
भोपाल। मध्यप्रदेश के धार जिले के आदिवासी अंचल में बालिकाओं के लिए संचालित एक छात्रावास की व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर शिकायतें सामने आई हैं। धामनोद विकासखंड के अंतर्गत आने वाले संत फ्रांसिस जेवियर बालिका छात्रावास, धानी में रह रही बालिकाओं ने छात्रावास की विभिन्न व्यवस्थाओं को लेकर अपने अभिभावकों को जानकारी दी। शिकायत मिलने के बाद अभिभावकों ने प्रशासनिक अधिकारियों को मामले से अवगत कराया।
सूचना मिलने पर विकासखंड शिक्षा अधिकारी राजेश रावल और तहसीलदार अंजलि गुप्ता छात्रावास पहुंचे और व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। इस दौरान अनुविभागीय अधिकारी पुलिस मोनिका सिंह भी मौजूद रहीं। अधिकारियों ने छात्रावास में रह रही बालिकाओं से बातचीत कर उनकी समस्याएं और शिकायतें सुनीं।
सप्ताह में केवल दो बार नहाने देने की शिकायत
निरीक्षण के दौरान बालिकाओं ने अधिकारियों को बताया कि उन्हें नियमित रूप से नहाने की अनुमति नहीं दी जाती। छात्राओं का आरोप है कि उन्हें सप्ताह में केवल दो बार ही नहाने दिया जाता है, जिससे व्यक्तिगत स्वच्छता को लेकर उन्हें परेशानी होती है।
घर से दूर आदिवासी अंचल की बालिकाओं के छात्रावास में रहने के कारण यह शिकायत चिंता का विषय बन गई है। बालिकाओं ने अधिकारियों के सामने स्वच्छता और दैनिक जरूरतों के लिए पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग भी रखी।
भोजन में इल्ली मिलने का आरोप
बालिकाओं ने छात्रावास में मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए। छात्राओं के अनुसार, भोजन में इल्ली मिलने जैसी स्थिति सामने आई है। इसके अलावा भोजन की गुणवत्ता और छात्रावास की अन्य व्यवस्थाओं में भी कमियां होने की शिकायत अधिकारियों से की गई।
अधिकारियों ने निरीक्षण के दौरान भोजन और पानी सहित अन्य व्यवस्थाओं की जानकारी ली। विकासखंड शिक्षा अधिकारी राजेश रावल ने बताया कि खाने और पानी आदि को लेकर मिली शिकायतों के संबंध में नोटिस दिया जा रहा है।
बाल काटने की शिकायत पर खंगाले कैमरे
छात्रावास की बालिकाओं के बाल काटने की शिकायत भी सामने आई थी। इस शिकायत को लेकर अधिकारियों ने छात्रावास में लगे कैमरों की रिकॉर्डिंग खंगाली। हालांकि जांच के दौरान फिलहाल बाल काटने की घटना से संबंधित कोई प्रमाण सामने नहीं आने की बात कही गई है।
प्रभारी बोलीं- 56 साल से सेवा कार्य, आरोप निराधार
संत फ्रांसिस जेवियर बालिका छात्रावास, धानी की प्रभारी अर्चना सिस्टर ने बालिकाओं के आरोपों को निराधार बताया है। उन्होंने कहा कि इन आरोपों से वे बेहद दुखी हैं।
उनके अनुसार, संस्था पिछले 56 वर्षों से सेवा कार्य कर रही है और छात्रावास का संचालन नियमों के अनुसार किया जाता है। उन्होंने कहा कि बच्चों द्वारा लगाए गए आरोप सही नहीं हैं और सभी व्यवस्थाएं नियमानुसार संचालित की जा रही हैं।
अब कार्रवाई का इंतजार
बालिकाओं की शिकायतों के बाद छात्रावास की व्यवस्थाओं को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। निरीक्षण के दौरान सामने आई शिकायतों के आधार पर अब संबंधित विभाग की कार्रवाई पर अभिभावकों और स्थानीय लोगों की नजर रहेगी।
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