
भोपाल। बीते 23 जनवरी 2025 को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राजधानी भोपाल के जीजी फ्लाईओवर (गायत्री मंदिर से गणेश मंदिर तक) का लोकर्पण किया था। इस दौरान उन्होंने घोषणा की थी कि इस फ्लाईओवर का नाम संविधान निर्माता बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के नाम पर रखा जाएगा। लेकिन एक माह बीत जाने के बाद भी प्रशासन की ओर से इस संबंध में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। न ही फ्लाईओवर पर कोई नामकरण बोर्ड लगाया गया और न ही आधिकारिक दस्तावेजों में इसका नाम बदला गया।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की घोषणा के बावजूद प्रशासन की निष्क्रियता कई सवाल खड़े करती है। नामकरण को लेकर सरकारी आदेश जारी नहीं किए गए, जिससे संकेत मिलता है कि मुख्यमंत्री की घोषणाओं को प्रशासनिक अमला गंभीरता से नहीं ले रहा। आमतौर पर, किसी स्थान का नाम बदलने के लिए शहरी विकास विभाग और नगर निगम को प्रस्ताव पारित कर गजट नोटिफिकेशन जारी करना होता है। लेकिन अब तक इस प्रक्रिया की शुरुआत नहीं की गई है।
नामकरण प्रक्रिया की पड़ताल के लिए जब द मूकनायक ने गूगल मैप पर जांच की तो वहां अब भी 'जीजी फ्लाईओवर' नाम ही दिखा। यह स्पष्ट करता है कि प्रशासन ने सीएम की घोषणा को लेकर कोई कदम नहीं उठाया है। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर किसी स्थान का नाम अपडेट करने के लिए स्थानीय प्रशासन को आधिकारिक सूचना भेजनी होती है, लेकिन यह पहल भी नहीं की गई।
भोपाल के एमपी नगर क्षेत्र में स्थित यह फ्लाईओवर गायत्री मंदिर से गणेश मंदिर तक फैला है। इसकी कुल लंबाई लगभग 2,900 मीटर और चौड़ाई 15 मीटर है। इसका निर्माण कार्य दिसंबर 2020 में शुरू हुआ और दिसंबर 2024 में पूरा हुआ। इसके निर्माण में 154 करोड़ रुपये की लागत आई थी। यह फ्लाईओवर भोपाल की प्रमुख सड़कों में से एक है और इससे रोजाना हजारों वाहन गुजरते हैं।
बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के नाम पर फ्लाईओवर का नामकरण करना एक अच्छी पहल थी। लेकिन जिस तरह से प्रशासन की ओर से देरी की जा रही है, उसे लेकर बहुजन संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं में असंतोष है। कई संगठनों का कहना है कि यदि सरकार और प्रशासन गंभीर होते तो अब तक नामकरण की औपचारिकताएं पूरी हो जातीं।
एससी आयोग के पूर्व सदस्य एवं कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने द मूकनायक से बातचीत में कहा कि गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में बाबा साहब का अपमान किया है, और मुख्यमंत्री मोहन यादव उस पर पर्दा डालने के लिए ढोंग रच रहे हैं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश बाबा साहब की जन्मस्थली है, लेकिन यहां की भाजपा सरकार केवल दिखावा कर रही है।
अहिरवार ने सीएम मोहन यादव के उस दावे को झूठा बताया, जिसमें उन्होंने कहा था कि जीजी प्लाइओवर का नाम बदलकर "डॉ. अंबेडकर सेतु" किया गया है। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि यदि वास्तव में ऐसा हुआ है तो सरकार बताए कि वहां बाबा साहब के नाम की कोई पट्टिका लगी है या नहीं। अहिरवार ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि ये लोग सिर्फ बाबा साहब का नाम लेते हैं, लेकिन आरएसएस के किसी भी दफ्तर में उनकी एक भी तस्वीर नहीं मिलती।
मुख्यमंत्री मोहन यादव की इस घोषणा के पीछे असल वजह अमित शाह के बयान पर देशभर में उठे बहुजन समाज के आक्रोश को शांत करना था। जब गृह मंत्री के बयान के खिलाफ बहुजन संगठन सड़कों पर उतरकर विरोध जता रहे थे और अमित शाह से माफी की मांग कर रहे थे, तब मध्यप्रदेश में भी इसी तरह का माहौल था। बढ़ते दबाव को देखते हुए सीएम मोहन यादव ने आनन-फानन में मंच से जीजी प्लाइओवर का नाम "डॉ. अंबेडकर सेतु" करने की घोषणा कर दी।
हालांकि, यह घोषणा सिर्फ भाषण तक ही सीमित रही और कागजों में इसका कोई आधिकारिक दर्ज नहीं हुआ। मीडिया में इस घोषणा की खूब चर्चा हुई, लेकिन हकीकत में सेतु का नाम नहीं बदला। यह सिर्फ बहुजन समाज के गुस्से को ठंडा करने की एक राजनीतिक चाल साबित हुई।
इस संबंध में 'द मूकनायक' प्रतिनिधि ने भोपाल कलेक्टर कौशलेन्द्र विक्रम सिंह से संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी।
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