
भोपाल। मध्य प्रदेश के सागर जिले के बंडा क्षेत्र में नकली और जहरीली शराब पीने से मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। अब तक 15 लोगों की मौत होने की जानकारी सामने आई है, जबकि करीब 109 मरीज अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती हैं। इनमें बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में भर्ती 85 मरीजों में से 12 मरीजों को आईसीयू में रखा गया है। वहीं एक गंभीर मरीज को एयरलिफ्ट कर भोपाल के एम्स भेजा गया है। हादसे के बाद प्रभावित गांवों में दहशत का माहौल है, जबकि प्रशासन और पुलिस महकमे में हड़कंप मचा हुआ है।
कई मरीजों के शरीर पड़े नीले, मेथेनॉल की आशंका
जहरीली शराब पीने के बाद कई मरीजों में गंभीर लक्षण सामने आए हैं। कुछ मरीजों के शरीर नीले पड़ गए हैं, जबकि कई मरीजों में शरीर में अकड़न, उल्टी, सिरदर्द और कमजोरी जैसी शिकायतें सामने आई हैं। कुछ मरीजों की आंखों से संबंधित परेशानी की भी जानकारी सामने आई है। प्रशासन के मुताबिक कुछ शवों के पोस्टमॉर्टम में मिथाइल अल्कोहल के सेवन की आशंका सामने आई है। हालांकि शराब में मेथेनॉल की मौजूदगी और उसकी मात्रा की अंतिम पुष्टि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी।
घटना के बाद शराब के सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं। प्रशासन यह पता लगाने में जुटा है कि शराब में जहरीला पदार्थ किस स्तर पर मिला और यह सामग्री कहां से आई। शुरुआती जांच में मेथेनॉल यानी मिथाइल अल्कोहल की मिलावट की आशंका को गंभीरता से लिया जा रहा है।
109 मरीजों का अस्पतालों में इलाज
कलेक्टर प्रतिभा पाल के मुताबिक अवैध शराब से प्रभावित 109 मरीजों का इलाज किया जा रहा है। इनमें 85 मरीज बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में भर्ती हैं, जिनमें 12 मरीज आईसीयू में हैं। जिला चिकित्सालय में 17 और बंडा सिविल अस्पताल में 7 मरीज उपचाररत हैं। एक गंभीर मरीज को एयरलिफ्ट कर भोपाल के एम्स भेजा गया है। प्रशासन का कहना है कि अधिकांश मरीजों की हालत फिलहाल स्थिर है और सभी मरीजों को आवश्यक दवाएं, जांच और जरूरत के मुताबिक डायलिसिस की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।
प्रभावित गांवों में मेडिकल टीमों को भेजकर लगातार स्क्रीनिंग की जा रही है। जिन लोगों में शराब पीने के बाद संदिग्ध लक्षण दिखाई दे रहे हैं, उन्हें तत्काल अस्पताल पहुंचाया जा रहा है। प्रशासन का मुख्य फोकस नए मरीजों की पहचान करने के साथ गंभीर मरीजों को समय पर इलाज उपलब्ध कराने पर है।
FIR में सामने आया सस्ती शराब बेचने का मामला
बंडा थाने में दर्ज FIR में जहरीली शराब के कथित नेटवर्क को लेकर कई गंभीर आरोप सामने आए हैं। शिकायतकर्ता अनूप सिंह लोधी के मुताबिक उसके गांव में करीब आठ लोग अवैध रूप से शराब बेचने का काम करते हैं। 4 सितंबर को वह अपने भतीजे राजेंद्र लोधी के साथ गांव में जुझार लोधी की दुकान पर गया था।
FIR के मुताबिक जुझार लोधी ने कथित तौर पर बताया कि एक नया सस्ता ब्रांड बरेठी के लाइसेंसी शराब ठेकेदार यशवंत सिंह, मनीष लोधी और आशीष साहू निवासी बंडा से जुड़े लोगों के माध्यम से लाया गया है। शिकायत में आरोप है कि यह शराब बाजार से करीब 20 रुपये सस्ती मिल रही थी।
राजेंद्र ने जुझार की दुकान से 70 रुपये में एक क्वार्टर देशी शराब खरीदी और उसका सेवन किया। इसके बाद रात में उसकी तबीयत बिगड़ गई। उसे पहले बंडा अस्पताल ले जाया गया, जहां से हालत गंभीर होने पर सागर रेफर किया गया। इलाज के दौरान राजेंद्र की मौत हो गई। शिकायत में करतार सिंह लोधी और दिग्विजय सिंह लोधी की भी शराब पीने के बाद मौत होने का उल्लेख किया गया है।
शराब बनाने के फार्मूले को लेकर भी आरोप
FIR में यह भी आरोप लगाया गया है कि जब राजेंद्र ने शराब के नकली या जहरीली होने की आशंका जताई, तो जुझार लोधी ने कथित तौर पर उसे बताया कि ब्रांड वही है और इसे शराब के फार्मूले से तैयार किया गया है। पुलिस अब इन आरोपों की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित तौर पर शराब कहां तैयार हुई, इसमें किन पदार्थों का इस्तेमाल किया गया और इसे किन लोगों के जरिए गांवों तक पहुंचाया गया।
25 से ज्यादा लोगों पर FIR, 10 आरोपी गिरफ्तार
एसपी अनुराग सुजानिया के मुताबिक बंडा और विनायका थानों में 25 से अधिक नामजद लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर शराब के निर्माण, सप्लाई और बिक्री से जुड़े नेटवर्क के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की अलग-अलग टीमें लगातार दबिश दे रही हैं।
मामले में लाइसेंसी ठेकेदारों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। बंडा क्षेत्र के मामले में लाइसेंसी ठेकेदार यशवंत ठाकुर का नाम सामने आया है, जबकि विनायका थाना क्षेत्र में लाइसेंसी ठेकेदार सिद्धार्थ कुशवाहा समेत अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।
ततरवारा से अवैध शराब की सप्लाई का दावा
स्थानीय ग्रामीणों ने नाम न छापने की शर्त पर दावा किया है कि नौराज ग्राम पंचायत के ततरवारा गांव में लंबे समय से अवैध रूप से शराब बनाने और बेचने का काम चल रहा है। ग्रामीणों के मुताबिक यहां से आसपास के कई गांवों में शराब की सप्लाई की जाती है। उनका आरोप है कि इस अवैध कारोबार में प्रभावशाली और आपराधिक प्रवृत्ति के लोग भी जुड़े हुए हैं, जिसके कारण ग्रामीण खुलकर उनके नाम लेने से डरते हैं।
ग्रामीणों ने स्थानीय पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल उठाए हैं और आरोप लगाया है कि ततरवारा में लंबे समय से चल रहे कथित अवैध शराब कारोबार के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और पुलिस जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि ततरवारा का कथित नेटवर्क जहरीली शराब कांड से जुड़ा है या नहीं।
ललितपुर से शराब आने का शक
एसपी अनुराग सुजानिया के मुताबिक शुरुआती जांच में शराब की सप्लाई उत्तर प्रदेश के ललितपुर से होने की बात सामने आई है। पुलिस ने इस एंगल पर भी जांच शुरू कर दी है। कुछ लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है और यह पता लगाया जा रहा है कि ललितपुर से शराब सागर के प्रभावित इलाकों तक किस नेटवर्क के जरिए पहुंची।
पुलिस की जांच अब केवल शराब बेचने वालों तक सीमित नहीं है, बल्कि शराब के निर्माण, परिवहन, सप्लाई और बिक्री से जुड़े पूरे नेटवर्क को खंगाला जा रहा है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि शराब कहां बनी, इसमें मेथेनॉल या अन्य जहरीला पदार्थ कहां से आया और किन लोगों की मदद से इसे गांवों तक पहुंचाया गया।
लापरवाही पर 5 अधिकारी निलंबित
जहरीली शराब कांड के बाद प्रशासन ने आबकारी और पुलिस विभाग के पांच अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। इनमें सहायक आबकारी आयुक्त कीर्ति दुबे, जिला आबकारी अधिकारी दिलीप खंडाते, बंडा की आबकारी उप निरीक्षक रोशनी उरेते, गूगरा चौकी प्रभारी ASI पूरन सिंह और बंडा थाना प्रभारी राजेंद्र कुशवाहा शामिल हैं।
इसके अलावा संभागीय फ्लाइंग स्क्वाड प्रभारी नीरज श्रीवास्तव को ग्वालियर मुख्यालय अटैच किया गया है। अधिकारियों पर कार्रवाई के बाद प्रशासनिक स्तर पर भी अवैध शराब के खिलाफ निगरानी और कार्रवाई तेज कर दी गई है।
7 शराब दुकानें सील
घटना के बाद प्रशासन ने एहतियातन इलाके की सात लाइसेंसी शराब दुकानों को सील कर दिया है। इनमें बरेठी, बंडा, शाहगढ़, मगरधा, विनायका, दलपतपुर और बरायठा की शराब दुकानें शामिल हैं। इन दुकानों से शराब के सैंपल भी लिए गए हैं और उन्हें जांच के लिए भेजा गया है।
प्रशासन यह पता लगाने में जुटा है कि जहरीली शराब किसी लाइसेंसी शराब दुकान से निकली थी या फिर अवैध शराब बनाने और बेचने वाले नेटवर्क के जरिए गांवों तक पहुंची।
कमिश्नर-आईजी ने प्रभावित गांवों का किया दौरा
मौतों की सूचना मिलने के बाद सागर संभाग के कमिश्नर, आईजी, कलेक्टर और एसपी प्रभावित गांव नौराज और गूगरा खुर्द पहुंचे। अधिकारियों ने पीड़ित परिवारों से मुलाकात की और घटनास्थल की स्थिति का जायजा लिया। इसके बाद अस्पतालों में पहुंचकर भर्ती मरीजों के इलाज की व्यवस्थाओं का भी निरीक्षण किया गया।
मेडिकल टीमों को प्रभावित क्षेत्रों में लगातार स्क्रीनिंग करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन का कहना है कि संदिग्ध लक्षण वाले किसी भी व्यक्ति को इलाज से वंचित नहीं रहने दिया जाएगा।
डिप्टी सीएम ने कहा- दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा
डिप्टी सीएम और सागर जिले के प्रभारी मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने मामले को गंभीर बताते हुए निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की बात कही है। उन्होंने कहा कि शराब में मेथेनॉल पहुंचने के स्रोत का पता लगाया जाएगा और इसकी सप्लाई से जुड़ी पूरी चेन को खंगाला जाएगा।
प्रशासन का कहना है कि जांच में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। पुलिस भी गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर फरार आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।
मौतों ने खड़े किए कई गंभीर सवाल
सागर में जहरीली शराब से हुई मौतों ने जिले में अवैध शराब के कारोबार और प्रशासनिक निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ पुलिस शराब के कथित सप्लाई नेटवर्क को तलाश रही है, वहीं दूसरी तरफ आबकारी और पुलिस विभाग के अधिकारियों के निलंबन से स्थानीय स्तर पर निगरानी में हुई कथित लापरवाही की जांच भी सवालों के घेरे में है।
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