंग से गिर पड़ीं। इस दौरान दीवार के पिलर से सिर टकराने से उन्हें गंभीर चोट भी आई। शबाना ने अस्पताल प्रबंधन पर आरोप लगाया कि घटना के समय वार्ड में न कोई डॉक्टर था न ही कोई वार्ड ब्यॉय था। पिता काफी देर तक परेशान होते रहे।

करीब आधे घंटे बाद कोई वार्ड ब्यॉय आया तो उसने बताया कि रात में टांके नहीं लगाए जा सकते, इसलिए मरीज को हमीदिया अस्पताल ले जाएं। मरीज की स्थिति ऐसी नहीं थी कि उन्हें उठाकर हमीदिया तक ले जाया जा सके। मरीज की बिगड़ती हालत देखकर वार्ड ब्यॉय किसी जूनियर डॉक्टर को लेकर आया। जब तक डॉक्टर आए तब तक जीनत की मौत हो चुकी थी। इस घटना के संबंध में अस्पताल अधीक्षक डॉ. संजय जैन ने द मूकनायक से बताया कि मामला संज्ञान में आया है, मैं उस दिन बाहर था। जानकारी लेकर बताऊंगा।  

ऑक्सीजन नहीं मिलने से चली गई गर्भवती की जान

सरकारी सिस्टम की लापरवाही के चलते 13 फरवरी को एक गर्भवती महिला सुमन की मौत हो गई थी। सुमन राजधानी के जेपी अस्पताल में भर्ती थी, लेकिन तबीयत बिगड़ने पर उसे हमीदिया अस्पताल रेफर किया गया। लेकिन जेपी से हमीदिया जाने के लिए पहले तो एंबुलेंस नहीं मिली, फिर एंबुलेंस मिली तो ऑक्सीजन नहीं मिली। ऐसे में सुमन की तबीयत बिगड़ गई और हमीदिया में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। 

सुमन के पति गोपाल राव बांगर ने बताया कि सुमन की सिजेरियन डिलीवरी होनी थी। सुबह 10 बजे पत्नी को लेकर जय प्रकाश अस्पताल (जेपी) पहुँचें थे। यहां सुमन को जरूरी इंजेक्शन लगाए गए। उसे झटके (एक्लेम्शिया) आना शुरू हो गए। स्थिति नहीं सुधरी तो डॉक्टरों ने 12 बजे हमीदिया रेफर कर दिया। 

जब एंबुलेंस लेने गए तो वहां एंबुलेंस का ड्राइवर गायब था। अस्पताल प्रबंधन को जानकारी दी तो 15-20 मिनट बाद ड्राइवर आया। सुमन को एंबुलेंस में शिफ्ट किया। डॉक्टर्स ने कहा कि इसे ऑक्सीजन लगाओ तो पता चला कि ऑक्सीजन नहीं थी। तबीयत लगातार बिगड़ती देख उसे बिना ऑक्सीजन के हमीदिया ले गए। अस्पताल में सुमन ने दम तोड़ दिया। 

डॉक्टरों की भारी कमी

मध्य प्रदेश मेडिकल काउंसिल द्वारा जुलाई 2022 में जारी आंकड़ों से पता चलता है कि राज्य में 51 जिला अस्पतालों, 66 सिविल अस्पतालों, 335 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, 1170 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, 9192 स्वास्थ्य उप-केंद्रों और 49,864 ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों के साथ 19 सरकारी मेडिकल कॉलेज हैं। प्रदेश को अपने नागरिकों स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए 77 हजार डॉक्टर्स की जरूरत है, लेकिन वर्तमान में राज्य में केवल 22 हजार डॉक्टर्स ही काम कर रहे हैं। डॉक्टर्स की कमी के कारण भी अस्पतालों में अव्यवस्थाएं बनी हुई हैं। 

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